चेहरे की रंगत क्यों पड़ने लगती है फीकी? सिर्फ खून की कमी नहीं, ये 6 कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
त्वचा का पीला पड़ना सिर्फ थकान या खून की कमी नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'पैलर' कहते हैं। ...और पढ़ें

खून की कमी या कुछ और... आखिर क्यों फीका पड़ने लगता है त्वचा का रंग? जानिए कब डॉक्टर से मिलना है जरूरी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम त्वचा के फीके या पीले पड़ने को महज थकान या साधारण कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन मैक्स अस्पताल के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की सीनियर डायरेक्टर डॉ. संगीता पाठक के मुताबिक, मेडिकल भाषा में इसे 'पैलर' कहा जाता है और यह खून से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का अलर्ट हो सकता है।
त्वचा में पीलापन मुख्य रूप से एनीमिया के कारण आता है। इस स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन या रेड ब्लड सेल्स की भारी कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन घटने से खून की लालिमा कम हो जाती है, जिससे हमारी त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन का रंग उड़ने लगता है। आइए जानते हैं कि वे कौन-सी स्थितियां हैं, जो इस पीलेपन का कारण बन सकती हैं।
एनीमिया के अलग-अलग रूप
त्वचा के फीकेपन का सबसे बड़ा कारण एनीमिया ही है। इसके कई प्रकार हो सकते हैं:
- आयरन की कमी: यह सबसे आम समस्या है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए पर्याप्त आयरन नहीं बचता, तो यह स्थिति पैदा होती है।
- विटामिन की कमी: लाल रक्त कोशिकाओं के सही विकास के लिए फोलेट और विटामिन B12 आवश्यक हैं। इनकी कमी सीधे तौर पर त्वचा के रंग को प्रभावित करती है।
- अप्लास्टिक एनीमिया: इस दुर्लभ बीमारी में हमारा बोन मैरो नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करना लगभग बंद कर देता है।
- हेमोलिटिक एनीमिया: यह एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर के अंदर पुरानी लाल रक्त कोशिकाएं इतनी तेजी से नष्ट होती हैं कि शरीर उतनी तेजी से नई कोशिकाएं नहीं बना पाता।
- थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया: ये माता-पिता से मिलने वाली आनुवंशिक बीमारियां हैं, जो हीमोग्लोबिन के बनने की प्रक्रिया और उसकी बनावट को बिगाड़ देती हैं।
त्वचा का पीलापन हो सकता है ब्लड कैंसर की चेतावनी
कुछ मामलों में, त्वचा का पीलापन खून के कैंसर या अन्य जटिल समस्याओं की ओर भी इशारा करता है:
- ल्यूकेमिया: इस बीमारी में बोन मैरो के भीतर खराब सफेद रक्त कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं का बनना रुक जाता है।
- पैनसाइटोपेनिया: इस गंभीर स्थिति में शरीर के अंदर लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स- तीनों की संख्या एक साथ काफी नीचे गिर जाती है।
खून का बहाव रुकने से लेकर अल्सर तक
कई बार शरीर में खून का बहाव रुकने या अचानक खून बह जाने से भी त्वचा पीली पड़ जाती है:
खबरें और भी
- अचानक खून बहना: किसी बड़ी चोट, सर्जरी, पेट के अल्सर या मासिक धर्म में अत्यधिक खून बहने से शरीर में खून का स्तर अचानक गिर जाता है।
- धमनी में रुकावट: अगर किसी नस में खून का थक्का जम जाए, तो वहां ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो जाता है। इससे शरीर का वह खास हिस्सा या अंग अचानक पीला नजर आने लगता है।
- मेडिकल शॉक: जब ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर जाता है, तो शरीर खून को त्वचा की बजाय सीधे महत्वपूर्ण अंगों तक पहुंचाने लगता है, जिससे व्यक्ति एकदम पीला पड़ जाता है।
डॉक्टर कैसे करते हैं पीलेपन की पहचान?
लंबे समय तक रहने वाले पीलेपन को पहचानने के लिए डॉक्टर केवल चेहरे या बाहरी त्वचा को नहीं देखते। वे आंखों की निचली पलकों के अंदर, हथेलियों की रेखाओं या मसूड़ों की जांच करते हैं। खासकर सांवले या गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में बाहरी त्वचा से पीलापन पकड़ना मुश्किल होता है, इसलिए यह तरीका उनके लिए बहुत प्रभावी साबित होता है।
अगर आप एक रेगुलर ब्लड डोनर हैं, तो आपको इस पीलेपन से घबराने की जरूरत नहीं है। ब्लड डोनेशन के बाद आपके शरीर में तरल पदार्थ, आयरन और लाल रक्त कोशिकाओं के कम होने और फिर से बनने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।