ऑफिस या घर में हो जाए कहासुनी, तो ऐसे करें गुस्से पर कंट्रोल; नहीं बिगड़ेगी बात
गुस्सा आना नॉर्मल है, लेकिन उस 'हीट ऑफ द मोमेंट' में हमारे मुंह से निकले कड़वे शब्द अक्सर ऐसे घाव दे जाते हैं जिन्हें भरना बहुत मुश्किल होता है। ...और पढ़ें

गुस्से को काबू करने और शांत रहने का 'सीक्रेट फॉर्मूला' (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। चाहे वह घर पर परिवार के सदस्यों के साथ हो या ऑफिस में बॉस और कलीग्स के साथ, कभी-कभी विचारों का न मिलना कहासुनी का कारण बन ही जाता है।
हालांकि, असली समस्या तब शुरू होती है जब हम गुस्से में अपना आपा खो देते हैं। आगबबूला होकर हम अक्सर कुछ ऐसा कह या कर बैठते हैं, जिसका पछतावा हमें बाद में होता है और तब तक रिश्ते या माहौल काफी खराब हो चुका होता है। अगर आप भी ऐसी स्थिति से बचना चाहते हैं, तो अगली बार गुस्सा आने पर इन आसान और असरदार तरीकों को अपनाकर देख सकते हैं।

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गहरी सांस लें
जब भी आपको लगे कि बहस बढ़ रही है और आपका गुस्सा काबू से बाहर हो रहा है, तो तुरंत कुछ सेकंड के लिए रुक जाएं। अपनी आंखें हल्की-सी बंद करें और 5 से 10 बार गहरी सांस लें। ऐसा करने से आपके दिमाग को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, जिससे आपका नर्वस सिस्टम तुरंत शांत होने लगता है।
कुछ देर के लिए उस जगह से हट जाएं
जब माहौल बहुत ज्यादा गर्म हो जाए, तो वहां खड़े रहकर लगातार उलझने से बात और बिगड़ेगी। ऐसे में बेहतर है कि आप कुछ देर के लिए उस जगह से हट जाएं। आप बाहर जाकर थोड़ा टहल सकते हैं या बस मुंह धोने के लिए वॉशरूम जा सकते हैं। जब आपका दिमाग पूरी तरह शांत हो जाए, तब वापस आकर उस विषय पर आराम से बात करें।
एक गिलास ठंडा पानी पिएं
हमारे बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि गुस्से में पानी पीना चाहिए, और विज्ञान भी इसे मानता है। गुस्से में हमारे शरीर का तापमान और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। ऐसे में, एक गिलास ठंडा पानी पीने से शरीर रिलैक्स होता है और आपको रिएक्शन देने से पहले सोचने का थोड़ा समय मिल जाता है।
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जुबान खोलने से पहले उल्टी गिनती गिनें
गुस्से में हमारी जुबान हमारे दिमाग से ज्यादा तेज चलती है। हम बिना सोचे-समझे ऐसे शब्द बोल जाते हैं जो सामने वाले को गहरी चोट पहुंचा सकते हैं। इसलिए, कुछ भी बोलने से पहले मन ही मन 10 से 1 तक उल्टी गिनती गिनें। यह छोटा सा ब्रेक आपको यह सोचने का मौका देगा कि आपकी बातों का क्या परिणाम होगा।
"तुम" की जगह "मैं" का इस्तेमाल करें
बहस के दौरान हम अक्सर उंगली उठाकर कहते हैं, "तुमने ऐसा किया" या "यह सब तुम्हारी गलती है।" इससे सामने वाला और ज्यादा भड़क जाता है। इसकी जगह अपनी भावनाओं को व्यक्त करें। उदाहरण के लिए, यह कहने के बजाय कि "तुम हमेशा काम लेट करते हो," आप कह सकते हैं, "जब काम समय पर पूरा नहीं होता, तो मुझे बहुत स्ट्रेस महसूस होता है।" इससे बात सुलझने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
याद रखिए, गुस्सा एक ऐसे तूफान की तरह है जिसके गुजर जाने के बाद ही पता चलता है कि कितना नुकसान हुआ है। चाहे घर हो या ऑफिस, हमारे रिश्ते और हमारा करियर बहुत अनमोल होते हैं। इसलिए, थोड़ा धैर्य रखें और अपने गुस्से को अपना दुश्मन न बनने दें।