90s Nostalgia: न 4K ग्राफिक्स, न इंटरनेट... फिर भी हमें घंटों टीवी से चिपकाए रखते थे 6 वीडियो गेम्स
यह आर्टिकल 90 के दशक के उन 6 क्लासिक वीडियो गेम्स की याद दिलाता है, जिन्होंने बिना 4K ग्राफिक्स और इंटरनेट के भी बच्चों को घंटों टीवी से जोड़े रखा। ...और पढ़ें

90s Nostalgia: वो 6 वीडियो गेम्स जो बिना इंटरनेट के भी हमें घंटों टीवी से चिपकाए रखते थे (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको याद है वो 90 का दशक? जब न तो स्मार्टफोन थे और न ही हाई-स्पीड इंटरनेट। गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही हमारा सबसे अच्छा दोस्त बन जाता था हमारा 'वीडियो गेम कंसोल'।
टीवी के सामने जमीन पर बैठकर, गेम की कैसेट में फूंक मारकर उसे चलाना, और भाई-बहनों के साथ रिमोट के लिए लड़ना- वो दिन ही कुछ और थे। आज के 4K ग्राफिक्स वाले गेम्स में वो बात कहां, जो उन 8-बिट वाले साधारण गेम्स में थी।
आइए, हमारी सीरीज 90s Nostalgia में एक बार फिर याद करते हैं उन 6 क्लासिक वीडियो गेम्स को, जिनका नाम उस वक्त बच्चे-बच्चे की जुबान पर रहता था।

(Image Source: AI-Generated)
सुपर मारियो
अगर 90s के वीडियो गेम्स की बात हो और 'मारियो' का नाम ना आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। लाल टोपी, नीली पैंट और बड़ी-सी मूंछों वाला मारियो हम सबका हीरो था। जादुई मशरूम खाकर बड़ा होना, कछुओं पर कूदना और अपनी राजकुमारी को बचाने के लिए आग उगलने वाले ड्रैगन से लड़ना- यह गेम इतना मजेदार था कि हम इसे बार-बार खेलकर भी नहीं थकते थे। बता दें, इसका आइकॉनिक बैकग्राउंड म्यूजिक आज भी कई लोगों के फोन की रिंगटोन है।
कॉन्ट्रा
अगर आपको एक्शन और शूटिंग पसंद थी, तो 'कॉन्ट्रा' पक्का आपका फेवरेट गेम रहा होगा। अपने दोस्त या भाई के साथ मिलकर एलियंस और दुश्मनों पर गोलियां बरसाना एक अलग ही लेवल का रोमांच देता था। इस गेम की सबसे खास बात थी इसका 'S' वाला हथियार। जैसे ही आसमान से वह 'S' वाली पावर नीचे गिरती थी, दोनों प्लेयर्स के बीच उसे लूटने के लिए रेस लग जाती थी।
डक हंट
यह गेम बाकी गेम्स से बिल्कुल अलग था क्योंकि इसे खेलने के लिए हमें एक खास 'प्लास्टिक की बंदूक'मिलती थी। टीवी स्क्रीन पर उड़ती हुई बत्तखों पर अपनी बंदूक से निशाना लगाना उस समय किसी जादू से कम नहीं लगता था। और हां, अगर निशाना चूक जाए तो स्क्रीन पर नीचे से वह शिकारी कुत्ता आकर जो हम पर हंसता था, उस पर तो बहुत ही ज्यादा गुस्सा आता था।
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एडवेंचर आइलैंड
जंगल का खतरनाक रास्ता, स्केटबोर्ड पर दौड़ना और रास्ते में मिलने वाले फल खाना- एडवेंचर आइलैंड भी वाकई एक मजेदार गेम था। इसमें सबसे बड़ी टेंशन यह होता थी कि अपनी एनर्जी बनाए रखने के लिए लगातार फल खाते रहना पड़ता था, वरना आपका कैरेक्टर बीच में ही गिर जाता था। पत्थर की कुल्हाड़ी और आग के गोलों से दुश्मनों को मारते हुए आगे बढ़ना इस गेम को बहुत ही दिलचस्प बनाता था।
रोड फाइटर
यह कई बच्चों का पहला रेसिंग गेम था। सीधी सड़क पर तेज स्पीड में लाल रंग की कार दौड़ाना और दूसरी गाड़ियों से टकराने से बचना, यही इस गेम का मजा था। रास्ते में चमकती हुई सतरंगी कार से टकराकर अपनी कार में फ्यूल भरना सबसे जरूरी काम होता था। अगर फ्यूल खत्म हो जाए, तो कार बीच रास्ते में ही रुक जाती थी और गेम ओवर। सुपरमैन को बीच सड़क पर उड़ते हुए देखना इस गेम का एक मजेदार सरप्राइज था।
सर्कस चार्ली
सर्कस में करतब दिखाने का मजा हमें 'सर्कस चार्ली' ने ही दिया था। शेर की पीठ पर बैठकर 'फायर रिंग्स' के बीच से छलांग लगाना, तनी हुई रस्सियों पर बंदरों के ऊपर से कूदकर चलना और गेंदों पर बैलेंस बनाना- इस गेम के हर लेवल में एक नया और मजेदार चैलेंज होता था। इसके रंग-बिरंगे ग्राफिक्स बच्चों को टीवी स्क्रीन से हटने ही नहीं देते थे।