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    जन्म के समय कम वजन से जवानी में बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा, 8 लाख लोगों पर हुई रिसर्च में खुलासा

    Updated: Mon, 15 Jun 2026 08:28 AM (GMT+05:30)

    एक नए अध्ययन में सामने आया है कि जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों को युवावस्था में स्ट्रोक का खतरा काफी अधिक होता है। ...और पढ़ें

    क्या जन्म का वजन तय करता है जवानी की सेहत? (Image Source: Magnific)

    क्या जन्म का वजन तय करता है जवानी की सेहत? (Image Source: Magnific) 

    HighLights

    1. जन्म के समय कम वजन से युवावस्था में स्ट्रोक का खतरा बढ़ा

    2. तुर्किए में हुए 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में पेश किए नतीजे

    3. जोखिम बीएमआई या गर्भावस्था की अवधि पर निर्भर नहीं करता

    एएनआई, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि हमारे बचपन और जन्म के समय की स्थितियां हमारी जवानी की सेहत तय कर सकती हैं? जी हां, हाल ही में एक अध्ययन में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है।

    इस रिसर्च के मुताबिक, अगर जन्म के समय किसी बच्चे का वजन औसत से कम होता है, तो युवावस्था में उसे स्ट्रोक का खतरा काफी ज्यादा होता है। आइए आपको आसान शब्दों में बताते हैं कि इस अहम रिसर्च में और क्या-क्या खुलासे हुए हैं।

    stroke risk

    (Image Source: Magnific) 

    तुर्किए में पेश किए गए अध्ययन के नतीजे

    हाल ही में तुर्किए में 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' का आयोजन किया गया था। यहीं पर विशेषज्ञों ने इस महत्वपूर्ण रिसर्च के नतीजे दुनिया के सामने रखे। इस दौरान इस बात पर खास जोर दिया गया कि एक वयस्क इंसान के दिल और उसकी रक्त वाहिकाओं की सेहत पर बचपन से जुड़े कारकों का कितना गहरा असर पड़ता है।

    8 लाख लोगों के डेटा पर हुई रिसर्च

    यह कोई छोटी स्टडी नहीं थी। गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी की डॉ. लीना लिलजा और डॉ. मारिया बाइग्डेल के साथ अन्य शोधकर्ताओं की टीम ने 1973 से लेकर 1982 के बीच पैदा हुए करीब 8,00,000 पुरुषों और महिलाओं के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया। इस रिसर्च में 31 दिसंबर 2022 तक सामने आए स्ट्रोक के मामलों को ट्रैक किया गया।

    सामने आए डराने वाले आंकड़े

    डेटा खंगालने पर शोधकर्ताओं को इस दौरान पहली बार स्ट्रोक का शिकार हुए लोगों के कुल 2,252 मामले मिले। इन मामलों को दो हिस्सों में देखा गया:

    • 1,624 मामले इस्केमिक स्ट्रोक के थे।
    • 588 मामले इंट्रासेरेब्रल हैमरेज के पाए गए।

    पुरुषों और महिलाओं पर क्या दिखा असर?

    स्टडी के आंकड़े साफ बताते हैं कि जिन लोगों का जन्म के समय वजन औसत से कम था, उनमें कुल मिलाकर स्ट्रोक का खतरा 21 प्रतिशत अधिक पाया गया। यह खतरा इस्केमिक और हैमरेजिक, दोनों ही तरह के स्ट्रोक के लिए एक समान रूप से बढ़ा हुआ था।

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    अगर इसे महिलाओं और पुरुषों के आधार पर देखें तो:

    • जन्म के समय कम वजन वाली महिलाओं में स्ट्रोक का यह जोखिम 18 प्रतिशत अधिक था।
    • वहीं, कम वजन के साथ पैदा हुए पुरुषों में यह खतरा 23 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ देखा गया।

    बीएमआई और गर्भावस्था की अवधि का असर नहीं

    इस रिसर्च की एक सबसे खास और अहम बात यह सामने आई कि स्ट्रोक का यह खतरा 'बॉडी मास इंडेक्स' या जन्म के समय की 'जेस्टेशनल एज' पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता। इसका सीधा मतलब यह है कि व्यक्ति का बीएमआई चाहे जो भी हो, या वह गर्भावस्था के कितने भी समय बाद पैदा हुआ हो, कम वजन के साथ जन्म लेना अपने आप में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है।

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