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पहले टहनियां चबाते थे, फिर आए सूअर के बाल और अब नायलॉन ब्रिसल्स; कुछ ऐसा रहा है टूथब्रश का इतिहास

Published: Tue, 11 Aug 2026 09:18 AM (IST)

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस टूथब्रश और टूथपेस्ट का हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं, वे आए कहां से?

5000 साल पहले से चली आ रही है दांत साफ करने की कहानी (Image Source: AI-Generated)

5000 साल पहले से चली आ रही है दांत साफ करने की कहानी (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम अपने दांतों को चमकाने और उन्हें सफेद रखने के लिए आज कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब आज जैसे आधुनिक रंग-बिरंगे टूथब्रश और मिंट वाले टूथपेस्ट नहीं थे, तब लोग क्या करते थे?

बता दें, दांतों की सफाई का यह दिलचस्प इतिहास कुछ सौ सालों का नहीं, बल्कि हजारों साल पुराना है। आइए, जानते हैं कि आज इस्तेमाल होने वाले टूथब्रश की शुरुआत आखिर कैसे हुई थी।

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(Image Source: AI-Generated) 

5000 साल पहले कैसे साफ होते थे दांत?

अगर आपको लगता है कि टूथब्रश आधुनिक युग की देन है, तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसकी जड़ें 3500-3000 ईसा पूर्व तक जाती हैं। उस दौर में बेबीलोन और मिस्र के निवासी पेड़ों की टहनियों के सिरों को चबाकर उन्हें ब्रश की तरह इस्तेमाल करते थे। यह बात कितनी अहम थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्राचीन मिस्र की कब्रों में मृतकों के साथ इन 'टूथ स्टिक्स' को भी दफनाया गया था। इसके कुछ समय बाद, लगभग 1600 ईसा पूर्व में, चीन के लोगों ने खुशबूदार पेड़ों की टहनियों से 'च्युइंग स्टिक्स' बनाईं, ताकि सांसों की बदबू दूर की जा सके।

कैसे बनाया गया था दुनिया का सबसे पहला टूथब्रश?

सही मायनों में दुनिया का पहला ब्रिसल टूथब्रश 15वीं शताब्दी में चीन में बना था। इसे बनाने के लिए सूअर की गर्दन के कड़े बालों को जानवरों की हड्डी या बांस के हैंडल पर लगाया जाता था। जब यह अनोखा आविष्कार चीन से निकलकर यूरोप पहुंचा, तो वहां के लोगों ने इसे अपने तरीके से ढाला। यूरोपीय लोगों को सूअर के बाल बहुत सख्त लगते थे, इसलिए उन्होंने इसकी जगह घोड़ों के मुलायम बालों और यहां तक कि पक्षियों के पंखों का भी इस्तेमाल किया।

जानवरों की हड्डी से नायलॉन तक का सफर

आज हम जो टूथब्रश देखते हैं, उसकी शुरुआती झलक 1780 के आसपास इंग्लैंड में विलियम एडिस द्वारा बनाए गए ब्रश में मिलती है। उन्होंने मवेशियों की हड्डी से एक हैंडल तैयार किया और उसमें सूअर के बाल लगाए। इसके बाद 1844 में एक नया बदलाव आया और पहली बार तीन पंक्तियों वाले ब्रिसल्स का डिजाइन सामने आया।

टूथब्रश के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ 1938 में आया, जब 'ड्यूपॉन्ट' कंपनी ने नायलॉन का आविष्कार किया। इसी के साथ सही मायने में आधुनिक टूथब्रश का जन्म हुआ। लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए 1950 के दशक तक नायलॉन के और भी मुलायम ब्रिसल्स बाजार में आ गए।

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(Image Source: Magnific) 

कब हुई इलेक्ट्रिक टूथब्रश की शुरुआत?

तकनीक के साथ कदम मिलाते हुए 1939 में दुनिया का पहला इलेक्ट्रिक टूथब्रश बनाया गया। वहीं, अमेरिका में 1960 के दशक में 'ब्रॉक्सोडेंट' के नाम से पहला इलेक्ट्रिक टूथब्रश लॉन्च हुआ। आज हमारे पास अलग-अलग आकार, रंग और सिंथेटिक ब्रिसल्स वाले अनगिनत मैनुअल और इलेक्ट्रिक टूथब्रश मौजूद हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इसका मूल विज्ञान आज भी मिस्र और बेबीलोन के समय जैसा ही है- पकड़ने के लिए एक हैंडल और दांत साफ करने के लिए ब्रिसल्स।

टूथब्रश से सदियों पहले बन गया था टूथपेस्ट

क्या आप जानते हैं कि टूथपेस्ट का आविष्कार टूथब्रश से भी पहले हो गया था? जी हां, लगभग 5000 ईसा पूर्व में ही मिस्र के लोगों ने दांत साफ करने के लिए एक प्रकार के पेस्ट का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इसके बाद 500 ईसा पूर्व के आसपास चीन और भारत में भी इसका इस्तेमाल होने लगा। प्राचीन यूनान और रोम के लोग भी अपने दांतों को चमकाने के लिए खास तरह के मिश्रण बनाते थे।

कैसा होता था प्राचीन काल का टूथपेस्ट?

प्राचीन समय में भी टूथपेस्ट का मकसद वही था जो आज है। यानी दांतों को सफेद करना, मसूड़ों को साफ रखना और सांसों को ताजा बनाना, लेकिन इसे बनाने की सामग्री आज के मुकाबले बेहद अजीब थी:

  • मिस्र: यहां के लोग बैल के खुरों की राख, जले हुए अंडे के छिलके और प्यूमिस पत्थर को मिलाकर पेस्ट बनाते थे।
  • यूनान और रोम: ये लोग दांतों की ज्यादा गहरी सफाई चाहते थे, इसलिए वे अपने पेस्ट में कुचली हुई हड्डियां और सीपियां मिलाते थे। सांसों की बदबू दूर करने के लिए रोमन लोग इसमें पेड़ों की छाल, स्वाद बढ़ाने वाली चीजें और पिसा हुआ चारकोल भी डालते थे।
  • चीन: चीनी लोग समय के साथ अपने पेस्ट में जिनसेंग, हर्बल पुदीना और नमक जैसी चीजों का इस्तेमाल करते रहे।

(Image Source: Magnific) 

दांतों को चमकाने वाले टूथपेस्ट में कब-क्या बदला?

1800 के दशक तक आते-आते टूथपेस्ट ने एक नया रूप लेना शुरू किया। इस समय के शुरुआती उत्पादों में साबुन का इस्तेमाल होता था। इंग्लैंड में टूथपेस्ट के अंदर सुपारी मिलाई जाने लगी और 1860 के दशक में घरों में चारकोल पीसकर पेस्ट बनाने का जिक्र भी मिलता है। 1850 के दशक में इसमें चॉक मिलाया गया। आपको बता दें कि 1850 से पहले तक टूथपेस्ट मुख्य रूप से 'पाउडर' के रूप में ही मिलता था।

1850 के दशक में एक बड़ा बदलाव तब आया जब जार पैक 'क्रेम डेंटिफ्राइस' नाम का नया टूथपेस्ट बाजार में आया। इसके बाद 1873 में कोलगेट ने बड़े पैमाने पर जार वाले टूथपेस्ट का उत्पादन शुरू किया, लेकिन असली क्रांति 1890 के दशक में आई, जब कोलगेट ने दुनिया के सामने टूथपेस्ट को 'ट्यूब' में पेश किया। यह आईडिया इतना सफल हुआ कि आज पूरी दुनिया इसी का इस्तेमाल करती है।

बता दें, दांतों को सड़न से बचाने के लिए 1914 में पहली बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट पेश किया गया। 1945 तक टूथपेस्ट में झाग के लिए साबुन ही डाला जाता था, लेकिन बाद में इसे हटाकर 'सोडियम लॉरिल सल्फेट' जैसे रसायनों का इस्तेमाल शुरू हुआ, जिससे पेस्ट ज्यादा स्मूद और बेहतर बन सका।

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