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    कभी सोचा है गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है चिड़चिड़ापन? डॉक्टर ने दिए दिमाग को 'कूल' रखने के टिप्स

    Updated: Tue, 26 May 2026 10:48 AM (IST)

    गर्मियों में बढ़ती गर्मी और पसीना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। ...और पढ़ें

    हीटवेव और एंग्जायटी का कनेक्शन (Image Source: AI-Generated)

    हीटवेव और एंग्जायटी का कनेक्शन (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और पसीना आना तो आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि इन दिनों आपका चिड़चिड़ापन भी बेवजह बढ़ जाता है? जब तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और कई दिनों तक लगातार गर्म हवाएं चलती हैं, तो इसका असर सिर्फ हमारे शरीर पर ही नहीं, बल्कि हमारी मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है।

    दिल्ली के मैक्योर एंड आस्था हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. प्रतीक कुमार का मानना है कि इस दौरान बेचैनी, तनाव और एंग्जायटी जैसी समस्याएं काफी बढ़ सकती हैं। कई लोग अक्सर यह शिकायत करते हैं कि गर्मी के दिनों में उनका मन अशांत रहता है और मूड जल्दी खराब हो जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर गर्मी हमारे दिमाग को कैसे प्रभावित करती है।

    how to stay calm in summer

    (Image Source: AI-Generated) 

    स्ट्रेस हार्मोन और शरीर की जद्दोजहद

    जब बाहर बहुत ज्यादा गर्मी होती है, तो हमारा शरीर अपने तापमान को कंट्रोल करने के लिए लगातार संघर्ष करता है। इस पूरी प्रक्रिया में शरीर पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे 'कोर्टिसोल' जैसे स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बिगड़ सकता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है और मानसिक थकान, घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है। खास बात यह है कि जिन लोगों को पहले से ही एंग्जायटी या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी है, उनके लक्षण गर्मियों में और भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

    नींद में खलल और बढ़ता तनाव

    हीटवेव का एक और बड़ा प्रभाव हमारी नींद पर देखने को मिलता है। गर्मी में होने वाली घुटन, लगातार पसीने और असहजता के कारण रात में ठीक से नींद नहीं आती। खराब नींद का सीधा कनेक्शन हमारे मानसिक स्वास्थ्य से है। जब दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता, तो मूड स्विंग्स, चिंता और तनाव का बढ़ना तय है।

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    एंग्जायटी का बड़ा कारण है डिहाइड्रेशन

    शरीर में पानी की कमी भी एंग्जायटी को न्योता दे सकती है। पसीने के कारण जब शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ता है, तो इंसान को सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। कई बार ये सारे लक्षण बिल्कुल 'एंग्जायटी अटैक' जैसे महसूस होते हैं, जिससे इंसान और ज्यादा घबरा जाता है।

    अकेलापन और सामाजिक दूरी

    हीटवेव का असर सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी होता है। कड़ी धूप और लू के डर से लोग अक्सर बाहर निकलने से बचते हैं और उनकी सामाजिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। लंबे समय तक घर की चारदीवारी में बंद रहने से मन में उदासी, अकेलापन और मानसिक तनाव पनपने लगता है।

    Summer irritability

    (Image Source: AI-Generated) 

    दिमाग को 'कूल' रखने के आसान टिप्स

    गर्मी के इस मौसम में अपने शरीर के साथ-साथ मन को भी शांत रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कुछ बहुत ही आसान उपाय अपना सकते हैं:

    • दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
    • कैफीन और बहुत ज्यादा मसालेदार खाने से पूरी तरह दूरी बनाएं।
    • खुद को ठंडी और हवादार जगह पर रखें।
    • अपनी नींद पूरी करें और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें।
    • मानसिक शांति के लिए मेडिटेशन करें और गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।
    • अपने मोबाइल या टीवी का स्क्रीन टाइम कम करें।

    डॉक्टर की सलाह कब लें?

    डॉक्टर प्रतीक के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को गर्मी के मौसम में लगातार घबराहट हो रही है, बेचैनी महसूस हो रही है, नींद की समस्या है या पैनिक जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना बहुत जरूरी है, ताकि समय रहते आपको सही मदद और इलाज मिल सके।

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