सड़क पार करते समय दिखने वाली सफेद-काली धारियों का नाम 'जेब्रा क्रॉसिंग' कैसे पड़ा? यहां जानें असली वजह
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में बढ़ते ट्रैफिक के कारण पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए 'जेब्रा क्रॉसिंग' की शुरुआत हुई थी। आइए, विस्तार से इसकी ...और पढ़ें

'Zebra Crossing' के नाम की पूरी कहानी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सड़क पार करते समय आपने भी न जाने कितनी बार उन सफेद पट्टियों पर कदम रखा होगा, जिन्हें पूरी दुनिया 'जेब्रा क्रॉसिंग' के नाम से जानती है, लेकिन क्या कभी आपके मन में यह सवाल कौंधा है कि गाड़ियों की इस दुनिया में एक अफ्रीकी जानवर की एंट्री कैसे हो गई?
सड़क के एक हिस्से का नाम किसी जानवर के नाम पर होना थोड़ा अजीब नहीं लगता? दरअसल, यह नाम हमारे लिए इतना आम हो चुका है कि हम इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश ही नहीं करते।
आइए, आज आपको बताते हैं इसके नामकरण की वह असल कहानी, जिसका आइडिया किसी बड़े अधिकारी के नहीं, बल्कि आम लोगों के दिमाग की उपज था।

(Image Source: Magnific)
जब ब्रिटेन की सड़कों पर अचानक बढ़ा ट्रैफिक
आज की तरह पहले के जमाने में सड़कें इतनी व्यवस्थित नहीं हुआ करती थीं। जी हां, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की सड़कों पर अचानक से मोटर गाड़ियों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ने लगी।
इस बढ़ते ट्रैफिक को देखकर ब्रिटिश अधिकारियों को एक ऐसे निशान की जरूरत महसूस हुई, जिसे पैदल यात्री सुरक्षित रूप से इस्तेमाल कर सकें और जिसे गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवर दूर से ही झट से पहचान लें।
इस समस्या को सुलझाने के लिए कई तरह के डिजाइनों का परीक्षण किया गया, ताकि कोई ऐसा पैटर्न मिल सके जिसे कोई भी ड्राइवर नजरअंदाज न कर पाए।
इन सफेद पट्टियों का नाम एक जानवर पर क्यों है?
काफी टेस्टिंग के बाद अधिकारियों ने एक ऐसा डिजाइन फाइनल किया जिसमें गहरे रंग की सड़क पर चौड़ी सफेद पट्टियां पेंट की गई थीं।
सबसे मजेदार बात यह है कि इसे शुरुआत में कोई भारी-भरकम तकनीकी नाम नहीं दिया गया था। जब लोगों ने पहली बार सड़क पर इस डिजाइन को देखा, तो उन्होंने तुरंत इसकी तुलना जेब्रा के शरीर पर बनी धारियों से कर दी। यह उपनाम आम जनता के बीच इतना ज्यादा पॉपुलर हो गया कि जब साल 1951 में इसे पूरे यूनाइटेड किंगडम में लागू किया गया, तो सरकार ने भी आधिकारिक तौर पर इसका नाम 'जेब्रा क्रॉसिंग' ही रख दिया।

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दुनिया भर में क्यों मशहूर हुआ यह डिजाइन?
यह साधारण-सा दिखने वाला डिजाइन एक बहुत बड़ी सफलता साबित हुआ। इसके पीछे कई मुख्य कारण थे:
- दूर से दिखने वाला पैटर्न: काले और सफेद रंग के कड़े कंट्रास्ट की वजह से एक ऐसा विज़ुअल पैटर्न तैयार हुआ, जिसे मोटर चालक काफी दूर से ही देखकर समझ जाते थे कि आगे पैदल चलने वालों का रास्ता है।
- बनाने में आसान और सस्ता: इस डिजाइन को किसी भी शहर या गांव की सड़क पर पेंट करना बेहद आसान और कम खर्चीला था।
ब्रिटेन में मिली सफलता के बाद, जैसे-जैसे अन्य देशों ने अपने रोड नेटवर्क को आधुनिक बनाना शुरू किया, उन्होंने भी इस सस्ते और असरदार डिजाइन को अपना लिया। आज यह पूरी दुनिया में पैदल यात्रियों की प्राथमिकता और सुरक्षा का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है।
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जेब्रा क्रॉसिंग को सुरक्षित बनाता है 'बेलिशा बीकन'
जेब्रा क्रॉसिंग से जुड़ा एक और दिलचस्प फैक्ट है, जिस पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। दरअसल, यूनाइटेड किंगडम में पारंपरिक जेब्रा क्रॉसिंग के किनारों पर काले और सफेद रंग के खंभे लगे होते हैं, जिनके ऊपर चमकने वाली पीली लाइटें होती हैं। इन लाइटों को 'बेलिशा बीकन' कहा जाता है।
बता दें, इनका नाम ब्रिटेन के तत्कालीन ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लेस्ली होरे-बेलिशा के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अहम सुधार किए थे। इन लाइटों का मुख्य काम खराब मौसम या रात के अंधेरे में जेब्रा क्रॉसिंग को दूर से ही विजिबल बनाना है।
हालांकि, आज दुनिया के कई देश अपनी स्थानीय ट्रैफिक व्यवस्था के अनुसार, इन चमकती लाइटों के बिना भी सिर्फ सफेद पट्टियों वाले डिजाइन का इस्तेमाल करते हैं।
यह बस एक ऐसा नाम था जो देखने में बिल्कुल वैसा ही लगता था, जैसा वह असल में था। आज, सात दशक से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद, यह उन चंद सड़क डिजाइनों में से एक है जिसे दुनिया की हर पीढ़ी और संस्कृति के लोग बिना किसी झिझक के तुरंत पहचान लेते हैं।