उम्र बढ़ने के साथ क्यों जवाब देने लगता है शरीर? डॉक्टर ने बताया कमजोर इम्युनिटी को कैसे मिलेगी नई ताकत
हर साल अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में World Immunization Week मनाया जाता है। ...और पढ़ें

World Immunization Week: क्या आपका शरीर भी जल्दी थक जाता है? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी गौर किया है कि घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी बीमार क्यों पड़ते हैं, जबकि नौजवानों पर मौसम या बीमारियों का असर आसानी से नहीं होता?
इसका जवाब हमारे शरीर के 'सुरक्षा चक्र' यानी हमारी इम्युनिटी में छिपा है। हम अक्सर यह मान लेते हैं कि शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत जीवन भर एक जैसी रहती है, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
दिल्ली के सरिता विहार स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एस. चटर्जी का कहना है कि शरीर के बाकी हिस्सों की तरह ही हमारी इम्युनिटी भी उम्र के साथ बदलती है। यह बचपन में बेहद नाजुक होती है, जवानी में सबसे मजबूत हो जाती है और उम्र ढलने के साथ धीरे-धीरे अपना दम तोड़ने लगती है।

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बचपन से जवानी तक का सफर
जन्म के समय एक शिशु का शरीर बीमारियों और कीटाणुओं से पूरी तरह अनजान होता है। इस वजह से शुरुआती सालों में बच्चे बहुत जल्दी बीमार पड़ते हैं। यहीं पर टीकाकरण एक ढाल बनकर सामने आता है। टीके हमारे शरीर को बिना बीमार किए ही उन कीटाणुओं से लड़ना सिखा देते हैं, जो भविष्य में हमला कर सकते हैं।
जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं और युवावस्था में कदम रखते हैं, हमारी इम्युनिटी अपने सबसे बेहतरीन और ताकतवर स्तर पर आ जाती है। बचपन में लगे टीकों और शरीर के विकास की बदौलत, युवा लोग नई बीमारियों का डटकर सामना कर पाते हैं।
बुढ़ापे में सुस्त पड़ता सुरक्षा तंत्र
जवानी की यह ताकत उम्र भर नहीं टिकती। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अंदर कई प्राकृतिक बदलाव होते हैं। शरीर में हल्की सूजन रहने लगती है और हमारी इम्युनिटी सुस्त पड़ने लगती है। इसका सीधा असर हमारी रक्षक कोशिकाओं पर पड़ता है।
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नई बीमारियों के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने वाली 'बी-सेल्स' कमजोर हो जाती हैं। वहीं, कीटाणुओं को सीधे नष्ट करने वाली 'टी-सेल्स' की संख्या और फुर्ती भी कम होने लगती है। यही कारण है कि बुजुर्गों का शरीर हानिकारक कीटाणुओं का आसानी से शिकार हो जाता है।

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पुरानी बीमारियां और बढ़ते खतरे
बुढ़ापे में इम्युनिटी तो कमजोर होती ही है, साथ ही डायबिटीज और किडनी जैसी पुरानी बीमारियां शरीर को अंदर से और ज्यादा खोखला कर देती हैं। इन बीमारियों के होने पर एक मामूली सा फ्लू भी खतरनाक रूप ले सकता है। इसके कारण बुजुर्गों को निमोनिया हो सकता है या उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।
इसके अलावा, बुजुर्गों में 'शिंगल्स' का खतरा भी बहुत ज्यादा होता है। यह कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि बचपन के चिकनपॉक्स का ही वायरस होता है जो बुढ़ापे में दोबारा जाग जाता है। शिंगल्स नसों में भयानक दर्द पैदा करता है जो महीनों तक इंसान को तड़पा सकता है और उसकी शांति छीन सकता है।
ताउम्र सुरक्षा का वादा है टीकाकरण
इन सभी खतरों से बचने का सबसे कारगर उपाय है - टीकाकरण। अक्सर लोग यह सोचकर गलती कर बैठते हैं कि टीके सिर्फ बच्चों के लिए होते हैं। जबकि सच यह है कि बुजुर्गों को इसकी उतनी ही सख्त जरूरत है। कमजोर होती इम्युनिटी को सहारा देने और जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए वयस्कों का सही समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है।
हमारी इम्युनिटी की जरूरतें उम्र के साथ बदलती हैं, इसलिए हमारी सोच भी बदलनी चाहिए। अपनी और अपनों की सेहत के लिए टीकाकरण को सिर्फ बचपन की जरूरत नहीं, बल्कि ताउम्र चलने वाला सुरक्षा चक्र मानना चाहिए।
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