Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'लोग क्या सोचेंगे' के डर से ऑफिस में नहीं रख पातीं अपनी बात? कॉन्फिडेंट दिखने के लिए अपनाएं ये तरीके

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 11:14 AM (IST)

    ऑफिस मीटिंग में अपनी बात रखने या सवाल पूछने में झिझक महसूस होती है? इस डर को दूर करके आप करियर में बेहतर मौके पा सकती हैं। ...और पढ़ें

    सवाल पूछने में घबराता है दिल? (AI Generated Image)

    सवाल पूछने में घबराता है दिल? (AI Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि अपने ऑफिस के सभी काम आप पूरी जिम्मेदारी और परफेक्शन से पूरा करती हैं, लेकिन मीटिंग में सवाल पूछना या अपनी बात रखनी हो, आपकी जुबान पर ताला लग जाता है? दरअसल, ऐसा कई लोगों के साथ होता है, खासकर महिलाओं के साथ। 

    हालांकि, मन में आए सवाल न पूछ पाना या अपनी बात न रख पाने के कारण जिंदगी के कई बेहतरीन मौके छिन सकते हैं। इसे सोशियोफोबिया या पब्लिक स्पीकिंग का डर कहा जाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आइए जानें ऐसा क्यों होता है और इसे कैसे दूर कर सकते हैं।

    सवाल पूछने में क्यों घबराने लगता है दिल?

    अक्सर लोग इस डर में जीते हैं कि लोग क्या सोचेंगे? इसी डर से कई लोग मीटिंग में कोई भी सवाल पूछने से पहले उसे अपने दिमाग में दोहराते रहते हैं या उसे परफेक्ट करने की कोशिश में उलझे रह जाते हैं और वो सवाल कभी उनकी जुबां पर आ ही नहीं पाता। इस ओवरथिंकिंग और परफेक्शन की चाह में कई लोग अक्सर सवाल पूछने से कतराते हैं।

    चुप रहने की चुकानी पड़ सकती है कीमत

    जब आप मीटिंग में कोई फॉलो-अप सवाल नहीं पूछतीं या अपनी राय नहीं रखतीं, तो इससे सीनियर्स को लग सकता है कि काम में आपकी कोई दिलचस्पी नहीं है या आप स्मार्ट नहीं हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि जो बात आपके मन में आ रही है, वो कोई और पूछ लेता है और सारा क्रेडिट ले जाता है। ऐसे में पछतावा होता है और आप खुद को कोसना शुरू कर देते हैं कि मुझमें इतना कॉन्फिडेंस क्यों नहीं है। इससे आपका स्ट्रेस बढ़ता है और आत्मविश्वास कम होता है

    खबरें और भी

    कैसे करें शुरुआत? 

    सवाल पूछने में झिझक को खत्म करने के लिए आपको कुछ छोटे कदम उठाने की जरूरत है। किसी भी मीटिंग से पहले उसका एजेंडा पढ़ें कि मीटिंग है किस बारे में और थोड़ी रिसर्च करें, ताकि आप बेहतर सवाल पूछ सकें। साथ ही, अगर बोलने से पहले आपको बेचैनी हो रही है, तो तीन-चार बार गहरी सांस लें और खुद को शांत करने की कोशिश करें। 

    शुरुआत आप छोटे सवालों से कर सकते हैं या अगर आप किसी बात पर सहमत हैं, तो सहमति जताना शुरू करें। इससे धीरे-धीरे आपका कॉन्फिडेंस बूस्ट होगा। 

    ये ट्रिक्स भी करेंगी कमाल

    कॉन्फिडेंस बूस्ट करने के आप शीशे के सामने खड़े होकर सवाल पूछने की कोशिश करें। इससे आपकी बोलने की आदत बनेगी और सवाल पूछने का तरीका भी बेहतर होगा। साथ ही, जब मीटिंग में सवाल पूछें, तो उन लोगों से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखें, जो आपकी बात का समर्थन कर रहे हैं। शुरुआत में थोड़ी झिझक होगी, लेकिन प्रैक्टिस से सुधार आने लगेगा। 

    परफेक्शन के पीछे न भागें

    गलती होना स्वाभाविक है। आपके सीनियर्स हो या जूनियर, हर किसी से गलती हो सकती है और ये कोई बड़ी बात नहीं है। इसलिए खुद पर परफेक्ट सवाल पूछने का प्रेशर न डालें। अगर कोई छोटी-मोटी गलती हो भी जाए, तो उसे सुधारकर आगे बढ़ें।