बुढ़ापे में भूलने की बीमारी के लिए यंग एज में डायबिटीज है सबसे बड़ा विलेन! 25 साल की रिसर्च में बड़ा खुलासा
ऐसा लग रहा है डायबिटीज के बाद अब भारत डिमेंशिया कैपिटल बन सकता है, क्योंकि रिसर्च में इसका डिमेंशिया के साथ खास लिंक बताया गया है। ...और पढ़ें

कम उम्र में डायबिटीज डिमेंशिया की बड़ी वजह (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। लंबे समय से भारत डायबिटीज कैपिटल बना हुआ है, इसके पीछे यहां के लोगों की बिगड़ती जीवनशैली बड़ी वजह है। वहीं, बढ़ते डिमेंशिया के मामले भी कुछ कम चिंता का विषय नहीं हैं। याददाश्त का कमजोर होना, सोचने-समझने की क्षमता में कमी और बोलने में सही शब्दों का इस्तेमाल न कर पाना, डिमेंशिया के वो लक्षण हैं जो बढ़ती उम्र के साथ हावी होने लगते हैं। हाल ही की एक स्टडी सामने आई है जिसमें डायबिटीज का डिमेंशिया से खास लिंक बताया गया है, साथ ही इसके और भी कारणों का भी जिक्र किया गया है।
कम उम्र में डायबिटीज डिमेंशिया की बड़ी वजह
यह स्टडी बताती है कि भारत में डिमेंशिया के लिए कम उम्र में डायबिटीज होना बड़ी वजहों में से एक है। इसके अलावा, अन्य कारकों में सुनने की क्षमता कम होना, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना और कुपोषण जैसे जोखिम भी शामिल हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये कारक ऐसे नहीं हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता।
25 साल के आंकड़ों की समीक्षा
डिमेंशिया के प्रसार व जोखिम कारकों पर 25 साल के आंकड़ों की समीक्षा वाले अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के अध्यनकर्ताओं की अगुवाई में, टीम ने भारत में डिमेंशिया पर मौजूदा शोध की स्थिति का पता लगाने के लिए 2000 और 2025 के बीच भारतीय आबादी पर शोध की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों के लोगों में भी इसके मामले अधिक पाए गए, जिसकी मुख्य वजह डिमेंशिया को बढ़ावा देने वाले जोखिम वाले कारकों की सही पहचान न हो पाना हो सकता है।
आधे मामलों में टल सकता है डिमेंशिया का खतरा
इन अध्ययनों के नतीजों की तुलना 2024 लैंसेट कमीशन द्वारा बताई गई डिमेंशिया के 14 ऐसे जोखिम वाले कारकों से की गई। इनमें भी वो कारक शामिल थे, जिन्हें बदला या सुधारा जा सकता है। कमीशन का इस बारे में कहना था कि इन जोखिम वाले कारकों पर ध्यान देकर लगभग आधे मामलों में डिमेंशिया के खतरे को टाला जा सकता है या इसे देर से होने वाला बनाया जा सकता है। अल्जाइमर एंड डिमेंशिया जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि भारतीयों में अधेड़ उम्र में डिमेंशिया के जोखिम में मेटाबोलिक और वैस्कुलर जोखिम कारक अहम भूमिका निभाते हैं।