काम के बीच बार-बार फोन देखने की आदत कैसे छोड़ें? एक्सपर्ट ने बताए फोकस बढ़ाने के 3 टिप्स
आज के समय में एकाग्र रहने और किसी एक काम पर फोकस बनाए रखने की चुनौती लगातार बढ़ रही है। ...और पढ़ें

कैसे बढ़ाएं अपनी एकाग्रता? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इसमें कोई दोराय नहीं कि हमारी एकाग्रता की अवधि घटती जा रही है। जब हम व्यस्त होते हैं तो भी नोटिफिकेशन से लगातार डायवर्ट होते रहते हैं। यही नहीं जब हम अपने काम से थोड़े देर के लिए रुकते हैं तो बोरियत और अकेलेपन से बचने के लिए स्क्रीन का रुख कर लेते हैं।
दरअसल, डिजिटल भटकाव ही एकाग्रता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। कोई भी काम करते समय स्क्रीन कठिनाई पैदा करती है। कुछ लोग नोटिफिकेशन और फोन को टर्न ऑफ करने के बावजूद ध्यान केंद्रित नहीं रख पाते। विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटे कंटेंट और लगातार स्क्रॉलिंग के चलते हर समय हमारा दिमाग कुछ नया खोजने के लिए उत्सुक रहता है। एकाग्रता के आसान तरीके-
स्टेप 1: जानें अपनी एकाग्रता की स्थिति
फोन कितनी बार प्रयोग करते हैं और इससे कितना ध्यान भटकता है। लोग इस बात पर गौर नहीं करते। अगली बार जब कोई काम करें तो कितनी बार ध्यान भंग हो रहा है। और कौन सी चीज विचलित कर रही है, इसका लेखा-जोखा रखें। इसको पहले हर घंटे और फिर पूरे दिन के लिए आजमा सकते हैं। अगर इसे मैनेज कर सकते हैं तो इस प्रक्रिया को पूरे सप्ताह के लिए कर सकते हैं। अंत में एक आंकड़ा मिल जाएगा कि आप कितनी बार भटकते हैं, इसमें क्या बाघक है और किस स्थिति में आपकी एकाग्रता सबसे बेहतर होती है।
स्टेप - 2 : भटकाव को कम करें
एकाग्रता बनाए रखने के लिए इंटरनेट मीडिया और मोबाइल आदि से दूरी बना सकते हैं। अगर आपको लगता है कि ये तरीके उपयोगी नहीं हैं तो आप छोटे बदलाव से शुरुआत कर सकते हैं।
खबरें और भी
- प्रतिरोध जोड़ें: आप फोन से फेशियल और फिंगरप्रिंट रिकग्निशन हटाने और फोन को दूसरे पॉकेट में रखने जैसे उपाय कर सकते हैं। एक अध्ययन बताता है कि फोन का 90 प्रतिशत इस्तेमाल करने का कारण यूजर खुद हैं न कि नोटिफिकेशन। हर सेशन के बाद इंटरनेट मीडिया से लागआउट करने और पासवर्ड के आटोफिल आप्शन को टर्न आफ करने जैसे उपाय प्रभावी साबित होते हैं।
- वास्तविक ब्रेक लें: कई बार फोन चेक करने की इच्छा आदत के कारण होती है। इसका मतलब है कि आपके मस्तिष्क को थोड़े ब्रेक की जरूरत हो सकती है। ब्रेक लेना भटकाव में फंसने से अलग है, क्योंकि यह जानबूझकर, सीमित समय के लिए लिया जाता है। इस दौरान पानी पीना या स्ट्रेचिंग बाल को जैसे काम कर सकते हैं।
- योजना बनाएं: एकाग्रता का ऑडिट करके सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों को उस समय करें, जब एकाग्रता सबसे बेहतर रहती है। ईमेल और अनावश्यक मैसेज में डूबने के बजाय, जो जरूरी है उस पर फोकस करें। एक छोटी सी योजना लिखें, जिसमें यह लिखा हो कि आपने पहले क्या हासिल किया है और अभी क्या करना है। अगर कार्य अधूरा रहेगा तो आपका मस्तिष्क लौटता रहेगा। भले किसी से बात कर रहे हों या फिल्म देख रहे हों।
स्टेप- 3 : लंबी एकाग्रता के लिए प्रशिक्षित हों
एक या दो हफ्ते के बाद एकाग्रता का ऑडिट करें कि क्या बदलाव आया है। फिर भी भटकाव महसूस हो रहा है तो अधिक प्रयास करने की जरूरत है।
- मस्तिष्क को ठहराव के लिए समय दें: विशेषज्ञों के अनुसार एकाग्रता तभी बेहतर हो सकती है, जब मस्तिष्क को उत्तेजना के बाद ब्रेक मिलता रहे। पर्याप्त नींद और तनाव कम करने के अलावा अन्य उपाय भी कर सकते हैं, जैसे स्क्रीन के बिना भोजन करें।
- हेडफोन को घर पर छोड़ें: दौड़ते समय, ग्रासरी लेते समय या अन्य काम करते समय अपने कानों को आवाज के प्रभाव से दूर रखें।
- प्रकृति के साथ समय बिताएं: थोड़ा समय स्थानीय पार्क, पेड़ों से घिरी शांत सड़कों पर बिताएं। एक अध्ययन के अनुसार, 50 मिनट प्रकृति की सैर स्मृति स्कोर में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि करती है।
- ध्यान मांसपेशियों को मजबूत करें: मस्तिष्क को आराम देकर आप एकाग्रता वापस ला सकते हैं। ध्यान प्रशिक्षण या माइंडफुल प्रैक्टिस से एकाग्रता की क्षमता मजबूत कर सकते हैं। पहले एक एंकर चुनें, जिस पर ध्यान केंद्रित करना है, जैसे आपकी सांस, एक कप काफी या कपड़े मोड़ते हुए उसका वजन आदि।
इसके बाद, उस क्षण को ध्यान में रखें, जब आपका दिमाग भटकता है। दोबारा एकाग्रता को एंकर पर वापस लाएं और यह देखें कि आप क्या देखते सुनते या महसूस करते हैं। माइंडफुल एप्स या 10 मिनट चैलेंज का अभ्यास आपको एक आइडिया दे सकता है।
यह भी पढ़ें- बिना फोन के चिड़चिड़ा हो जाता है आपका बच्चा? स्क्रीन डिपेंडेंसी कम करने के लिए अपनाएं 5 टिप्स
यह भी पढ़ें- रोजाना 2 घंटे कम टीवी देखने से 43% तक घट सकता है डिप्रेशन का खतरा, नई रिसर्च में खुलासा
Source:
- New York Times