सोचते हैं गमले में नहीं उगेगी स्ट्रॉबेरी? सही मिट्टी और खाद का ये 'सीक्रेट' देगा बंपर पैदावार
घर पर गमले में स्ट्रॉबेरी उगाना बेहद आसान है, बस आपको सही मिट्टी, खाद और देखभाल के कुछ जरूरी तरीके पता होने चाहिए। ...और पढ़ें

घर के गमले में उगाएं लाल-रसीली स्ट्रॉबेरी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर जब हम बाजार में लाल और रसीली स्ट्रॉबेरी देखते हैं, तो मन में यही खयाल आता है कि इसे तो सिर्फ ठंडी जगहों या बड़े खेतों में ही उगाया जा सकता है। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो यह आर्टिकल खास आपके लिए ही है।
सच तो यह है कि आप अपने घर की छत या बालकनी में रखे एक छोटे से गमले में भी ढेर सारी स्ट्रॉबेरी उगा सकते हैं। बस जरूरत है तो मिट्टी और खाद के सही 'सीक्रेट' को जानने की।

(Image Source: AI-Generated)
कैसा हो गमला और कैसी हो मिट्टी?
स्ट्रॉबेरी के पौधे की जड़ें ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए इसके लिए 8 से 10 इंच गहरा और चौड़े मुंह वाला गमला सबसे अच्छा रहता है। गमले में पानी निकलने के लिए एक छेद जरूर होना चाहिए। स्ट्रॉबेरी को भुरभुरी मिट्टी बहुत पसंद है।
इसका परफेक्ट मिक्सचर बनाने के लिए 50% साधारण मिट्टी, 30% केंचुआ खाद या पुरानी गोबर की खाद, और 20% कोकोपीट मिला लें। यह मिट्टी जड़ों को सांस लेने में मदद करती है और पानी को टिकने नहीं देती।
धूप और पानी का रखें खास ख्याल
स्ट्रॉबेरी को सर्दियों की हल्की धूप बहुत पसंद होती है। इसलिए अपने गमले को ऐसी जगह रखें जहां उसे दिन में कम से कम 6-7 घंटे की अच्छी धूप मिल सके। जहां तक पानी का सवाल है, तो इसे तभी पानी दें जब गमले के ऊपर की मिट्टी सूखी लगे। ज्यादा पानी देने से पौधे की जड़ें और फल दोनों सड़ सकते हैं।
बंपर पैदावार देने वाला खाद का 'सीक्रेट'
अब आते हैं सबसे जरूरी हिस्से पर। स्ट्रॉबेरी के पौधे में जब फूल आने लगें, तब उसे एक्स्ट्रा ताकत की जरूरत होती है। इसके लिए आपको 'सरसों की खली' का लिक्विड फर्टिलाइजर इस्तेमाल करना है। 100 ग्राम सरसों की खली को एक लीटर पानी में 3-4 दिन तक भिगोकर रखें। फिर इसमें 10 लीटर सादा पानी मिलाकर हर 15 दिन में एक बार पौधे में डालें। इसके अलावा, केले के छिलके का पानी डालने से फलों का साइज बड़ा होता है और रंग एकदम लाल आता है।
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इस बात का रखें ध्यान
जब स्ट्रॉबेरी के फल आने लगें, तो इस बात का ध्यान रखें कि फल सीधे मिट्टी को न छुएं, वरना वे सड़ने लगेंगे। इसके लिए आप पौधे की जड़ों के आस-पास सूखी घास, नारियल के छिलके या कोकोपीट बिछा सकते हैं। इस तरीके को 'मल्चिंग' कहते हैं।