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    90s Nostalgia: स्कूल के बाहर मिलने वाली वो 8 चीजें, जिन्हें देख आपका दिल भी कहेगा- 'काश वो दिन लौट आएं'

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 04:02 PM (IST)

    स्कूल के बाहर लगे उन ठेलों और कांच के मर्तबानों में हमारी पूरी दुनिया बसती थी। छुट्टी होते ही वहां बच्चों की जो भीड़ लगती थी, वो किसी छोटे-मोटे मेले स ...और पढ़ें

    90s Nostalgia: स्कूल के बाहर मिलने वाली ये 8 चीजें आज भी कर देंगी इमोशनल (Image Source: AI-Generated)

    90s Nostalgia: स्कूल के बाहर मिलने वाली ये 8 चीजें आज भी कर देंगी इमोशनल (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्कूल की वो आखिरी घंटी बजते ही बैग उठा कर गेट की तरफ भागना, याद है आपको? 90 के दशक का वो बचपन आज के स्मार्टफोन्स और वीडियो गेम्स वाले बचपन से बिल्कुल अलग था।

    उस वक्त हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी हमारी जेब में पड़े वो 1-2 रुपये के सिक्के हुआ करते थे, जिन्हें हम आधी छुट्टी या स्कूल की छुट्टी के लिए बचा कर रखते थे।

    स्कूल के बाहर खड़े उन छोटे-छोटे ठेलों पर मानो दुनिया भर की खुशियां बिकती थीं। आइए, 90s Nostalgia सीरीज में याद करते हैं वो 8 चीजें, जिन्हें देखकर आज भी बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।

    90s Nostalgia

    (Image Source: AI-Generated)

    चूरन की पुड़िया

    काले और लाल रंग का वो खट्टा-मीठा चूरन, जिसे एक छोटी-सी प्लास्टिक की पुड़िया में दिया जाता था। इसे खाने का असली मजा तो उंगली से चाट-चाट कर खत्म करने में ही था। इतना ही नहीं, इसे खाने के बाद दोस्तों को अपनी रंग-बिरंगी जीभ दिखाना भी हमारा सबसे पसंदीदा काम हुआ करता था।

    रंगीन बर्फ का गोला

    गर्मियों के दिनों में स्कूल के बाहर बर्फ के गोले वाले भइया का इंतजार हम सब करते थे। काला-खट्टा, रोज, या ऑरेंज फ्लेवर... बर्फ को घिसकर उस पर रंगीन मीठा सिरप डालकर जब वो हमें देते थे, तो सारी थकान दूर हो जाती थी। इसे चूसते-चूसते घर जाना एक अलग ही एहसास था।

    2 रुपये वाली रंगीन 'पेप्सी'

    यह आज की असली पेप्सी नहीं, बल्कि एक लंबी-सी प्लास्टिक की नली में जमी हुई मीठी बर्फ होती थी। लाल, पीले और नारंगी रंग में मिलने वाली इस 1 या 2 रुपये की 'पेप्सी' को दांतों से फाड़कर पीने में जो आनंद आता था, वो आज की महंगी कोल्ड ड्रिंक्स में भला कहां मिल सकता है।

    90s childhood memories

    (Image Source: AI-Generated)

    संतरे की फांक वाली टॉफी

    संतरे के आकार और स्वाद वाली वो संतरी टॉफियां। एक रुपये में 4 या कभी-कभी 8 टॉफियां मिल जाया करती थीं। दोस्तों के साथ इसे बांटकर खाना और फिर देर तक उसके मीठे स्वाद का मजा लेना 90s के हर बच्चे की खास याद है।

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    मसाले वाली खट्टी-मीठी इमली

    स्कूल गेट के ठीक बाहर इमली और बेर बेचने वाले अंकल हमेशा खड़े रहते थे। कागज की कोन में इमली डालकर, उसके ऊपर खूब सारा लाल मसाला और नमक छिड़क कर जब वो देते थे, तो मुंह में पानी आ जाता था। आज भी इसके बारे में सोचकर जीभ चटकारे लेने लगती है।

    बुढ़िया के बाल

    गुलाबी रंग का वो मीठा-सा बादल, जिसे हम 'बुढ़िया के बाल' कहते थे। इसे देखते ही हम जिद पर अड़ जाते थे। यह मुंह में रखते ही घुल जाता था और पीछे छोड़ जाता था सिर्फ मिठास और गुलाबी होंठ।

    school snacks 90s

    (Image Source: AI-Generated)

    फैंटम सिगरेट

    90 के दशक में कूल दिखने का ये सबसे आसान तरीका था। सफेद और लाल रंग की ये पेपरमिंट वाली मीठी टॉफी बिल्कुल सिगरेट जैसी दिखती थी। इसे उंगलियों के बीच फंसाकर हम ऐसे चलते थे जैसे हम भी बड़े हो गए हों।

    गटागट और आम पाचक

    काले और भूरे रंग की ये छोटी-छोटी गोलियां वैसे तो हाजमे के लिए होती थीं, लेकिन हमारे लिए ये किसी स्वादिष्ट टॉफी से कम नहीं थीं। खट्टी-मीठी और थोड़ी तीखी इन गोलियों को हम मुट्ठी भर कर खाते थे।

    आज हम भले ही कितने भी बड़े हो गए हों और बड़े-बड़े कैफे में जाकर पिज्जा-बर्गर खा लें, लेकिन स्कूल के गेट पर दोस्तों के साथ खड़े होकर उन 1-2 रुपये की चीजों को खाने का जो मजा था, वो आज लाखों रुपये खर्च करके भी नहीं मिल सकता। बचपन की वो मासूमियत और वो छोटी-छोटी खुशियां वाकई बहुत अनमोल थीं।

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