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हार्ट अटैक के बाद अब उम्र भर 'बीटा-ब्लॉकर्स' की जरूरत नहीं, नई रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Published: Fri, 10 Apr 2026 08:36 AM (IST)

अगर ऐसा माना जाता है कि हार्ट अटैक आने के बाद मरीजों को जिंदगी भर दवाइयों के सहारे रहना पड़ता ...और पढ़ें

हार्ट अटैक के मरीजों को जीवन भर बीटा-ब्लाकर्स लेने की जरूरत नहीं (Image Source: AI-Generated)

हार्ट अटैक के मरीजों को जीवन भर बीटा-ब्लाकर्स लेने की जरूरत नहीं (Image Source: AI-Generated)

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रॉयटर, नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया में हुए एक क्लीनिकल ट्रायल में यह बात सामने आई है कि जो मरीज हार्ट अटैक से उबर चुके हैं और जिनकी स्थिति स्थिर व कम जोखिम वाली है, उन्हें अब जीवन भर 'बीटा-ब्लॉकर्स' दवाएं लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीज एक वर्ष के बाद इन दवाओं का सेवन बंद कर सकते हैं।

कैसे हुआ यह अध्ययन?

न्यू ऑरलियंस में 'अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' के विज्ञानियों की बैठक में इस अहम रिसर्च के नतीजे पेश किए गए। इसके अलावा, इस अध्ययन को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में भी प्रकाशित किया गया है।

शोधकर्ताओं ने इस ट्रायल में कुल 2,540 ऐसे मरीजों को शामिल किया, जो पहले हार्ट अटैक का शिकार हो चुके थे और जिन्हें इलाज के तौर पर मेटोप्रोलोल और एटेनोलोल जैसी बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं दी जा रही थीं।

Post Heart Attack Care

(Image Source: Freepik)

रिसर्च के चौंकाने वाले आंकड़े

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों ने 12 महीने के बाद बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं लेना बंद कर दिया, उनकी स्थिति बिल्कुल उन मरीजों के समान ही थी जिन्होंने इन दवाओं का सेवन आगे भी जारी रखा था। औसतन 3.5 वर्षों तक इन मरीजों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई।

नतीजों में देखा गया कि दवा बंद करने वाले केवल 7.2 प्रतिशत मरीजों में दिल से जुड़ी गंभीर या प्रतिकूल घटनाएं (जैसे मृत्यु, दोबारा हार्ट अटैक या हार्ट फेल होने पर अस्पताल में भर्ती होना) घटीं। वहीं, इसके विपरीत, दवा जारी रखने वाले 9 प्रतिशत मरीजों को ऐसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।

क्या करती हैं बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं?

बीटा-ब्लॉकर्स मुख्य रूप से वे दवाएं हैं जो मरीज के हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को कम करने का काम करती हैं। हार्ट अटैक के बाद दिल को सुरक्षित रखने और भविष्य में होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए, लंबे समय से इन दवाओं को उपचार का सबसे प्रमुख आधार माना जाता रहा है।

इस नई रिसर्च ने स्पष्ट कर दिया है कि कम जोखिम वाले मरीजों को इन दवाओं पर जीवन भर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, जो कि हार्ट अटैक से उबर रहे लोगों के लिए बेहद सुकून भरी बात है।

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