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    पक्षियों की बीट बेचकर रातों-रात अमीर बना था ये देश, फिर यही दौलत बन गई कंगाली की वजह

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 12:53 PM (GMT+05:30)

    सोना और तेल बेचकर अमीर बने देशों की कहानी तो लगभग सभी लोग जाते होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे देश के बारे में सुना है, जो पक्षियों की बीट बेचकर अमीर ब ...और पढ़ें

    पक्षियों की बीट से मिली दौलत कैसे बनी बर्बादी का कारण (Picture Credit- AI Generated)

    पक्षियों की बीट से मिली दौलत कैसे बनी बर्बादी का कारण (Picture Credit- AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर ऐसा माना जाता है कि जिन देशों के पास सोना या कच्चा तेल हैं, वह दुनिया में सबसे अमीर हैं। लेकिन अगर हम आपसे यह कहें कि दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जो कभी पक्षियों की बीट की वजह से अमीर हुआ था, तो क्या आप यकीन करेंगे। यह एक ऐसा देश है, जिसका क्षेत्रफल सिर्फ 21 वर्ग किलोमीटर है और आबादी किसी आम कस्बे से भी कम।

    हम बात कर रहे हैं प्रशांत महासागर के बीचों-बीच बसे नाउरू देश की, जो देखने में किसी अमीर देश जैसा तो बिल्कुल भी नहीं लगता है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक समय ऐसा भी था, जब यह दुनिया के सबसे अमीर देशों में गिना जाता था। खास बात यह है कि उनकी इस अमीरी का कारण सोना-चांदी या कच्चा तेल नहीं, बल्कि सदियों तक जमा हुई पक्षियों की बीट थी। आइए जानते हैं नाउरू के इस हैरान करने वाले इतिहास के बारे में- 

    खजाना साबित हुई पक्षियों की बीट

    यह सुनने में भले ही अबीज लगे, लेकिन असल में बिल्कुल सच है। दरअसल, महासागर के बीच बसे इस द्वीप पर हजारों सालों तक समुद्री पक्षियों ने अपना डेरा जमाया हुआ था। इसकी वजह से यहां उनकी बीट यानी मल जमा होने लगा, जो समय के साथ जमीन के नीचे दबकर बेशकीमती 'फॉस्फेट' में बदल गई। 

    उस समय में खेती की दुनिया में फॉस्फेट से बनी खाद की मांग बहुत ज्यादा मांग थी। ऐसे में 1970 के दशक में, जब नाउरू ने अपनी आजादी के बाद इस फॉस्फेट की खुदाई और फिर इसका निर्यात शुरू किया, तो वहां तो मानो पैसों की बारिश होने लगी।

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    रातों-रात अमीर हो गए लोग

    पक्षी की बीट बेचने का अंजाम यह हुआ कि यहां की आबादी बहुत कम थी और आमदनी बेहिसाब। इसकी वजह से नाउरू के लोग रातों-रात दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल हो गए। बीट बेचकर मिले पैसों से सरकार ने विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदी और भविष्य के लिए खूब पैसा जमा किया। ऐसा लगने लगा मानो इस छोटे से द्वीप ने हमेशा के लिए अपना भविष्य सुरक्षित कर लिया हो।

    बस चार दिन की मिली चांदनी

    वो कहते हैं न चार दिन चांदनी और फिर अंधेरी रात, नाउरू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। अचानक मिली यह दौलत ज्यादा दिनों तक उनके पास टिक न सकी। द्वीप पर फॉस्फेट के भंडार बेहद सीमित थे। ऐसे में बहुत ज्यादा खुदाई की वजह से न सिर्फ यहां कि अर्थव्यवस्था को कमजोर हो गई, बल्कि नाउरू का पर्यावरण भी पूरी तरह से बर्बाद होने लगा।। कभी हरा-भरा रहने वाला यह द्वीप अब सिर्फ ऊबड़-खाबड़ चूना-पत्थर की खदान बन चुका था। यहां की जमीन बंजर हो गई, जो खेती या घर बनाने लायक भी नहीं बची।

    बिगड़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए नाउरू की सरकार ने बिना सोचे-समझे निवेश करने शुरू कर दिए। हद तो तब हो गई, जब उन्होंने उन्होंने लंदन में लियोनार्डो दा विंची पर आधारित एक फ्लॉप थिएटर शो में भी पैसा लगा दिया। इस फैसले की वजह से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। लगातार खराब फैसलों और भ्रष्टाचार के कारण जल्द ही सरकार कर्ज में डूब गई, और 2000 के दशक की शुरुआत तक नाउरू की खुशहाली एक बुरे सपने में बदल चुकी थी।

    जमीन छोड़ समुद्र का किया रुख

    जब जमीन ने यहां के लोगों का साथ छोड़ दिया, तो नाउरू ने समुद्र का रुख किया। उनके विशेष आर्थिक क्षेत्र में टूना मछली का बड़ा भंडार है। ऐसे में अपनी लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए इस देश ने विदेशी कंपनियों को मछली पकड़ने के लाइसेंस बेचकर फिर से कमाई शुरू की। 

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