खराब खान-पान बना रहा दिल का मरीज, एक साल में हुई 40 लाख मौतें; बचाव के लिए आज ही बदलें डाइट
हम सभी जीने के लिए खाते हैं, लेकिन क्या हो अगर हमारा भोजन ही हमारी जान का सबसे बड़ा दुश्मन बन जाए? ...और पढ़ें

आपका खान-पान ही बन रहा है दिल का दुश्मन (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक बड़े शोध ने एक बेहद चौंकाने वाला सच उजागर किया है। साल 2023 में दुनिया भर में 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत केवल इसलिए हो गई क्योंकि उनका आहार सही नहीं था। ये सभी मौतें 'इस्केमिक हार्ट डिजीज' नामक एक गंभीर हृदय रोग के कारण हुई हैं।
क्या है यह खतरनाक बीमारी?
इस्केमिक हार्ट डिजीज दिल से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है। यह तब होती है जब दिल की धमनियों में 'प्लाक' जमा हो जाता है। प्लाक जमा होने से नसें सिकुड़ जाती हैं और हृदय तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह काफी कम हो जाता है। इसी रुकावट के कारण सीने में तेज दर्द उठता है और कई बार यह जानलेवा हार्ट अटैक का रूप ले लेता है।

(Image Source: Freepik)
किसने किया यह बड़ा खुलासा?
यह कोई मामूली दावा नहीं है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल और दक्षिण कोरिया की क्युंग ही यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी (2023)' के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया। 'नेचर मेडिसिन' जर्नल में प्रकाशित यह अध्ययन 204 देशों और क्षेत्रों में समय के साथ स्वास्थ्य को हुए नुकसान का एक बहुत बड़ा और व्यापक रिकॉर्ड है।
क्या होता है अवांछित या खराब आहार?
अध्ययन के अनुसार, 'अवांछित आहार' इन मौतों का सबसे प्रमुख कारण है। इसमें हमारे रोजमर्रा के खान-पान की कुछ बड़ी गलतियां शामिल हैं:
- खाने में साबुत अनाज की कमी
- भोजन में नट्स और सीड्स का कम इस्तेमाल
- ताजे फलों को डाइट में शामिल न करना
- खाने में सोडियम की मात्रा का बहुत ज्यादा होना
शोध के आंकड़े बताते हैं कि प्रति एक लाख की आबादी में सबसे ज्यादा मौतें मेवे व बीजों की कमी (9.87 मौतें), साबुत अनाज की कमी (9.22), फलों की कमी (7.25) और उच्च सोडियम (7.15) के कारण हुईं।
खबरें और भी
अमीर और गरीब देशों की अलग-अलग समस्या
इस अध्ययन में एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई है। जिन देशों का सामाजिक-जनसांख्यिकीय सूचकांक (SDI) कम या मध्यम है- यानी जो देश आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं हैं, वहां यह बीमारी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि लोगों को शरीर की रक्षा करने वाला पौष्टिक आहार पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। वहीं, उच्च सूचकांक वाले अमीर देशों में लोग 'प्रोसेस्ड मीट' और मीठे पेय पदार्थों का बहुत अधिक सेवन कर रहे हैं, जो उनके दिलों को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है।

(Image Source: Freepik)
क्या कहते हैं मौत के आंकड़े?
आंकड़ों पर नजर डालें तो 1990 की तुलना में 2023 में खराब आहार से होने वाली हृदय रोग की मौतों में 41.59 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है (कुल 40 लाख 6 हजार मौतें)। हालांकि, एक राहत की बात यह भी रही कि इसी दौरान आयु मानक मृत्यु दर में लगभग 44 प्रतिशत की कमी आई (यह प्रति एक लाख जनसंख्या में 80.62 से घटकर 45.22 पर पहुंच गई)। यह कमी मुख्य रूप से जनसंख्या वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधाओं में हुए सुधार को दर्शाती है।
उम्र के लिहाज से देखें तो, 45 वर्ष और उससे कम उम्र वालों की तुलना में 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में इस बीमारी से मृत्यु दर बहुत ज्यादा देखी गई।
किन क्षेत्रों में है सबसे ज्यादा खतरा?
शोधकर्ताओं ने पाया कि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में समय के साथ खराब आहार से होने वाले इस्केमिक हृदय रोग का बोझ कम हुआ है। लेकिन, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया, उप-सहारा अफ्रीका और ओशिनिया जैसे क्षेत्रों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
बता दें, विशेषज्ञों ने यह भी साफ किया है कि केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और एक निष्क्रिय जीवनशैली भी इस खतरनाक बीमारी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- देश में हर चार में एक मौत हार्ट अटैक से, युवाओं की तेजी से बढ़ रही संख्या
यह भी पढ़ें- टीनएजर्स में भी हो सकती हैं आर्टरीज ब्लॉक! जानें हार्ट अटैक के लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय