सिगरेट नहीं पीते फिर भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर! डॉक्टर से समझें कैसे हमारी आदतें बढ़ाती हैं इसका जोखिम
सिगरेट पीने जैसी गलत आदतें नहीं भी हों तो भी फेफड़ों को बड़ा खतरा है, खासकर उन लोगों के लिए यह खतरे की घंटी है जो शहरों में रहते हैं। ...और पढ़ें

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी से अगर यह सवाल किया जाए कि फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है तो उनका जवाब हमेशा धूम्रपान होगा। लोगों के मन में इसे लेकर जो धारणा बन गई है, वही फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी उतना ही बढ़ा रही है क्योंकि सभी को लगता है कि जो स्मोकिंग करता है उसे ही यह जानलेवा बीमारी हो सकती है।
मेरी खुद की प्रैक्टिस में मैंने बहुत से ऐसे मामले देखें हैं जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ भी नहीं लगाया, इसके बावजूद उन्हें फेफड़ों का कैंसर हो गया। इस बात को गंभीरता से लेते हुए अब समय है कि फेफड़ों के कैंसर को धूम्रपान करने वालों की बीमारी न माना जाए। साथ ही, इस बात पर गौर किया जाए कि आखिर शहरी जीवन से जुड़ी वो कौन सी आदतें हैं जो फेफड़ों को इतना नुकसान पहुंचा देती हैं कि यह कैंसर जैसा जानलेवा रूप ले लेता है।
फेफड़ों के कैंसर की वजहें
इन वजहों में सबसे ऊपर वायु प्रदूषण है। सालों तक सूक्ष्म प्रदूषित कणों (PM), वाहनों के धुएं, इंडस्ट्री से होने वाले उत्सर्जन और निर्माण कार्यों से होने वाली धूल-मिट्टी के बीच रहना फेफड़ों को कमजोर कर देता है। अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हैं तो यह सभी चीजें स्मोकिंग के ही बराबर हैं।
वहीं, दूसरी हमारे घर का वातावरण भी फेफड़ों के लिए नुकसानदायक है, इनमें सेकंड हैंड स्मोक, बायोमास कुकिंग फ्यूल, किचन का खराब वेंटिलेशन और केमिकल से संपर्क में आना जैसी बातें शामिल हैं। इसके अलावा, व्यावसायिक जोखिम जैसे एस्बेस्टस, सिलिका धूल, डीजल से निकलने वाला धुआं भी फेफड़ों को बेहद संवेदनशील बना देते हैं। वहीं, फैमिली हिस्ट्री, पहले टीबी होना, फेफड़ों में घाव और ढलती उम्र भी इनकी मुख्य वजहों में शामिल है।
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लक्षण दिखते हैं बहुत कम
एक चीज जो मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है, वो यह कि फेफड़ों के कैंसर के लक्षण बहुत कम ही दिखाई देते हैं, लेकिन जब दिखते हैं तो बीमारी शरीर में फैल चुकी होती है। हफ्तों तक खांसी न जाना, खांसी के समय खून आना, अचानक से वजन कम होना, सीने में दर्द और बार-बार होने वाला इन्फेक्शन और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण संकेत हैं जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। ज्यादातर मामलों में मरीज मेरे पास तब आता है जब कैंसर बन चुका होता है।
फेफड़ों के कैंसर का इलाज
हमने यह तो जान लिया कि फेफड़ों का कैंसर होने की वजह और उसके लक्षण क्या हैं, पर ऐसा नहीं है कि इनके इलाज में आशा छोड़ देनी चाहिए। मिनीमली इनवेसिव सर्जरी, कैंसर की पहचान करने के बेहतर टूल्स, दवाएं, और इम्यूनोथेरेपी के जरिए इसकी रोकथाम की जा सकती है। जिन लोगों को ज्यादा खतरा है, खासकर धूम्रपान करने वाले लोग हर साल लो डोज सिटी स्कैन करवाकर इसके जोखिम से बच सकते हैं। ऐसा करने से बीमारी का इलाज ठीक समय पर किया जा सकता है। इस वर्ल्ड लंग कैंसर डे पर मेरा संदेश एकदम साफ है कि लक्षणों को गंभीरता से लें, प्रदूषण के सीधे संपर्क में आने से बचें और रूटीन चेकअप कराते रहें।
(डॉ. कामरान अली, साकेत के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में थोरासिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर हैं।)