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    गर्मी में बाहर धूप में तो नहीं खेल रहे आपके बच्चे? आंखों पर मंडरा रहा 'फोटोकेराटाइटिस' का खतरा

    Updated: Fri, 19 Jun 2026 09:14 AM (IST)

    अक्सर कुछ बच्चे गर्मियों की छुट्टियां का ज्यादातर समय खुले वातावरण में खेलकर बिताते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धूप में लंबे समय तक खेलने से उनकी ...और पढ़ें

    गर्मियों में बच्चों की आंखों को 'फोटोकेराटाइटिस' से कैसे बचाएं? (Image Source: AI-Generated)

    गर्मियों में बच्चों की आंखों को 'फोटोकेराटाइटिस' से कैसे बचाएं? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों की छुट्टियां मतलब बच्चों की मस्ती और दिन भर घर के बाहर खेलना, लेकिन क्या कड़कड़ाती धूप में यह मस्ती उनकी आंखों को नुकसान पहुंचा रही है?

    डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की नेत्र रोग विशेषज्ञ, डॉ. साम्राज्ञी श्रीवास्तव (MBBS, MS) आगाह करती हैं कि अल्ट्रावायलेट किरणों के ज्यादा संपर्क में आने से आंखों में 'फोटोकेराटाइटिस' नामक परेशानी पनप सकती है। आइए इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    symptoms of photo keratitis

    (Image Source: AI-Generated) 

    किसे रहता है इस बीमारी का सबसे ज्यादा रिस्क?

    फोटोकेरेटाइटिस मुख्य तौर पर उन लोगों को अपना शिकार बनाती है, जो बेहद ज्यादा यूवी किरणों का सामना करते हैं। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, गर्मियों की छुट्टियों के दौरान खुले मैदानों में घंटों बिताने वाले बच्चों में इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।

    बच्चों के अलावा, ये लोग भी आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं:

    • वेल्डिंग का काम करने वाले लोग।
    • बर्फ वाली जगहों पर स्कीइंग करने वाले व्यक्ति।
    • समुद्र तट पर ज्यादा समय बिताने वाले लोग।
    • ऐसे व्यक्ति जिनका काम लंबे समय तक तेज धूप में रहने का है।

    इन लक्षणों से करें बीमारी की पहचान

    अगर किसी व्यक्ति या बच्चे को फोटोकेराटाइटिस हो जाता है, तो उसे आंखों में कई तरह की दिक्कतें महसूस होने लगती हैं:

    • आंखों में चुभन, जलन और तेज दर्द होना।
    • आंखों का लाल हो जाना और उनसे लगातार पानी गिरना।
    • रोशनी से परेशानी होना।
    • आंखों में ऐसा महसूस होना जैसे कोई कण या कचरा गिर गया हो।

    सबसे अच्छी बात यह है कि इस समस्या में मरीज की आंखों की रोशनी ज्यादातर सामान्य ही रहती है, या फिर उसमें बहुत ही मामूली सी कमी आती है।

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    डॉक्टर कैसे लगाते हैं इसका सटीक पता?

    इस बीमारी की स्पष्ट पुष्टि के लिए नेत्र विशेषज्ञ स्लिट-लैंप परीक्षण का सहारा लेते हैं।

    • इस मशीन के जरिए डॉक्टर कॉर्निया की सबसे ऊपरी सतह को देखते हैं, जहां सूजन, लाली या कोशिकाओं के नुकसान को आसानी से पहचाना जा सकता है।
    • जांच के दौरान डॉक्टर आंख में एक विशेष 'एनेस्थेटिक ड्रॉप' डालते हैं। इसे डालते ही मरीज को दर्द और परेशानी से एकदम से आराम मिल जाता है। दर्द का तुरंत गायब होना इस बीमारी को पहचानने का एक बहुत ही पुख्ता क्लिनिकल तरीका है।
    • यह एनेस्थेटिक ड्रॉप केवल क्लिनिक में जांच के उद्देश्य से उपयोग की जाती है। आम इलाज के तौर पर इसका नियमित इस्तेमाल सख्त मना है।

    सही समय पर इलाज से मिलेगी जल्दी राहत

    डॉ. साम्राज्ञी श्रीवास्तव का कहना है कि फोटोकेराटाइटिस का इलाज बहुत ही सीधा और असरदार है। अगर समय रहते इस समस्या को पहचान लिया जाए और उचित इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज महज 24 से 72 घंटों के अंदर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। इसलिए, अगर बच्चों में ऐसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

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