'भाभी खोलो तिजोरी का ताला...' भतीजे के जन्म पर गाए जाने वाले इस सोहर में छिपी है ननद-भाभी की मजेदार नोकझोंक
"भाभी खोलो तिजोरी का ताला..." एक सोहर गीत है, जो उत्तर भारत के कुछ राज्यों में काफी पॉपुलर है। आइए, जानते हैं ननद-भाभी के रिश्ते की मिठास को दर्शाने वाले इस लोकगीत के बारे में।

बच्चा पैदा हुआ तो 'तिजोरी का ताला' क्यों खुलवाती है ननद? (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गांव में जब किसी घर में बच्चे की किलकारी गूंजती है, तो सिर्फ परिवार ही नहीं, आस-पड़ोस का पूरा माहौल जैसे खुशी से भर जाता है। कहीं ढोलक की थाप सुनाई देती है, तो कहीं महिलाएं मिलकर मंगलगीत गाने लगती हैं।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों में बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला सोहर भी इसी लोकपरंपरा का हिस्सा है। इन गीतों में नवजात के आने की खुशी के साथ परिवार के रिश्तों, रीति-रिवाजों और हंसी-मजाक की ऐसी झलक मिलती है, जो इन्हें महज गीत नहीं रहने देती।
इन्हीं पारंपरिक सोहर गीतों में एक पंक्ति काफी दिलचस्प है- "भाभी खोलो तिजोरी का ताला, आज जन्मा भतीजा हमारा"। पहली बार सुनने पर लगता है कि आखिर बच्चे के जन्म और तिजोरी खोलने का क्या संबंध है? आइए, इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।

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'नेग' मांगने का मजेदार अंदाज
दरअसल, इसके पीछे ग्रामीण परिवारों की वह परंपरा है, जिसमें बच्चे के जन्म की खुशी में ननद अपनी भाभी से नेग मांगती है। यह डिमांड सीधे-सादे अंदाज में नहीं बल्कि हंसी-ठिठोली और गीत के जरिए की जाती है। इस तरह तिजोरी का ताला खोलने की बात असल में खुशी के मौके पर नेग और उपहार मांगने का मजेदार अंदाज है। इस गीत के पारंपरिक रूप आज भी अलग-अलग गायकों के जरिए सुनने को मिलते हैं।
क्या है 'भाभी खोलो तिजोरी का ताला' का मतलब?
इस गीत की सबसे खास बात इसका चुटीला अंदाज है। यहां तिजोरी सिर्फ पैसे या गहनों को रखने वाली जगह नहीं है, बल्कि भाभी के पास रखी उस चीज का प्रतीक है, जिसे ननद मजाक-मजाक में अपने नेग के लिए मांग रही है। घर में भतीजे का जन्म हुआ है, इसलिए ननद अपनी भाभी से कहती है कि अब तो खुशी का मौका है, तिजोरी खोलिए और नेग दीजिए।
लोकगीतों में इस तरह की अतिशयोक्ति आम बात रही है। मांग छोटी हो सकती है, लेकिन उसे गीत में बड़े मजेदार तरीके से पेश किया जाता है। कहीं कंगन मांगा जाता है, कहीं कपड़े या पैसे की मांग होती है और कहीं ननद अपनी भाभी को चिढ़ाते हुए कहती है कि अब तो कुछ देना ही पड़ेगा। सोहर गीतों में बच्चे के जन्म के साथ ननद-भाभी की ऐसी हंसी-ठिठोली के प्रसंग मिलते हैं।
भतीजे के जन्म से क्यों जुड़ा है यह गीत?
सोहर मूल रूप से जन्म की खुशी का गीत है। खासकर उत्तर भारत के कई हिस्सों में बच्चे के जन्म के बाद महिलाएं मिलकर सोहर गाती रही हैं। इन गीतों में नवजात के लिए मंगलकामना, माता-पिता को बधाई और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ हंसी-मजाक शामिल होता है। कई पारंपरिक सोहर में दादा-दादी, चाचा, ननद, भाभी और दूसरे रिश्तेदारों का जिक्र भी मिलता है।
"भाभी खोलो तिजोरी का ताला" भी इसी माहौल की कल्पना करता है। भाभी के घर बेटे का जन्म हुआ है और ननद के लिए यह अपने भाई के परिवार में आई नई खुशी का मौका है। इसलिए वह बधाई देने के साथ-साथ नेग लेने का अधिकार भी जताती है। गीत में मांग करने का तरीका इतना चंचल है कि सुनने वालों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।

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ननद-भाभी के रिश्ते की झलक
भारतीय परिवारों में ननद और भाभी का रिश्ता हमेशा से ही हंसी-मजाक और अपनापन लिए रहा है। भाभी के घर आने के बाद ननद को एक नई सहेली मिल जाती है और ननद भी भाभी को परिवार के दूसरे रिश्तों की तरह ही चिढ़ाने और मनाने का मौका नहीं छोड़ती। लोकगीतों ने इस रिश्ते को बेहद सहज तरीके से सहेजा है।
सोहर में यह रिश्ता और भी खुलकर सामने आता है। बच्चे के जन्म की खुशी में ननद नेग मांगती है, भाभी उसे देने में आनाकानी करती है और फिर दोनों के बीच गीत के जरिए मजेदार बातचीत शुरू हो जाती है। यह कोई वास्तविक झगड़ा नहीं बल्कि रिश्ते में मौजूद अपनापन और अधिकार जताने का लोक अंदाज है। ऐसे गीतों में हंसी-ठिठोली के साथ परिवार की एकजुटता भी दिखाई देती है।
सोहर में नेग की परंपरा भी है खास
बच्चे के जन्म से जुड़े लोकगीतों में नेग का अपना अलग महत्व रहा है। खुशी के मौके पर रिश्तेदारों की ओर से उपहार या पैसे मांगने की परंपरा कई लोकगीतों का हिस्सा बनी। खासकर ननद और भाभी के बीच यह रस्म मजेदार बातचीत का रूप ले लेती है।
एक पारंपरिक सोहर में ननद के कंगन मांगने का प्रसंग मिलता है, जहां परिवार के अलग-अलग सदस्य भाभी को समझाते हैं कि लालन के जन्म की खुशी में कंगन दे देना चाहिए। अंत में ननद को उसका नेग मिल जाता है। यही वजह है कि "तिजोरी का ताला खोलने" जैसी पंक्ति को सिर्फ पैसे मांगने के अर्थ में देखना सही नहीं होगा। यह खुशी, अधिकार और रिश्तों की नटखट बातचीत का प्रतीक है।
आज भी क्यों याद किया जाता है यह लोकगीत?
आज बच्चे के जन्म की खुशियां मनाने का तरीका काफी बदल चुका है। अस्पताल से लेकर सोशल मीडिया तक, उत्सव के नए तरीके सामने आ गए हैं। इसके बावजूद सोहर जैसे लोकगीत लोगों को अपनी पारिवारिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। "भाभी खोलो तिजोरी का ताला" की लोकप्रियता भी इसी बात का संकेत है। इस गीत के अलग-अलग रिकॉर्डेड रूप आज भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं और कई गायकों ने इसे अपने अंदाज में प्रस्तुत किया है।
