क्या आपका बच्चा भी बिना मोबाइल नहीं खाता खाना? रिसर्च में दावा, इस आदत से रुक जाएगी उनकी ग्रोथ
अगर बच्चा ज्यादा रो रहा है या वह खाना नहीं खा रहा है तो उनको बहलाने के लिए मोबाइल एक माध्यम है। ...और पढ़ें

डेढ़ साल के बच्चों का बढ़त स्क्रीन टाइम एक खतरा (Image Source: Freepik)
HighLights
स्मार्टफोन का ज्यादा उपयोग बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर
18 महीने के 68% बच्चे स्क्रीन के संपर्क में आ चुके हैं
कम स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में बेहतर समस्या-समाधान कौशल
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल पेरेंट्स के बीच यह आम हो गया है, अगर बच्चा ज्यादा रो रहा है या वह खाना नहीं खा रहा है तो उनको बहलाने के लिए मोबाइल एक माध्यम है। पर क्या हो अगर यह माध्यम बच्चों की सेहत के लिए एक खतरा बन जाए? हाल ही की एक रिसर्च में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके मुताबिक स्मार्टफोन और डिजिटल टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है।
पीजीआई चंडीगढ़ की पीडियाट्रिक्स और सोशल पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट की प्रोफेसर भवनीत भारती और उनकी टीम की नई रिसर्च के मुताबिक, 18 महीने की उम्र के करीब 68% बच्च स्क्रीन के संपर्क में आ चुके हैं। इसका सीधा सा मतलब यह है कि 1.5 साल का बच्चा भी फोन का इस्तेमाल करता है।
18 से 24 महीने के बच्चों पर की गई स्टडी
इंडिया पीडियाट्रिक्स में पब्लिश हुई इस स्टडी में 18 से 24 महीने के बच्चों को शामिल किया गया। जिसके बाद रिसर्च में यह बात निकलकर सामने आई कि ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों में सीखने और दूसरों से बातचीत करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, यह रिसर्च दावा करती है कि बच्चों के खाना खाते समय मोबाइल देखने की बुरी आदत उनकी बोलने यानी भाषा पर और ध्यान देने की क्षमता को बिगाड़ रही है।
33% बच्चे रोजाना एक घंटे से ज्याद इस्तेमाल करते हैं फोन
स्टडी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 33% बच्चे रोजाना एक घंटे से ज्यादा फोन के सामने बिता रहे हैं। इसी का नतीजा है कि बच्चों की फिजिकल फिटनेस खराब हो रही है। अब क्योंकि वो फोन का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं तो उनमें खेलने-कूदने की आदत कम देखी गई।
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कम स्क्रीन टाइम वाले बच्चे ज्यादा स्किलफुल
रिसर्च में यह भी पाया गया कि इस उम्र के जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम कम था, उनमें प्रॉब्लम सॉलविंग स्किल ज्यादा अच्छी थी। इस तरह स्टडी दावा करती है कि स्क्रीन टाइम ही छोटे बच्चों की पर्सनल और सोशल ग्रोथ में एक बड़ी बाधा बन रहा है।
क्या है स्क्रीन टाइम कम करने का समाधान?
डॉ. भवनीत भारती की माने तो लगातार स्क्रीन देखने के बजाय अगर अपने आसपास के लोगों, पेरेंट्स और अपनी उम्र के लोगों के साथ सीधे बातचीत करेंगे तो ज्यादा सीख पाएंगे। छोटे बच्चों को स्क्रीन की नहीं बल्कि अपनों के साथ और खिलौनों की जरूरत है ताकि मानसिक विकास हो सके और वो फिजिकली एक्टिव रह सकें।