बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा? इसे महज 'उम्र का दौर' समझकर न करें अनदेखा, हो सकती है आंतों की बीमारी
बच्चों की गट हेल्थ सिर्फ खाना पचाने तक ही सीमित नहीं है। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि यह कैसे उनकी ओवरऑल ग्रोथ पर असर डालती है।

बच्चों के इन 'रेड फ्लैग्स' को न लें हल्के में, तुरंत लें एक्सपर्ट की सलाह (Image Source: AI-Generated)
HighLights
बच्चों की ग्रोथ के लिए गट हेल्थ महत्वपूर्ण है
लगातार पेट दर्द, दस्त, वजन न बढ़ना खतरे की घंटी
स्वस्थ आहार, पानी, व्यायाम से आंतों को रखें दुरुस्त
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम सोचते हैं कि हमारे पेट का काम सिर्फ खाना पचाना है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम के पीआईसीयू और पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. राजीव उत्तम के मुताबिक, बच्चों की ओवरऑल ग्रोथ और सेहत की नींव उनकी गट हेल्थ में ही छिपी होती है।
शरीर की बीमारियों से लड़ने वाली 70 फीसदी सफेद रक्त कोशिकाएं आंतों में ही पाई जाती हैं। इसके अलावा, गट शरीर में ग्रोथ हार्मोन बनाने और खाने से पोषण सोखने का भी अहम काम करता है। इसलिए, बच्चों के पेट की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
आइए एक्सपर्ट के नजरिए से समझते हैं कि किन लक्षणों को सामान्य मानना चाहिए और कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।

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आम दिक्कतें या खतरे की घंटी?
कभी-कभार गैस बनना या शौच के समय में थोड़ा बदलाव होना चिंता का विषय नहीं है। बच्चों में रात के वक्त या खाना खाने के बाद पेट दर्द की शिकायत भी काफी आम है।
लेकिन, अगर यह पेट दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, तो इसकी जांच होनी चाहिए। अगर बच्चे को कई दिनों तक लगातार दस्त हों और साथ में शरीर का पानी सूखने लगे या मल में खून और बलगम आए, तो डॉक्टर इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं। दस्त और कब्ज का बारी-बारी से होना भी आंतों की किसी अंदरूनी बीमारी का इशारा हो सकता है।
पेट का फूलना और गैस की समस्या
कुछ विशेष चीजें खाने के बाद पेट का हल्का भारी होना आम बात है, लेकिन अगर बच्चे का पेट हमेशा फूला हुआ लगे, उसे बहुत ज्यादा गैस बने या पेट में सूजन दिखाई दे, तो इसे हल्के में न लें। यह किसी खाने से एलर्जी, सीलिएक डिजीज या आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की कमी का संकेत हो सकता है।
वजन का न बढ़ना सिर्फ एक 'फेज' नहीं है
अक्सर माता-पिता यह सोचकर परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा खूब खाता है, लेकिन उसके शरीर को लगता नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की रुकी हुई शारीरिक ग्रोथ को कभी भी महज 'उम्र का एक दौर' मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बिना वजह वजन का कम होना या न बढ़ना इस बात का सुबूत है कि बच्चे का शरीर खाने से पोषण नहीं ले पा रहा है। इसके पीछे इन्फ्लेमेटरी बावल डिजीज, सीलिएक डिजीज या पैंक्रियाटिक डिसफंक्शन जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
बार-बार उल्टी आना और निगलने में दर्द
वायरल इन्फेक्शन होने पर बच्चों को उल्टी होना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी साफ वजह के बच्चे को बार-बार उल्टी आए, तो यह गैस्ट्रो-ओसोफेगल रिफ्लक्स या पेट की किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो बच्चा कुपोषण और डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है। खाना निगलने में परेशानी होना या कुछ चुनिंदा चीजें ही खाने की जिद करना भी इसी श्रेणी की परेशानियां हैं।
'रेड फ्लैग्स' जिन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
कुछ लक्षण बेहद गंभीर होते हैं, जिनके दिखने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए:
- मल का रंग काला आना या उसमें खून दिखना।
- तेज पेट दर्द के साथ तेज बुखार आना।
- लगातार अत्यधिक उल्टी होना।
- शरीर में पानी की कमी के साथ लगातार दस्त।
- अचानक से पेट में असहनीय और तेज दर्द उठना।
सही लाइफस्टाइल और खानपान
बच्चों की सेहतमंद आंतों के लिए सही डाइट बहुत जरूरी है। उनके खाने में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां और फाइबर शामिल करें, जिससे गट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा मिले।
बच्चों को भरपूर पानी पिलाएं, नियमित रूप से खेलकूद करवाएं और उनके खाने का एक तय समय बनाएं। उन्हें शुगरी ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड जंक फूड से दूर रखें। सबसे अहम बात, बिना डॉक्टर की पर्ची के बच्चों को एंटीबायोटिक दवाएं न दें, क्योंकि ये पेट के फायदेमंद बैक्टीरिया को नष्ट कर देती हैं।
कब लें एक्सपर्ट की सलाह?
पेट से जुड़ी हर परेशानी गंभीर नहीं होती और कई बार खुद ही ठीक हो जाती है, लेकिन अगर कोई समस्या दो हफ्ते से ज्यादा समय तक खिंच जाए, बार-बार लौट कर आए या बच्चे की ग्रोथ, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर डाले, तो बिना देरी किए किसी पीडियाट्रिशियन को दिखाएं।
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