स्लीप एपनिया के लिए वैज्ञानिकों ने तैयार की एक खास गोली, ब्रीदिंग क्वालिटी में 47% तक होगा सुधार
वैज्ञानिकों ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए 'सल्थियाम' नामक एक नई दवा खोजी है। ...और पढ़ें

स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए आई राहत भरी खबर (Image Source: AI-Generated & Freepik)
HighLights
नई सल्थियाम दवा स्लीप एपनिया के लिए प्रभावी
सांस रुकने की घटनाओं में 47% तक कमी
CPAP मशीन का विकल्प, मरीजों को राहत
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको या आपके किसी परिचित को सोते समय सांस रुकने या जोरदार खर्राटे लेने की समस्या है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बहुत राहत भरी हो सकती है।
दरअसल, वैज्ञानिकों ने ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए एक नई दवा खोजी है। यह दवा उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जिन्हें सोते समय चेहरे पर भारी-भरकम CPAP मशीन का मास्क पहनना झंझट लगता है।

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स्लीप एपनिया क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति के सोते समय गले की मांसपेशियां पूरी तरह से ढीली पड़ जाती हैं। इसके कारण आसपास के टिश्यूज का दबाव सांस की नली पर पड़ता है और हवा का रास्ता ब्लॉक हो जाता है।
नतीजतन, नींद के दौरान बार-बार सांस रुकने लगती है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। अगर लंबे समय तक इसका इलाज न किया जाए, तो सांस में रुकावट के कारण हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
अब तक इलाज में क्या परेशानी थी?
वर्तमान में इस बीमारी का सबसे बेहतरीन इलाज CPAP मशीन है, जो एक मास्क के जरिए गले में लगातार हवा का दबाव बनाए रखती है, लेकिन समस्या यह है कि लगभग 50% मरीज एक साल के अंदर ही इस मशीन का इस्तेमाल बंद कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मास्क पहनने पर घुटन महसूस होती है, मुंह सूखने लगता है और सफर के दौरान इस मशीन को साथ ले जाना बहुत असुविधाजनक होता है।
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नई दवा 'सल्थियाम' कैसे काम करती है?
वैज्ञानिकों ने 'सल्थियाम' नाम की दवा का परीक्षण किया है। वैसे तो यह दवा पहले से ही कुछ देशों में मिर्गी के इलाज के लिए इस्तेमाल होती आ रही है, लेकिन अब यह स्लीप एपनिया में भी बेहद कारगर पाई गई है।
यह दवा किसी मशीन के बिना काम करती है। यह सीधे दिमाग से मिलने वाले उन संकेतों को स्थिर करती है जो हमारी सांस को नियंत्रित करते हैं। साथ ही, यह गले के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को सक्रिय रखती है, ताकि सोते समय सांस की नली सिकुड़े नहीं।
रिसर्च से जगी नई उम्मीद
मशहूर मेडिकल जर्नल 'द लांसेट' में छपी इस रिसर्च में स्वीडन की गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता भी शामिल थे। यूरोप के कई देशों में 298 मरीजों पर 12 हफ्तों तक इस दवा का परीक्षण किया गया। मरीजों को सोने से एक घंटे पहले 100mg, 200mg या 300mg की खुराक दी गई।
इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे:
- सांस रुकने में भारी कमी: 200mg और 300mg की खुराक लेने वाले मरीजों की सांस रुकने की समस्या में 30% से 50% तक की कमी आई। सबसे ज्यादा खुराक (300mg) लेने वालों में सांस रुकने की घटनाएं 47% तक कम हो गईं।
- बेहतर नींद: रात में ऑक्सीजन का स्तर सुधरा और दिन में बेवजह नींद आने की समस्या भी काफी हद तक कम हो गई।
- सही संतुलन: 200mg की खुराक को असर और साइड-इफेक्ट के मामले में सबसे संतुलित माना गया।
- सुरक्षित: मरीजों में कोई गंभीर सुरक्षा समस्या नहीं देखी गई। इसके साइड इफेक्ट्स बहुत ही मामूली (जैसे हल्का सिरदर्द या मतली) थे जो कुछ समय बाद खुद ही ठीक हो गए।
गोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर जन हेडनर ने इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय की मेहनत के बाद अब यह साबित हो गया है कि स्लीप एपनिया का इलाज दवाइयों के जरिए भी संभव है।
अब इसके तीसरे चरण के बड़े ट्रायल की तैयारी है। अगर आने वाले ट्रायल्स भी सफल रहते हैं, तो 'सल्थियाम' स्लीप एपनिया के इलाज के लिए दुनिया की पहली सीधी दवा बन सकती है। यह लाखों लोगों को मशीन के झंझट से आजाद कर उनकी जिंदगी बदल सकती है।