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    WHO New Guidelines: प्रेग्नेंसी में डायबिटीज क्यों है मां और बच्चे के लिए खतरनाक? एक्सपर्ट ने बताई वजह

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 01:00 PM (IST)

    प्रेग्नेंसी में डायबिटीज के लिए पहली बार जारी हुए दिशा-निर्देश, एक्सपर्ट से समझें आखिर क्यों इस दौरान ब्लड शुगर लेवल बढ़ना है खतरे की घंटी। ...और पढ़ें

    WHO ने प्रेग्नेंसी में डायबिटीज को लेकर जारी की गाइडलाइंस (Image Source: AI Generated)

    WHO ने प्रेग्नेंसी में डायबिटीज को लेकर जारी की गाइडलाइंस (Image Source: AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अब दुनिया में हर छठी प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड शुगर से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 2.1 करोड़ महिलाएं इस स्थिति का सामना करती हैं। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि दशकों तक प्रेग्नेंसी में डायबिटीज का इलाज डॉक्टर नॉर्मल डायबिटीज की गाइडलाइंस को फॉलो कर करते रहे। इसे लेकर हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बड़ी राहत दी है। यहां मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, मालवीय नगर, नई दिल्ली में ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. जयश्री सुंदर इसे लेकर विस्तार से बता रही हैं। 

    WHO ने प्रेग्नेंसी में डायबिटीज को लेकर जारी की गाइडलाइंस 

    बताते चलें कि अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार खासतौर से प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज के मैनेजमेंट के लिए एक गाइडलाइन जारी की है, जिसमें निदान से लेकर डिलीवरी तक हर एक फेज शामिल है। इसका साफ मतलब है कि अब प्रेग्नेंसी के डायबिटीज को नॉन प्रेग्नेंसी डायबिटीज की तरह ट्रीट नहीं किया जाएगा। इन गाइडलाइंस में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की गरीब महिलाओं की सेहत का खास ध्यान रखने पर जोर दिया गया है। 

    भारत डायबिटीज कैपिटल 

    भारत लंबे समय से एक असहज पहचान के साथ जुड़ा रहा है, यह पहचान है दुनिया की “डायबिटीज कैपिटल”। लेकिन सामान्य डायबिटीज के अलावा प्रेग्नेंसी में होने वाले डायबिटीज पर बहुत कम चर्चा की जाती है। गर्भकालीन मधुमेह जिसे Gestational Diabetes Mellitus या GDM कहते हैं, भारतीय महिलाओं में वैश्विक औसत की तुलना में कहीं ज्यादा सामान्य है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं: 

    • आनुवंशिक प्रवृत्ति

    • बढ़ता मोटापा

    • शहरी लाइफस्टाइल में कम फिजिकल एक्टिविटी 

    • पहले से मौजूद डायबिटीज 

    कई प्रेग्नेंट महिलाओं को पहले से होता है डायबिटीज 

    कई महिलाएं अपनी पहली डिलीवरी से पहले की जांच के लिए पहले से ही डायबिटीज से पीड़ित होती हैं लेकिन अपनी सेहत को अनदेखा करने की वजह से उन्हें इस बात का पता ही नहीं होता। ऐसे में बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल प्रेग्नेंसी से जुड़ी सामान्य समस्या मान लिया जाता है, जबकि असल में वह पहले से मौजूद डायबिटीज हो सकता है, जिसके लिए तुरंत पर अलग तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। WHO की नई गाइडलाइन में "प्रेग्नेंसी के दौरान विकसित हुआ डायबिटीज" और "पहले से मौजूद लेकिन गर्भावस्था के दौरान सामने आया डायबिटीज", इन दोनों के बीच का इसी फर्क साफ किया है। 

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    जब ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, तो क्या होता है? 

    प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल से बाहर(हाइपरग्लाइसीमिया) हो तो इसे कभी भी सामान्य या मामूली समस्या नहीं माना जा सकता। इससे प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर स्थिति) का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से मृत शिशु जन्म (स्टिलबर्थ) की आशंका बढ़ सकती है, शिशु का आकार सामान्य से ज्यादा हो सकता है जिससे डिलीवरी जटिल हो जाती है और जन्म के समय चोट लगने का जोखिम भी बढ़ता है। 

    डिलीवरी के बाद भी खत्म नहीं होता डायबिटीज का खतरा 

    इतना ही नहीं, जन्म के कुछ ही घंटों के भीतर नवजात शिशु में ब्लड शुगर लेवल में खतरनाक रूप से कम भी हो सकता है। जान लेने वाली बात यह है कि इसके प्रभाव जन्म के साथ खत्म नहीं होते। वहीं, प्रेग्नेंसी में डायबिटीज हो तो उनमें आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। साथ ही उनके बच्चों में भी भविष्य में मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम बना रहता है। 

    प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए जरूरी बात 

    संदेश एकदम साफ है कि प्रेग्नेंसी के दौरान ग्लूकोज टेस्ट केवल एक औपचारिकता नहीं है जिसे अनदेखा किया जा जा सकता हो। न ही इसका मतलब यह है कि महिला जिंदगी भर डायबिटीज से पीड़ित रहेगी। यहां संदेश केवल यह है कि प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में कई सालों तक डॉक्टर से फॉलोअप लेने की जरूरत है ताकि महिला की सेहत का ध्यान रखा जा सके।