90s Nostalgia: पेट में पेड़ उगना और पेंसिल के छिलके से रबर बनाना... याद हैं बचपन के वो 10 सफेद झूठ?
90 का दशक एक ऐसा सुनहरा समय था, जिसे याद करते ही चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान आ जाती है। ...और पढ़ें

वो 5 बातें जिन्हें 90 के दशक का हर बच्चा सच मानता था, क्या आपको भी याद हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 90s में न तो हर बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन थे और न ही इंटरनेट का कनेक्शन। हमारी दुनिया गली-मोहल्ले, स्कूल के दोस्तों और टीवी पर आने वाले 'शक्तिमान' तक ही सीमित थी।
हालांकि, उस मासूमियत भरे बचपन की सबसे खास बात वो 'सफेद झूठ' थे, जिन्हें हम पूरी शिद्दत से सच मानते थे। मम्मी-पापा की डांट से बचने के लिए बनाए गए नियम हों या दोस्तों के बीच फैली अफवाहें, इन बातों ने हमारे बचपन को और भी रोमांचक बना दिया था।
आइए, आज हम आपको 90 के दशक के उन 10 सबसे मजेदार झूठों (90s Kids White Lies) की याद दिलाते हैं, जिन पर आपने भी कभी न कभी आंख बंद करके भरोसा किया होगा।

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1) "बीज निगल लिया? अब तुम्हारे पेट में पेड़ उगेगा!"
संतरा, तरबूज या सेब खाते समय अगर गलती से कोई बीज पेट में चला जाता, तो हमारी जान सूख जाती थी। बड़े भाई-बहन हमें डराते थे कि अब हमारे पेट में एक बड़ा सा पेड़ उगेगा और हमारे कान और नाक से उसकी डालियां बाहर निकलेंगी। कई बार तो हम इस डर से रोने भी लगते थे।
2) "चाय मत पियो, वरना रंग काला हो जाएगा"
जब भी घर में चाय बनती थी और हम उसकी जिद करते थे, तो मम्मी का एक ही जवाब होता था- "बच्चों को चाय नहीं पीनी चाहिए, रंग काला हो जाता है।" यह मासूम-सा झूठ सिर्फ इसलिए बोला जाता था ताकि बच्चे दूध पीने की आदत न छोड़ दें।
3) "सिर टकरा गया? दोबारा टकराओ वरना कुत्ता काट लेगा!"
खेलते-खेलते अगर कभी दो दोस्तों का सिर आपस में टकरा जाता था, तो खेल वहीं रुक जाता था। जब तक दोनों दोबारा अपना सिर एक-दूसरे से नहीं टकरा लेते, तब तक चैन नहीं मिलता था। हमें पक्का यकीन था कि अगर हमने ऐसा नहीं किया, तो अगले दिन हमें कुत्ता काट जाएगा।
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4) "किसी को लांघा है, तो उल्टे पैर वापस आओ, वरना उसकी हाइट रुक जाएगी"
अगर कोई जमीन पर लेटा है और हम गलती से उसके ऊपर से गुजर गए, तो घर के बड़े तुरंत डांटते थे। उनका कहना था कि ऐसा करने से लेटे हुए व्यक्ति की हाइट बढ़ना रुक जाएगी। इस "श्राप" को तोड़ने का एकमात्र तरीका था- उल्टे पांव वापस लौटना!

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5) "पेंसिल के छिलके को दूध में उबालने से रबर बनता है"
यह तो हर 90s के बच्चे की कहानी है। स्कूल में किसी न किसी 'ज्ञानी' दोस्त ने हमें यह फॉर्मूला जरूर बताया था। ज्योमेट्री बॉक्स में पेंसिल का कचरा इकट्ठा करना और फिर घर जाकर कटोरी में दूध के साथ उसे उबालकर इरेजर बनाने की नाकाम कोशिश... यह शायद हमारा पहला 'साइंस एक्सपेरिमेंट' था, जो कभी सफल नहीं हुआ।
6) "ज्यादा वीडियो गेम खेलोगे तो टीवी की पिक्चर ट्यूब उड़ जाएगी"
मारियो और कॉन्ट्रा खेलते समय जैसे ही मजा आना शुरू होता था, पापा की आवाज आती थी- "वीडियो गेम बंद करो, टीवी की पिक्चर ट्यूब उड़ जाएगी!" असल में यह झूठ हमें स्क्रीन से दूर रखने और टीवी को आराम देने के लिए बोला जाता था।
7) "झूठ बोले, कौवा काटे"
यह सिर्फ एक गाना नहीं था, बल्कि बच्चों का 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' था। अगर किसी बात पर शक होता था, तो दोस्त कहते थे- "कसम खा कि तू सच बोल रहा है, याद रख झूठ बोलेगा तो काले कौवे से डरेगा।" और डर के मारे कई बार हम सच उगल देते थे।
8) "टूटा हुआ दांत छत पर फेंक दो, चूहा नया दांत दे जाएगा"
जब भी दूध का दांत टूटता था, तो उसे कचरे में फेंकने की सख्त मनाही थी। दादी-नानी कहती थीं कि इस दांत को छत पर फेंक दो, फिर रात को चूहा आएगा और तुम्हारा पुराना दांत ले जाकर बदले में एक मजबूत और नया दांत दे जाएगा।
9) "अपनी कोहनी चाटने से जेंडर बदल जाता है"
यह बात सुनने में आज कितनी भी अजीब लगे, लेकिन बचपन में हम सबने कभी न कभी एकांत में अपनी कोहनी चाटने की कोशिश जरूर की है। स्कूल में यह अफवाह आग की तरह फैली थी कि अगर कोई अपनी कोहनी को जीभ लगा दे, तो लड़का लड़की बन जाएगा और लड़की लड़का।
10) "अरे देखो! चांद हमारे साथ-साथ चल रहा है"
रात में ट्रेन, बस या पापा के स्कूटर पर सफर करते हुए हमें हमेशा लगता था कि चांद हमारा पीछा कर रहा है। हम कितनी भी दूर चले जाएं, चांद हमारे साथ ही रहता था। यह हमारे लिए किसी जादू से कम नहीं था, और बड़े भी मुस्कुराकर कह देते थे, "हां बेटा, चांद को तुम बहुत पसंद हो।"
बचपन लौट आए तो क्या बात हो...
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन भोले-भाले झूठों पर बहुत हंसी आती है। आज के स्मार्ट बच्चों को शायद ही इन बातों पर यकीन हो, लेकिन हमारे लिए यही बातें हमारा पूरा ब्रह्मांड थीं।