उम्र तो सिर्फ एक नंबर है! क्या आप जानते हैं अंदर से कितने 'बूढ़े' हो चुके हैं आपके शरीर के अंग?
विज्ञानियों ने रक्त आधारित एक जैविक 'उम्र संकेतक' विकसित किया है, जो बताता है कि शरीर के अंग अंदर से कितने बूढ़े हैं। ...और पढ़ें

कितने बूढ़े हो चुके हैं शरीर के अंग, बताएगा संकेतक (Image Source: AI-Generated)
HighLights
रक्त आधारित जैविक उम्र संकेतक विकसित
अंगों की आंतरिक उम्र और रोग जोखिम बताए
मस्तिष्क की जैविक उम्र लंबी उम्र का गेटकीपर
प्रेट्र , नई दिल्ली। विज्ञानियों ने रक्त आधारित प्रोटीन और कोशिकाओं का विश्लेषण करके एक क्रांतिकारी जैविक 'उम्र संकेतक' विकसित किया है। यह जांच जन्म की तारीख के बजाय यह बताती है कि शरीर के प्रमुख अंग और कोशिकाएं अंदर से कितने बूढ़े हो चुके हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 10 वर्षों बाद उस अंग से संबंधित किसी बीमारी का जोखिम कितना है।
किसी व्यक्ति की जैविक उम्र यह मापती है कि शरीर कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है। इसकी तुलना कालक्रमिक उम्र से की जाती है। हालांकि, शरीर के अंदर के अंग सभी अलग-अलग गति से वृद्ध हो रहे हैं। शोधकर्ताओं में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के विज्ञानी भी शामिल है। इसमें 11 अलग-अलग अंग प्रणालियों का अध्ययन किया।
मस्तिष्क की जैविक उम्र का आकलन
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय स्कूल आफ मेडिसिन में न्यूरोलाजी के प्रोफेसर टोनी वायस कोरे ने कहा कि हमने अंगों की उम्र का एक रक्त आधारित संकेतक विकसित किया है। इस संकेतक के माध्यम से हम एक अंग की उम्र का आकलन कर सकते हैं। जर्नल नेचर मेडिसिन में निष्कर्ष प्रकाशित किया गया। इससे पता चला कि मस्तिष्क की जैविक उम्र यह निर्धारित करने में 'विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि एक व्यक्ति कितनी देर तक जीवित रह सकता है। 40 से 70 वर्ष के बीच लोगों के बीच लगभग 45,000 लोगों को यूके बायोबैंक से रैंडम रूप से चुना गया व स्वास्थ्य स्थिति में बदलावों के लिए 17 वर्षों तक निगरानी की गई।
रक्त में प्रोटीन की मात्रा की गणना
एक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध प्रयोगशाला तकनीक का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने प्रत्येक प्रतिभागी के रक्त में लगभग 3,000 प्रोटीन की मात्रा की गणना की । लगभग 15 प्रतिशत प्रोटीन को एकल अंग उत्पत्ति से जोड़ा जा सकता था और कई अन्य को कई अंगों के उत्पादन से । इसके लिए एक एल्गोरिदम विकसित किया गया, जिसने यह पता लगाया कि प्रत्येक अंग के लिए मूल्यांकन की गई समग्र प्रोटीन 'हस्ताक्षर' उस उम्र के लोगों के लिए औसत से कितना भिन्न था। इस प्रकार प्रत्येक प्रतिभागी के लिए मूल्यांकन किए गए 11 अलग-अलग अंगों या अंग प्रणालियों को "प्लाज्मा प्रोटिओमिक्स" जो रक्त प्लाज्मा में प्रवाहित प्रोटीनों का बड़े पैमाने पर विश्लेषण है का उपयोग करके जैविक उम्र सौंपी गई।
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प्रतिभागियों में से एक तिहाई को कम से कम एक अंग मिला जो या तो "अत्यधिक वृद्ध" या "अत्यधिक युवा" था, जबकि एक चौथाई में कई "अत्यधिक वृद्ध" या "अत्यधिक युवा" अंग थे। दिमाग के मामले में 'बहुत ज्यादा उम्र वाले' का मतलब था अध्ययन में शामिल लोगों के उन 6-7% दिमागों में से होना, जिनके प्रोटीन सिग्नेचर जैविक उम्र वितरण के एक सिरे पर थे और 'बहुत युवा' दिमाग वे थे जो दूसरे सिरे पर मौजूद 6-7% में आते थे। अत्यधिक वृद्ध मस्तिष्क और अल्जाइमर रोग विकसित करने के बीच का शक्तिशाली संबंध पाया गया, यह सामान्य रूप से वृद्ध मस्तिष्क वाले की तुलना में 3.1 गुना अधिक था।
दिमाग के युवा होने पर जिंदा रह सकते हैं ज्यादा समय तक
शोधकर्ताओं ने पाया कि हालांकि, अत्यधिक युवा मस्तिष्क अल्जाइमर के खिलाफ विशेष रूप से सुरक्षात्मक था। वायस-कोरे ने कहा कि दिमाग लंबी उम्र का गेटकीपर है। अगर दिमाग बूढ़ा है, तो आपके मरने की संभावना ज्यादा है। अगर आपका दिमाग युवा है, तो आप ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे। मौत के जोखिम का सबसे अच्छा अकेला संकेतक 'दिमाग की उम्र थी। ज्यादा उम्र वाले दिमाग वाले लोगों में लगभग 15 साल की अवधि में मौत का जोखिम 182 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि बहुत युवा दिमाग वाले लोगों में इसी अवधि में मौत का कुल जोखिम 40 प्रतिशत कम हो गया।