गर्मियों में लगातार AC में बैठना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने गिनाए इसके नुकसान और बचाव के तरीके
लगातार AC की हवा में बैठने से सेहत को काफी नुकसान हो सकता है। इसलिए गर्मी के मौसम में सावधानी बरतनी चाहिए।

कहीं AC की हवा तो नहीं पहुंचा रही नुकसान? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में तापमान 40 डिग्री के पार जा चुका है और हीटवेव की चेतावनी जारी हो चुकी है। ऐसे में खुद को गर्मी की मार से बचाने के लिए AC कई लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है।
AC गर्मी से तो राहत देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घंटों ठंडी हवा में बैठे रहना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है? जी हां, लगातार AC की ठंडी हवा में बैठे रहने से शरीर पर कई नेगेटिव असर हो सकते हैं। इस बारे में डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानते हैं।
डिहाइड्रेशन और ड्राईनेस
AC हवा से नमी सोख लेता है, जिससे कमरे की ह्युमिडिटी 30% से भी कम हो जाती है। कम नमी के कारण हमारी विंड पाइप का म्यूकस मेंमब्रेन सूखने लगता है। इससे गले में खराश, सूखी खांसी और नाक में जलन की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही, त्वचा और आंखों में सूखापन महसूस होने लगता है।
सिक बिल्डिंग सिंड्रोम
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आधुनिक इमारतों में जहां हवा का वेंटिलेशन कम होता है और वही हवा बार-बार सर्कुलेट होती है। इससे सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन और फोकस में कमी शामिल है।

तापमान का बड़ा अंतर
जब आप बाहर की 40°C-45°C वाली गर्मी से अचानक 18°C-20°C वाले AC कमरे में आते हैं, तो शरीर को थर्मल शॉक लगता है। तापमान में यह अचानक बदलाव ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है, जिससे जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है।
रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन
अगर AC के फिल्टर की नियमित सफाई न की जाए, तो उनमें धूल, फफूंद और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, शहरी आबादी में गर्मियों के दौरान रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण गंदा AC फिल्टर है।
संतुलन कैसे बनाएं?
AC का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन कुछ उपायों से इसके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है-
- तापमान 24–26°C रखें- ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के अनुसार, 24 से 26 डिग्री का तापमान इंसानी शरीर के लिए सबसे सही है। यह न केवल बिजली बचाता है, बल्कि शरीर को बाहरी तापमान के साथ तालमेल बिठाने में भी मदद करता है।
- भरपूर पानी पिएं- AC में पसीना नहीं आता, लेकिन शरीर की नमी अंदरूनी तौर पर कम होती रहती है। इसलिए प्यास न लगने पर भी दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
- नियमित सर्विसिंग- एलर्जी और इन्फेक्शन से बचने के लिए हर 2-4 सप्ताह में AC के फिल्टर को साफ करें या बदलें।
- ताजी हवा के लिए ब्रेक लें- हर दो-तीन घंटे में कुछ देर के लिए AC से बाहर निकलें या खिड़कियां खोलें, ताकि कमरे में ताजी हवा आ सके और ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।
- सीधी हवा से बचें- AC की हवा सीधे शरीर या सिर पर न पड़ने दें। इससे साइनस और मांसपेशियों में दर्द का खतरा बढ़ जाता है।
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