क्या लक्षण दिखने से दशकों पहले ही चल सकेगा अल्जाइमर का पता? नई रिसर्च में बड़ा खुलासा
मशहूर पत्रिका 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, अल्जाइमर रोग का पता लक्षणों से दशकों पहले एक साधारण खून की जांच से लगाया जा सकता है। ...और पढ़ें

भूलने की बीमारी का अब दशकों पहले चलेगा पता! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आप सोच सकते हैं कि अल्जाइमर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का पता उसके लक्षण दिखने से दशकों पहले ही लगाया जा सकता है?
जी हां, मशहूर मेडिकल पत्रिका 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने यह चौंकाने वाला और राहत भरा खुलासा किया है। शोध के मुताबिक, अब केवल एक खून की जांच से इस बीमारी के छिपे हुए संकेतों को समय रहते पहचाना जा सकेगा।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नई रिसर्च क्या कहती है और यह बीमारी कैसे हमारे दिमाग पर असर डालती है।

(Image Source: AI-Generated)
क्या कहता है यह नया शोध?
यह महत्वपूर्ण रिसर्च अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि खून में मौजूद 'एमिलायड-बीटा' और 'टाऊ' नाम के प्रोटीनों के स्तर को ट्रैक करना, अल्जाइमर रोग को पकड़ने का एक बेहद कारगर तरीका बन गया है।
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 1,350 अमेरिकी वयस्कों के खून के नमूनों की जांच की। इन सभी लोगों की औसत उम्र 61 साल थी और इनमें से किसी को भी डिमेंशिया नहीं था।
ब्लड टेस्ट में क्या सामने आया?
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इन लोगों के खून में 'A42', 'A40' और 'p-tau217' जैसे खास बायोमार्कर का लेवल मापा। नतीजे काफी हैरान करने वाले थे:
- जांच में शामिल 1,350 लोगों में से 6 प्रतिशत (कुल 86 लोगों) में अल्जाइमर से जुड़े एमिलायड और टाऊ प्रोटीन का स्तर हाई कट-ऑफ लेवल पर मिला।
- स्टडी में यह साफ हुआ कि अगर मिड-लाइफ में दिमाग के अंदर टाऊ प्रोटीन जैसे बायोमार्कर का लेवल ज्यादा होता है, तो यह सीधे तौर पर इंसान की बौद्धिक क्षमता में तेजी से आ रही गिरावट का संकेत है।
इसका सबसे ज्यादा असर दिमाग की 'प्रोसेसिंग स्पीड' और 'एग्जीक्यूटिव फंक्शन' पर पड़ता है।
कैसे शुरू होता है अल्जाइमर और क्यों खतरनाक हैं ये प्रोटीन?
अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति है। यह एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे हमारी याददाश्त और सोचने-समझने की पूरी प्रक्रिया को खोखला कर देती है। एक समय के बाद मरीज के लिए रोजमर्रा के सामान्य काम करना भी नामुमकिन हो जाता है।
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प्रोटीन कैसे बनते हैं दुश्मन?
हमारे मस्तिष्क के सही ढंग से काम करने के लिए एमिलायड और टाऊ प्रोटीन बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब मस्तिष्क में 'एमिलायड-बीटा (A) प्रोटीन' के प्लाक और 'फास्फोराइलेटेड टाऊ प्रोटीन' के उलझे हुए गुच्छे जमा होने लगते हैं।
जब ये प्रोटीन दिमाग में एक जगह इकट्ठा होने लगते हैं, तो ये हमारे दिमाग के लिए जहरीले साबित होते हैं। इसी जहर के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं, जिससे अल्जाइमर नाम की इस गंभीर बीमारी का जन्म होता है।
कुल मिलाकर, इस नई रिसर्च ने चिकित्सा जगत में एक नई उम्मीद जगाई है कि भविष्य में सिर्फ एक ब्लड टेस्ट से अल्जाइमर के खतरे को समय रहते भांपा जा सकेगा और इसके गंभीर नुकसान से बचा जा सकेगा।
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