वजन घटाने वाली Keto Diet दे सकती है फैटी लिवर की बीमारी, नई स्टडी में खुलासा
एक नई स्टडी के अनुसार, कीटो डाइट वजन घटाने में प्रभावी हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक इसका पालन करने से फैटी लिवर और ब्लड शुगर की समस्याएं बढ़ सकती हैं ...और पढ़ें

कीटो डाइट से लिवर को पहुंच सकता है नुकसान (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल वजन घटाने के लिए कीटो डाइट का क्रेज पूरी दुनिया में बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यह डाइट कम समय में वजन कम करने और मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए जानी जाती है, लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा हेल्थ के वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक नई स्टडी ने इस डाइट को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है।
इस नई रिसर्च के अनुसार, भले ही कीटो डाइट वजन बढ़ने से रोकती है, लेकिन लंबे समय तक इसका पालन करने से फैटी लिवर (Fatty Liver Disease) और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

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चूहों पर हुई 9 महीने की लंबी रिसर्च
वैज्ञानिकों ने यह समझने के लिए कि कीटो डाइट का शरीर पर लंबे समय में क्या असर होता है, चूहों पर एक प्रयोग किया। उन्होंने चूहों को 9 महीने तक चार अलग-अलग तरह की डाइट दी:
- स्टैंडर्ड कीटो डाइट
- सामान्य 'वेस्टर्न' हाई-फैट डाइट
- लो-फैट और हाई-कार्बोहाइड्रेट डाइट
- लो-फैट और संतुलित प्रोटीन वाली डाइट
चौंकाने वाले रहे नतीजे
जिन चूहों को कीटो डाइट दी गई, उनका वजन तो नहीं बढ़ा (जो कि अच्छी बात थी), लेकिन उनके लिवर में भारी मात्रा में फैट जमा हो गया। इसे मेडिकल भाषा में 'हिपेटिक स्टीटोसिस' या फैटी लिवर की बीमारी कहा जाता है। यह लिवर की पुरानी बीमारियों की शुरुआती स्टेज मानी जाती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि मादा चूहों की तुलना में नर चूहों के लिवर पर इसका ज्यादा बुरा असर पड़ा।
लिवर में क्यों जमा हो जाता है फैट?
इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता, अमैंडीन चैक्स ने इसके पीछे का कारण बहुत सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि जब आप हाई फैट वाली डाइट लेते हैं, तो वह फैट शरीर में कहीं न कहीं तो जाएगा ही। अक्सर यह फैट आपके खून में और आखिरकार आपके लिवर में जाकर जमा होने लगता है, जिससे लिवर को नुकसान पहुंचता है।
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ब्लड शुगर पर भी पड़ता है बुरा असर
सिर्फ लिवर ही नहीं, कीटो डाइट का असर शरीर के शुगर लेवल को कंट्रोल करने की क्षमता पर भी देखा गया:
- शुरुआत में: चूहों में फास्टिंग ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर कम रहा।
- बाद में: जब इन चूहों को दोबारा कार्बोहाइड्रेट दिया गया, तो उनका ब्लड शुगर लेवल अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया और नीचे नहीं आया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय तक हाई-फैट डाइट लेने से पैंक्रियाज की 'बीटा कोशिकाओं' पर दबाव पड़ता है। ये कोशिकाएं ही इंसुलिन बनाती हैं। ज्यादा फैट के कारण ये कोशिकाएं ठीक से काम नहीं कर पातीं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जब चूहों को कीटो डाइट से हटाया गया, तो उनकी यह समस्या कुछ हद तक ठीक होने लगी।

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कीटो डाइट पर हैं, तो क्या करें?
यह स्टडी साफ करती है कि सिर्फ दुबला होना ही अच्छी सेहत का सबूत नहीं है। अगर आप कीटो डाइट अपनाने की सोच रहे हैं या पहले से कर रहे हैं, तो विशेषज्ञों की इन सलाहों पर जरूर ध्यान दें:
- डॉक्टर से सलाह लें: किसी भी डाइट को लंबे समय तक फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर से बात जरूर करें।
- जांच करवाते रहें: अपने लिवर फंक्शन और शुगर लेवल की नियमित जांच करवाएं।
- संतुलन है जरूरी: बहुत ज्यादा सैचुरेटेड फैट वाली डाइट से बचें। यह देखें कि क्या कोई संतुलित डाइट आपके लिए ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ हो सकती है।
चूहों पर हुई यह स्टडी बताती है कि कीटो डाइट वजन तो कंट्रोल कर सकती है, लेकिन लंबे समय में यह लिवर में सूजन और शुगर की बीमारी का कारण बन सकती है। इसलिए, जब तक इंसानों पर और ज्यादा रिसर्च सामने नहीं आ जाती, तब तक इस डाइट को सावधानी और मेडिकल देखरेख में ही अपनाना समझदारी होगी।