स्किन कैंसर को पहचानने के लिए बनाया गया स्मार्ट टैटू, लक्षण नजर आने से पहले ही लगा लेगा पता
कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक स्मार्ट टैटू विकसित किया है जो स्किन कैंसर, खासकर मेलेनोमा का पता शुरुआती स्टेज में ही लगा सकता है। ...और पढ़ें

स्किन कैंसर का पता लगाने के लिए बनाया गया स्मार्ट टैटू (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी है, जिसके सफल इलाज के लिए समय पर इसका पता लगाना काफी जरूरी है। हालांकि, कैंसर के कुछ प्रकार का पता शुरुआती स्टेज में लगाना काफी मुश्किल होता है और इस वजह से बीमारी शरीर में चुपके-चुपके बढ़ती रहती है।
इसी समस्या को सुलझाने के लिए कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनोखा स्मार्ट टैटू बनाया है, जो स्किन कैंसर के सबसे खतरनाक टाइप मेलेनोमा का शुरुआती स्टेज में ही पता लगा सकेगा। जी हां, एक टैटू स्किन कैंसर का पता लगाने में मदद करने वाला है। इसकी सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह कैंसर को उस स्टेज में भी पहचान सकता है, जब त्वचा पर उसके कोई लक्षण भी दिखाई नहीं देते। आइए जानें स्किन कैंसर का पता लगाने वाले इस स्मार्ट टैटू के बारे में।
तापमान के बदलाव से पकड़ेगा बीमारी
रिसर्चर्स के मुताबिक, यह स्मार्ट टैटू शरीर के तापमान के जरिए कैंसर को पकड़ेगा। दरअसल, मेलेनोमा सेल्स शरीर के बाकी सेल्स से ज्यादा एनर्जी खत्म करते हैं, जिसके कारण शरीर को उस हिस्से का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। ये स्मार्ट टैटू तापमान के इसी बदलाव को पहचानकर कैंसर का पता लगाने में मदद करेगा।
माइक्रोनीडल्स और नैनो पार्टिकल्स का कमाल
यह कोई आम परर्मानेंट टैटू नहीं है, बल्कि एक टेंपररी स्मार्ट टैटू है। इस टैटू को बनाने के लिए माइक्रोनीडल्स और नैनो पार्टिकल्स की मदद ली जाती है। माइक्रोनीडल्स से ये नैनो पार्टिकल्स त्वचा के अंदर जाकर काम करते हैं। यह टैटू त्वचा के ठीक नीचे होने वाले तापमान में बहुत ही मामूली और बारीक बदलावों को भी आसानी से पहचान सकता है।
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कैसे काम करेगा ये टैटू?
इस स्मार्ट टैटू के काम करने का तरीका काफी दिलचस्प है। टेस्टिंग के दौरान जब इस टैटू को इन्फ्रारेड लाइट के नीचे रखा जाता है, तो इसमें मौजूद नैनो पार्टिकल्स चमकने लगते हैं। अगर त्वचा के किसी हिस्से में कैंसर सेल्स मौजूद हैं, तो वहां के तापमान के कारण नैनो पार्टिकल्स चमकने लगते हैं और अल्ट्राफास्ट इमेजिंग की मदद से टेंपरेचर मैप बना लिया जाता है, जिसे देखकर डॉक्टर्स पता लगा सकते हैं कि किस हिस्से में कैंसर सेल्स पनप रहे हैं।