ऑफिस में अपनी इमेज बचानी है, तो आज ही छोड़ दें ये 8 आदतें; नहीं तो सबके लिए बन जाएंगे सिरदर्द
जाने-अनजाने में हर वर्कप्लेस पर लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके कलीग्स के लिए रोजमर्रा का सिरदर्द बन जाती हैं। ...और पढ़ें

ऑफिस में लोग आपसे बात करने से कतराते हैं? अपनी इन 8 आदतों को आज ही चेक करें (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी ऑफिस में काम का माहौल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वहां लोग आपस में कैसे बातचीत करते हैं। सही कम्युनिकेशन जहां काम को आसान बनाता है, वहीं बातचीत का गलत तरीका अच्छे-खासे दिन को भी चैलेंजिंग बना सकता है।
क्या आपके ऑफिस में भी कोई ऐसा है जो चैट पर सिर्फ "Hi" लिखकर गायब हो जाता है? या कोई ऐसा जो छोटी सी बात के लिए पन्नों लंबा ईमेल लिख डालता है? असल में, हर वर्कप्लेस पर अनजाने में लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके कलीग्स के लिए सिरदर्द बन जाती हैं। आइए जानते हैं ऑफिस में बातचीत से जुड़ी ऐसी ही 8 आदतों के बारे में और यह भी कि उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है।

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मैसेज में सिर्फ 'Hi' लिखकर छोड़ देना
यह ऑफिस की सबसे परेशान करने वाली आदतों में से एक है। अक्सर लोग चैट पर सिर्फ 'Hi' लिखते हैं और फिर सामने वाले के जवाब का इंतजार करते हैं। इससे मैसेज पढ़ने वाला उलझन में पड़ जाता है कि आखिर काम क्या है और यह कितना जरूरी है।
- इसे कैसे सुधारें: शिष्टाचार जरूरी है, लेकिन उसके साथ स्पष्टता भी रखें। जब भी किसी को मैसेज करें, तो हेलो के साथ ही अपनी बात या सवाल भी उसी मैसेज में लिख दें। इससे सामने वाले का समय बचेगा और बेवजह का सस्पेंस नहीं बनेगा।
जवाब देने में बहुत ज्यादा देरी करना
जब आप सिस्टम पर मौजूद होते हैं, लेकिन किसी कलीग के मैसेज का घंटों तक कोई जवाब नहीं देते, तो यह बहुत ही नेगेटिव इफेक्ट डालता है। इससे सामने वाले को लग सकता है कि आप उसे अनदेखा कर रहे हैं या उससे कोई गलती हो गई है।
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- इसे कैसे सुधारें: अगर आप किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं और तुरंत लंबा जवाब नहीं दे सकते, तो कम से कम एक छोटा सा मैसेज कर दें। "मुझे आपका मैसेज मिल गया है, मैं थोड़ी देर में आपको जवाब देता हूं" -यह एक लाइन कई गलतफहमियों को दूर कर सकती है।
ईमेल में सब्जेक्ट न लिखना
बिना 'सब्जेक्ट' वाले या अस्पष्ट विषय वाले ईमेल पढ़ना किसी को पसंद नहीं होता। ऐसे ईमेल को देखकर यह समझना मुश्किल होता है कि अंदर क्या लिखा है, और पढ़ने वाले को पूरी बात समझने के लिए एक्स्ट्रा टाइम और दिमाग लगाना पड़ता है।
- इसे कैसे सुधारें: हमेशा यह ध्यान रखें कि आपके ईमेल की 'सब्जेक्ट लाइन' बिलकुल सटीक और स्पष्ट हो। पढ़ने वाले को सब्जेक्ट देखते ही समझ आ जाना चाहिए कि ईमेल किस बारे में है।
छोटी-सी बात को बहुत लंबा खींचना
कई बार कोई कलीग एक सिंपल-सा सवाल पूछता है जिसका जवाब सिर्फ 'हां' या 'ना' में दिया जा सकता है, लेकिन लोग उसके पीछे की पूरी कहानी सुनाने लगते हैं। जी हां, जरूरत से ज्यादा जानकारी देना सामने वाले को उबाऊ लग सकता है।
- इसे कैसे सुधारें: अपनी बात को जितना हो सके टू-द-पॉइंट ही रखें। जवाब देने से पहले खुद से पूछें कि सामने वाले को अपना काम पूरा करने के लिए असल में कितनी जानकारी की जरूरत है।

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ऑफिस में पर्सनल टॉक्स
आजकल ऑफिस का माहौल काफी दोस्ताना होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रोफेश्नल बाउंड्रीज को भुला दिया जाए। अपनी सेहत, पारिवारिक समस्याओं या निजी रिश्तों के बारे में हर किसी से बहुत ज्यादा डिस्कशन करना, दूसरों को अनकम्फर्टेबल कर सकता है।
- इसे कैसे सुधारें: काम की जगह पर एक दायरा बनाए रखना जरूरी है। अपनी पर्सनल बातें सिर्फ वहीं तक सीमित रखें जहां तक वह दूसरों के लिए असहज न हों और हमेशा एक प्रोफेशनल रवैया अपनाएं।
बिना प्लानिंग के फालतू मीटिंग्स करना
ऐसी मीटिंग्स जिनका कोई रिजल्ट न निकले और जिन्हें एक साधारण ईमेल के जरिए भी सुलझाया जा सकता था, लोगों को सबसे ज्यादा चिड़चिड़ा बनाती हैं। अक्सर ऐसी मीटिंग्स में बात विषय से भटक जाती है और सबका समय बर्बाद होता है।
- इसे कैसे सुधारें: कोई भी मीटिंग तय करने से पहले उसका एक स्पष्ट एजेंडा बनाएं और उसे सभी के साथ शेयर करें। मीटिंग के दौरान समय का ध्यान रखें और चर्चा को मुख्य विषय पर ही केंद्रित रखें।
अपना स्ट्रेस और गुस्सा दूसरों पर निकालना
काम के दौरान बुरा दिन या खराब अनुभव किसी का भी हो सकता है, लेकिन किसी बुरी मीटिंग के तुरंत बाद अपना तनाव किसी कलीग के सामने जाहिर करना, उसे और भी तनावग्रस्त कर सकता है। इससे पूरे ऑफिस का माहौल प्रभावित होता है।
- इसे कैसे सुधारें: अगर आप परेशान हैं, तो तुरंत किसी के पास जाकर भड़ास निकालने से बचें। खुद को शांत करने के लिए 10-15 मिनट का ब्रेक लें। जब आप थोड़े सामान्य हो जाएं, तभी अपनी बात सही समय देखकर साझा करें।
अधूरी जानकारी देकर घबराहट पैदा करना
"क्या हम थोड़ी देर बात कर सकते हैं?" या "सोमवार को मीटिंग करते हैं, बहुत जरूरी काम है" -इस तरह के मैसेज अक्सर लोगों की धड़कनें बढ़ा देते हैं। सामने वाला यह सोचकर परेशान रहता है कि आखिर मामला क्या है या क्या उससे कोई बड़ी गलती हो गई है।
- इसे कैसे सुधारें: जब भी आप किसी से मीटिंग या कॉल का समय मांगें, तो शॉर्ट में यह जरूर बता दें कि आप किस विषय पर बात करना चाहते हैं। इससे सामने वाला मानसिक रूप से तैयार रहेगा और बेवजह घबराएगा नहीं।
ऑफिस में आपकी सफलता सिर्फ आपके काम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप दूसरों के साथ कैसे पेश आते हैं। इन छोटी-छोटी बातों को अपनी आदत में शामिल करके आप न सिर्फ अपना काम आसान कर सकते हैं, बल्कि अपने कलीग्स के बीच भी सम्मान पा सकते हैं।