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    'तार बिजली से पतले हमारे पिया...' कैसे बिहार के गांवों का एक ठेठ लोकगीत बना 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की जान

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 12:25 PM (IST)

    बिहार कला और संस्कृति का एक अनूठा मेल है, जहां के लोकगीत आज भी यहां की परंपरा का दर्शाते हैं। ऐसे में एक लोकगीत "तार बिजली से पतले हमारे पिया" है, जिस ...और पढ़ें

    बिहार की मिट्टी से जुड़ी 'तार बिजली से पतले हमारे पिया' की पूरी कहानी (Picture Credit- AI Generated)

    बिहार की मिट्टी से जुड़ी 'तार बिजली से पतले हमारे पिया' की पूरी कहानी (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. "तार बिजली से पतले हमारे पिया" बिहार का अनोखा लोकगीत

    2. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में शामिल होकर मिली राष्ट्रीय पहचान

    3. विवाह में दूल्हे को चिढ़ाने वाला हास्यपूर्ण गीत है यह

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अपनी दमदार राजनीति के लिए मशहूर बिहार अपनी कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां कई ऐसे लोकगीत है, जो इस राज्य की परंपरा और रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। इन्हीं लोकगीतों में शादी-ब्याह में गाए जाने वाले गीत भी शामिल हैं। 

    हमारे यहां शादियों के दौरान कई तरह के लोकगीत गाए जाते हैं। खासकर ऐसे गीत जिनमें दूल्हे राजा और उनके दोस्तों की जमकर खिंचाई की जाती हो। ऐसा ही एक बेहद अनोखा, चुलबुला और गुदगुदाने वाला लोकगीत है- "तार बिजली से पतले हमारे पिया"। 

    इस गीत को सुनकर अगर आपको मनोज वायजेपी और नवाजुद्दीन सिद्दकी की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर याद आ गई है, तो थोड़ा रुक जाइए। इस लोकगीत की कहानी इस फिल्म में आने से काफी पुरानी है। तो चलिए आज आपको बताते हैं इस गीत की पूरी कहानी- 

    बिहार की मिट्टी से जुड़ी हैं जड़े

    इस गीत के बोल सुनते की चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। आज भले ही यह गाना पूरे देश तक पहुंच चुका है, लेकिन इसकी असली जड़े बिहार के गांवों की सोंधी मिट्टी और पुरानी लोक-परंपराओं में रची-बसी है। जी हां, इस बेहद लोकप्रिय लोकगीत का सीधा नाता भारत के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य बिहार से है। बिहार की धरती अपने पारंपरिक त्योहारों और लोक-कलाओं के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। 

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    यह विशेष गीत बिहार के ग्रामीण इलाकों की एक अनमोल धरोहर है, जो यहां के मुख्य भाषाई क्षेत्रों जैसे कि भोजपुरी, मैथिली और मगही बोलने वाले लोगों द्वारा पीढ़ियों से गुनगुनाया जाता रहा है। असल में यह गीत एक नकटा है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं शादी जैसे शुभ मौके पर इस पारंपरिक धुन को गाकर खुशियों का इजहार और हंसी-ठिठोली करती हैं।

    हंसी-मजाक से भरपूर विवाह गीत 

    यह गीत मुख्य रूप से दो खूबसूरत शैलियों से मिलकर बना है- 'विवाह गीत' और 'हास्य लोकगीत'। पारंपरिक तौर पर, बिहार में शादियों के दौरान दुल्हन पक्ष की सखियां और बुजुर्ग महिलाएं मिलकर दूल्हे को चिढ़ाने और माहौल को हल्का-फुल्का बनाने के लिए इस तरह के व्यंग्यात्मक गाने गाती हैं। इस गाने के बोल में नए-नवेले दूल्हे के दुबले-पतले शरीर का बहुत ही मजाकिया ढंग से बताया जाता है।

    सिनेमा के पर्दे पर लोकगीत का जलवा

    सिर्फ गांवों के घरों और शादी के पंडालों तक सीमित रहने वाले इस पारंपरिक लोकगीत को साल 2012 में एक नया और बहुत बड़ा मंच मिला। बॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर-2' में इस गाने को बेहद खूबसूरती से शामिल किया गया, जिसके बाद यह पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया। 

    इस लोकगीत के फिल्मी वर्जन को बिहार के लोक संगीत की सम्राज्ञी, पद्म भूषण शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज से सजाया। मजे की बात यह है कि जहां असल जिंदगी में यह गीत यह शादियों में गाया जाने वाला का चुलबुला गीत है, वहीं फिल्म की कहानी में इसे एक गहरे राजनैतिक और सामाजिक व्यंग्य के रूप में पेश किया गया था।

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