नींद पूरी होने के बाद भी शरीर में रहती है अकड़न? डॉक्टर बोले- 'स्लीपिंग पोजीशन' हो सकती है जिम्मेदार
सुबह शरीर में अकड़न और दर्द का कारण अक्सर नींद की कमी नहीं, बल्कि सोने की गलत पोजीशन होती है। ...और पढ़ें

सुबह अकड़ा रहता है शरीर, तो सुधारें सोने का तरीका (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सुमन अग्रवाल, नई दिल्ली। क्या आप सुबह दर्द के साथ बिस्तर से उठते हैं, शरीर की मांसपेशियों में अकड़न महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे नींद पूरी नहीं हुई है। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, लेकिन एक अहम कारण है सोते समय आपकी शारीरिक मुद्रा। आइए एक्सपर्ट से जानें, कैसे सुधारें सोने का तरीका...
आजकल अधिकांश युवाओं और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों में यह समस्या गंभीर रूम से दिखाई दे रही है। सुबह उठते ही उनका शरीर इस कदर अकड़ा रहता है, जैसे रक्त संचालन बंद हो गया हो। काफी देर स्ट्रेचिंग करने के बाद शरीर थोड़ा सा खुलता है। कई लोगों को लगता है नींद पूरी न होने के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। सोने की मुद्रा की वजह से शरीर के अंगों में दर्द होता है।

(Image Source: AI-Generated)
किन लोगों को होती है ज्यादा दिक्कत?
पहले से ही हड्डी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों को ज्यादा दिक्कतें आती हैं। जिन्हें पहले से आर्थराइटिस, फाइब्रोमायल्जिया या जोड़ों की समस्या है अथवा जिनमें विटमिन डी और आयरन की कमी है, जया फिर जो लोग दिन में बहुत देर बैठे रहते हैं, लेकिन व्यायाम नहीं करते, उनके शरीर में सुबह उठते ही अकड़न की संभावना ज्यादा रहती है।
कैसी होनी चाहिए सोने की मुद्रा?
सोने की मुद्रा हमारी नींद की गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित करती है। हालांकि हर कोई अपनी सुविधा अनुसार सोता है, लेकिन कुछ मुद्राएं ऐसी होती हैं, जो शरीर के दर्द को बढ़ाने का काम करती है। नींद का 50 फीसद समय पीठ के बल लेटना चाहिए और जरूरत पड़ने पर आराम के लिए घुटनों के नीचे तकिया रखना चाहिए। इसके बाद 25 फीसद समय दाहिनी ओर और 25 फीसद समय बाईं ओर लेटकर सोना चाहिए।
खबरें और भी
गलत मुद्रा से बिगड़ता एलाइनमेंट
सोने की गलत शारीरिक मुद्रा से पूरे शरीर का एलाइनमेंट बिगड़ सकता है। अगर आप करवट लेकर घंटों एक ही मुद्रा में सोते हैं तो इससे शरीर का रक्तसंचार प्रभावित होने लगता है। मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ने से सुबह उठते समय वे अकड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप सुबह से ही आप सिर, गर्दन, कंधे या कमर दर्द का शिकार हो जाते हैं, पैर और हाथ में भी दर्द रहने लगता है।
वैज्ञानिक कारण
नींद का प्रत्येक चक्र लगभग 90 मिनट का होता है। और हमारा शरीर रात भर में कई बार अपनी स्थिति बदलता है। सोते समय अपनी स्थिति पर ध्यान देकर और तकिये को सही जगह पर रखकर आप अपने शरीर को बेहतर नींद की आदतें अपनाने के लिए प्रशिक्षित कर सकते हैं।
पेट के बल सोने से बचें
पेट के बल सोने से कुछ लोगों को एसिडिटी में आराम मिलता है, लेकिन यह मुद्रा रीढ़ और पीठ दर्द के लिए हनिकारक है। इसलिए कोशिश करें कि पेट के बल न सोएं। बाईं करवट लेकर सोना है लाभकारी इससे पाचन में सुधार होता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। ऐसे सोने से एसिडिटी भी कम होती है।
पीठ के बल लेटें
पीठ के बल सोना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे आपकी रीढ़ सोधी रहती है और शरीर एक एलाइनमेंट में रहता है। पीठ के बल सोने से रीढ़ और जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है और रक्त संचार को बढ़ावा मिलता है। सोने की मुद्रा सही करने के साथ-साथ तकिये का सही प्रयोग भी महत्वपूर्ण है। सो समय घुटनों के नीचे तकिया रखने से शरीर की स्वाभाविक मुद्रा बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं हाथों को बगल या छाती पर रखकर सोने से दर्द कम हो सकता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमित अग्रवाल के मुताबिक, सही मुद्रा में न सोने के कारण पर्याप्त गुणवत्ता वाली नींद नहीं आती है। रात को बार-बार नींद टूटती है। इसका असर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक भी होता है। नींद ठीक से न आने के कारण तनाव बढ़ने लगता है। हालांकि, यह भी सच है कि सारी रात सोने के तरीके का ध्यान रखना संभव नहीं है, लेकिन बीच में जब भी नींद खुले तो एक बार जरूर जांच लें कि आपके सोने की शारीरिक मुद्रा ठीक है या नहीं। वहीं, पीठ के बल सोने वालों को पतला तकिया और साइड में करवट लेकर सोने वालों को थोड़ा मोटा तकिया लेने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर में दर्द कम हो।