बिस्तर पर 8 घंटे बिताने के बाद भी नहीं मिलेगी चैन की नींद, अगर शाम को करते हैं ये एक छोटी-सी गलती
शाम को कैफीन का सेवन करने से नींद आने में ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता है। ...और पढ़ें

क्या आप भी 8 घंटे सोकर सुबह थका हुआ महसूस करते हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आपको भी लगता है कि रात में बिना किसी परेशानी के सो जाना और बिस्तर पर पूरे 8 घंटे बिताना एक अच्छी नींद की निशानी है? अगर आप शाम के समय कैफीन का सेवन करते हैं, तो हाल ही में हुए एक अध्ययन के नतीजे आपको चौंका सकते हैं।
इस नए शोध में यह बात सामने आई है कि शाम के वक्त कैफीन लेने से केवल नींद आने में ही दिक्कत नहीं होती, बल्कि यह आपकी रात भर की नींद की गुणवत्ता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि इस रिसर्च में क्या-क्या खुलासे हुए हैं।

(Image Source: AI-Generated)
सिर्फ नींद आना ही नहीं है असली समस्या
पोलैंड स्थित व्रोकला मेडिकल यूनिवर्सिटी के नर्सिंग विभाग की शोधकर्ता डोनटा कुरपास के अनुसार, कैफीन का असर सिर्फ नींद कम करने या सोने में होने वाली परेशानी तक सीमित नहीं है। सबसे हैरानी की बात यह है कि अगर आपको लगता है कि आप सामान्य समय तक सोए हैं, तब भी कैफीन आपके मस्तिष्क की 'धीमी लहर गतिविधि' को कम कर देता है।
32 अध्ययनों के विश्लेषण से खुला राज
यह अहम जानकारी ऐसे ही नहीं दी गई है। विशेषज्ञों ने कैफीन के प्रभाव और नींद से जुड़े इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी परिणामों पर आधारित पूरे 32 अलग-अलग अध्ययनों का गहराई से विश्लेषण किया है।
आपको बता दें कि ईईजी एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है। इसकी मदद से यह देखना संभव हो पाता है कि इंसान कितनी देर सोया, वह कब-कब जागा और उसकी नींद की असली गुणवत्ता क्या थी।
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8 घंटे बिस्तर पर, फिर भी दिमाग रहता है जागा हुआ
शोधकर्ताओं का कहना है कि कैफीन इंसानी नींद की न्यूरोफिजियोलॉजिकल संरचना को इस तरह से बदल देता है कि हमारी गहरी नींद में कमी आ जाती है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के मुताबिक, कैफीन ईईजी की जटिलता को बढ़ा देता है। यह हमारी नींद के पैटर्न को एक ऐसी दिशा में मोड़ देता है जहा हमारा मस्तिष्क अधिक उत्तेजित या 'जागृत' अवस्था में रहता है। सरल शब्दों में कहें तो, आपका शरीर भले ही बिस्तर पर पूरे 8 घंटे आराम करे, लेकिन अंदर ही अंदर आपका दिमाग पूरी तरह से तरोताजा नहीं हो पाता है।
आपको जो महसूस होता है, जरूरी नहीं कि वह सच हो!
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे बिना किसी दिक्कत के सो गए, तो उनकी नींद अच्छी थी। लेकिन शोधकर्ता कुरपास बताती हैं कि एक अच्छी नींद का हमारा अनुभव हमेशा उन चीजों से मेल नहीं खाता है जो मशीनों (न्यूरोफिजियोलॉजिकल रिकॉर्डिंग) में दिखाई देती हैं।
हो सकता है कि कोई व्यक्ति रात में बिना किसी परेशानी के गहरी नींद में सो जाए और उसे बीच में जागने का कोई अहसास भी न हो, लेकिन ईईजी रिकॉर्डिंग बताती है कि शाम को लिए गए कैफीन के कारण असल में उसके मस्तिष्क को वह सुकून और गहरी नींद मिली ही नहीं, जिसकी उसे जरूरत थी।