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    जिम जाने से नहीं, ये काम करने से 13 साल जवान हो जाएगा दिमाग! रिसर्च में सामने आया अनोखा माइंड हैक

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 12:56 PM (IST)

    नई रिसर्च के मुताबिक, अब सिर्फ शरीर या त्वचा को जवान दिखाने की कोशिश में न लगे रहें, दिमाग को भी रखा जा सकता है यंग। ...और पढ़ें

    दो से ज्यादा भाषा दिमाग के लिए फायदेमंद (Image Source: AI Generated)

    दो से ज्यादा भाषा दिमाग के लिए फायदेमंद (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की दुनिया में सभी शरीर को यंग बनाए रखने के लिए जिम, एक्सरसाइज और तरह-तरह की डाइट फॉलो कर रहे हैं, पर दिमाग की उम्र को लेकर कोई बात ही नहीं करता। हाल ही में दिमाग की उम्र से जुड़ी एक स्टडी सामने आई है, जिसमें यह कहा गया है कि ज्यादा भाषाएं बोलने से हमारा माइंड जवान बना रहता है। 

    दो से ज्यादा भाषा दिमाग के लिए फायदेमंद 

    बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज में न्यूरोबायोलॉजी ग्रुप हेड और डिप्टी साइंटिस्ट डायरेक्टर लूसिया अमोरुसो और उनके सहयोगियों ने भाषा और दिमाग पर इसके पड़ने वाले असर के बारे में पता लगाने के लिए रिसर्च किया। इसमें खुलासा हुआ कि जो लोग दो या उससे ज्यादा भाषाएं बोलते हैं, उनमें किसी काम को करने की कुशलता ज्यादा होती है जबकि एनर्जी कम लगती है। वहीं, एक ही भाषा बोलने वाले लोगों को किसी काम में अपनी एनर्जी ज्यादा लगानी पड़ती है। 

    कुशल दिमाग सुस्ती से बचाता है 

    दिमाग की बढ़ती हुई क्षमता उम्र ढलने के साथ जरूरी है, खासकर कि तब जब दिमाग में ऐसे पैथोजन्स बन रहे हों जिससे अल्जाइमर जैसी स्थिति का खतरा हो सकता है। रिपोर्ट बताती है कि एक विकसित और अच्छी सोचने-समझने की क्षमता वाला दिमाग लंबे समय तक बगैर थके काम कर सकता है। 

    जितनी ज्यादा भाषाओं की समझ, उतना यंग दिमाग 

    रिसर्च में पाया गया है कि जिन्हें ज्यादा भाषाएं आती हैं, उनका दिमाग सामान्य व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा जवान रहता है। यह बताता है कि 2 या 3 से ज्यादा लैंग्वेज आने से माइंड की उम्र 6 साल तक कम हो जाती है, यानी मेंटली हम 6 साल छोटे हो जाते हैं। वहीं, जो लोग 4 से ज्यादा भाषाएं जानते हैं, उनका दिमाग 13 साल यंग हो जाता है।  

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    कॉग्निटिव रिजर्व की क्षमता बढ़ाए 

    कॉग्निटिव रिजर्व दिमाग की वो क्षमता है जिसमें किसी गंभीर स्थिति, चोट या उम्र बढ़ने के बाद भी माइंड उतनी ही कुशलता से काम करता है। रिसर्च के मुताबिक, इसके चलते बढ़ती उम्र में डिमेंशिया का खतरा भी कम हो जाता है। इसके साथ ही, ब्रेन के फंक्शन एडवांस अल्जाइमर पैथोलॉजी में ठीक से काम करते हैं। इस तरह यह स्टडी लोगों को शरीर को जवान दिखाने के साथ ही दिमाग को भी यंग बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।