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"अरे ये तो नॉर्मल गैस है..." रोज चूर्ण खाकर कैंसर के लक्षण तो नहीं दबा रहे आप? ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई

Published: Thu, 24 Sep 2026 05:48 PM (IST)

कैंसर के शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।

शरीर में दिखने वाले इन बदलावों को न करें इग्नोर (Image Source: AI-Generated)

शरीर में दिखने वाले इन बदलावों को न करें इग्नोर (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर बैठ जाना लाजमी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें और शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव असल में किसी बड़ी बीमारी की घंटी हो सकते हैं?

मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (पटपड़गंज) की मेडिकल ऑन्कोलॉजी की चेयरमैन, डॉ. मीनू वालिया ने कैंसर से जुड़े कुछ ऐसे ही अहम सवालों के जवाब दिए हैं, जो हर व्यक्ति के लिए जानना बेहद जरूरी है। आइए समझते हैं कि किन लक्षणों को हमें 'नॉर्मल' मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और अपने लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए।

Delhi pollution

(Image Source: AI-Generated) 

सवाल 1: आने वाले दिनों में हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर देखने को मिलेगा। आजकल जो लोग सिगरेट बिल्कुल नहीं पीते, क्या उनमें भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है? एक आम इंसान 'नॉर्मल खांसी' और 'कैंसर वाली खांसी' के बीच का फर्क कैसे पहचाने?

जवाब: फेफड़ों का कैंसर सिर्फ स्मोकर्स की ही बीमारी नहीं है। आजकल हम ऐसे मरीज भी देख रहे हैं, जिन्होंने शायद कभी स्मोकिंग नहीं की। लंग कैंसर के और भी बहुत सारे कारण होते हैं, जैसे प्रदूषण और सेकंड-हैंड स्मोकिंग। जहां तक खांसी की बात है, हर खांसी कैंसर नहीं होती। लेकिन अगर आपकी खांसी 3-4 हफ्ते से ज्यादा परसिस्ट कर रही है, बार-बार हो रही है और खांसी के साथ खून आ रहा है, आवाज बदल रही है या आपका वजन कम होता जा रहा है, तो इसे नॉर्मल खांसी न मानें और इसे इग्नोर न करें।

सवाल 2: महिलाओं को लगता है कि ब्रेस्ट में 'गांठ' होना ही कैंसर है। गांठ के अलावा ब्रेस्ट या शरीर में ऐसे कौन से साइलेंट बदलाव होते हैं, जिन्हें महिलाएं अक्सर इग्नोर कर देती हैं और बाद में वो बड़ी बीमारी बन जाते हैं?

जवाब: गांठ कैंसर का सबसे कॉमन वॉर्निंग साइन है, लेकिन सिर्फ गांठ का होना ही कैंसर का संकेत नहीं है। ब्रेस्ट कैंसर और भी बहुत तरह से प्रस्तुत होता है, जैसे ब्रेस्ट की शेप या साइज में चेंज होना, एक तरफ के निप्पल का अंदर चले जाना या निप्पल में बदलाव होना, निप्पल से डिस्चार्ज या खून आना, या स्किन में बदलाव होना। स्किन में छोटे-छोटे स्पॉट्स होना, जिससे वह संतरे के छिलके जैसी दिखने लगे, ये भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं।

ये सारी चीजें महत्वपूर्ण हैं और ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकती हैं। ज्यादातर ब्रेस्ट कैंसर में पहला साइन और सिम्पटम गांठ होता है, लेकिन गांठ के अलावा भी ब्रेस्ट में कई बदलाव होते हैं, जो कैंसर का संकेत हो सकते हैं।

सवाल 3: भारतीय घरों में पेट में गैस या जलन होने पर तुरंत कोई चूर्ण, इनो या एंटासिड खा लिया जाता है। क्या गैस-एसिडिटी को दबाने की यह रोज की आदत पेट या आंत के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को छिपा देती है? हमें किस पॉइंट पर अलर्ट हो जाना चाहिए?

जवाब: कभी-कभार गैस या एसिडिटी होना आम बात है, लेकिन समस्या यह है कि ज्यादातर लोग इसे इग्नोर करते हैं और हर रोज चूर्ण, इनो या एंटासिड लेते रहते हैं। ये दवाएं कैंसर नहीं बनातीं, लेकिन अगर आपके ये सिम्पटम्स परसिस्ट कर रहे हैं, तो ये बहुत सारे कैंसर्स के अर्ली साइन और सिम्पटम्स हो सकते हैं। अगर आप एसिडिटी के लिए यही चीजें लेते रहेंगे, तो कहीं कैंसर बढ़ न जाए और डायग्नोसिस में देर न हो जाए।

अगर आपको एसिडिटी, गैस बहुत ज्यादा है, थोड़ा-सा खाने के बाद पेट भारी-भारी लगता है और ये सिम्पटम्स काफी देर से परसिस्ट कर रहे हैं, तो इसे इग्नोर न करें। ये कैंसर का फर्स्ट साइन या सिम्पटम हो सकता है। इसलिए सेल्फ-मेडिकेशन छोड़कर अपने डॉक्टर से जरूर मिलें और इवैल्यूएशन कराएं।

सवाल 4: हम अनजाने में रोज ऐसी कई चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो कैंसर का कारण बन सकती हैं- जैसे प्लास्टिक के डिब्बों में खाना गर्म करना या एक ही तेल को बार-बार उबालकर इस्तेमाल करना। एक ऑन्कोलॉजिस्ट के तौर पर, आप हमारी किचन से किन 2-3 चीजों को तुरंत बाहर फेंकने की सलाह देंगी?

जवाब: सबसे पहले तो मैं तीन बातों को रोकने को बोलूंगी। एक तो जो नॉर्मल प्लास्टिक के कंटेनर्स हैं, उसमें खाने को गर्म करना या उसमें गर्म-गर्म खाना डालकर खाना, क्योंकि सारे प्लास्टिक के कंटेनर्स सही कंटेनर्स या माइक्रोवेव सेफ नहीं होते।

दूसरी चीज, बहुत सारे लोग ऐसा करते हैं कि वो अपने कुकिंग ऑयल को बार-बार हाई टेम्परेचर पर हीट करते हैं और फिर उसको ठंडा होने के बाद दोबारा री-हीट करके री-यूज करते हैं। ऐसा बार-बार नहीं करना चाहिए।

तीसरा, बहुत सारे घरों में स्मोक्ड खाना या बारबेक्यू फूड खाया जाता है। इसमें कार्बन प्रोड्यूस होता है, तो बहुत ज्यादा बारबेक्यू किया हुआ खाना नहीं खाना चाहिए।

इन बातों के बारे में हमें सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा, प्रिजर्वेटिव वाला खाना, रेड मीट, बहुत ज्यादा मैदे की चीजें, बहुत ज्यादा चीजी वगैरह चीजें और नमक की भी ज्यादा मात्रा में सेवन करना सेहत के लिए अच्छा नहीं है।

सवाल 5: जब किसी को पता चलता है कि कैंसर 3rd या 4th स्टेज पर है, तो मरीज और परिवार उम्मीद छोड़ देते हैं। क्या आप ऐसी किसी नई मेडिकल तकनीक या इलाज के बारे में बता सकती हैं, जो ऐसे एडवांस स्टेज वाले मरीजों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है?

जवाब: आज कैंसर की ट्रीटमेंट में बहुत ज्यादा तरक्की हो गई है। कैंसर ट्रीटमेंट एक बहुत लंबा वे है। हम स्पेशल टेस्ट से कैंसर के मॉलिक्यूलर सिग्नेचर को जान सकते हैं और उन मॉलिक्यूलर सिग्नेचर के हिसाब से टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और इस तरह की काफी ज्यादा स्पेसिफिक कैंसर-स्पेसिफिक थेरेपी आ गई हैं।

बहुत सारे कैंसर में, बहुत सारे एडवांस कैंसर में भी इन थेरेपी की वजह से कैंसर ट्रीटमेंट के आउटकम्स पहले से बहुत बेहतर हो गए हैं। इसलिए एडवांस कैंसर का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कुछ नहीं किया जा सकता। बहुत सारे एडवांस कैंसर में भी हम नई तरह की थेरेपी और नई तरह की ट्रीटमेंट से जिंदगी को काफी हद तक आसान बना सकते हैं और लाइफ का सर्वाइवल काफी बढ़ा सकते हैं।

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