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फिल्मी गानों से बिल्कुल अलग है यूपी का असली संगीत, सीधे दिल में उतर जाएंगे रसिया और कजरी जैसे लोकगीत

Updated: Tue, 01 Sep 2026 11:39 AM (IST)

उत्तर प्रदेश का लोक संगीत फिल्मों में दिखाए गानों से काफी अलग है। इन गीतों में यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृति बयां होती है।

उत्तर प्रदेश का मजेदार लोक संगीत (AI Generated Image)

उत्तर प्रदेश का मजेदार लोक संगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संगीत की बात करें, तो कई सुपरहिट गाने दिमाग में आते हैं। इस राज्य के लोक संगीत की खासियत ही यही है कि हर क्षेत्र में कुछ अलग सुनने को मिलता है। अवध, ब्रज, बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों के अपने लोकगीत हैं और अपनी शैलियां हैं। 

यहीं वजह है कि यूपी की असली संस्कृति वहां के लोक संगीतों से पता चलती है। यहां हर मौसम और जिंदगी के हर पड़ाव के लिए एक गीत मिल जाएगा। आइए जानें उत्तर प्रदेश को लोक संगीत के बारे में, जो इस राज्य की संस्कृति को इतना खास बनाते हैं।  

बिरहा

बिरहा यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र के सबसे मशहूर लोक संगीत में से एक है। इसे भोजपुरी में गाया जाता है और इसमें प्रेमी-प्रेमिका के विरह की कहानी बयां की जाती है। इन गीतों में सामाजिक मुद्दों को भी उठाया जाता है। ढोलक और मंजीरे की धुन पर ये गीत गाए जाते हैं। 

रसिया और होरी

ब्रज क्षेत्र में होली के समय रसिया और होरी की गूंज चारों ओर सुनाई देती है। ये गीत राधा-कृष्ण के प्रेम और होली के त्योहार के उल्लास पर बने होते हैं। इन गीतों में राधा-कृष्ण के होली खेलने के प्रसंग गाए जाते हैं। चंग और ढोलक की थाप पर इन गीतों को समूह में गाया जाता है। ये गीत समां बांध देते हैं।  

कजरी

मिर्जापुर और वाराणसी के क्षेत्रों में बारिश के मौसम में कजरी की गूंज सुनाई देती है। इन गीतों में वर्षा ऋतु की सुंदरता, परदेस गए पति की याद में पत्नी के वियोग का दर्द और प्रेमी-प्रेमिका के प्रेम का वर्णन किया जाता है। 

आल्हा

बुंदेलखंड में आल्हा खूब गाया जाता है। इन गीतों में आल्हा और ऊदल की वीरता की कहानियां गाई जाती हैं। इनके जीवन से जुड़ी बहादुरी की कहानियों पर ये गीत आधारित होते हैं, जिन्हें लोग ऊंची आवाज में गाते हैं। 

सोहर और बधाई

सोहर और बधाई संस्कार गीत होते हैं, जो पूरे प्रदेश में गाए जाते हैं। सोहर के गीतों को बच्चे के जन्म पर गाया जाता है। इन गीतों में नवजात के लिए प्रेम और आशीर्वाद छिपा होता है। वहीं, बधाई शुभ अवसरों पर गाई जाती है।

क्यों इतना खास है उत्तर प्रदेश का संगीत?

उत्तर प्रदेश का संगीत मौसम के बदलावों से जुड़े होते हैं, जैसे- सावन में कजरी, बसंत में फाग और सर्दी की रातों में बिरहा गाया जाता है। यहां के लोक संगीत में लोगों के रोजमर्रा के जीवन के संघर्ष को भी दर्शाया जाता है। साथ ही, परिवार के रिश्ते, जैसे ननद-भाभी, सास-बहू, पति-पत्नी और देवर-भाभी के रिश्तों का भी बहुत खूबसूरत वर्णन मिलता है। 

इन गीतों की एक और खासियत ये भी है कि ये एक पीढ़ी से सुनकर दूसरी पीढ़ी में आगे बढ़ते हैं। इन गीतों में स्थानीय बोलियों का इस्तेमाल होता है, जिसके कारण लोगों को इन गीतों से गहरा जुड़ाव महसूस होता है।