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भोजपुरी गानों से बिल्कुल अलग है, बिहार का डोमकच नृत्य; शादियों में महिलाएं रातभर करती हैं ये डांस

Published: Mon, 31 Aug 2026 01:59 PM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 09:11 AM (IST)

बिहार के मशहूर लोक नृत्यों में डोमकच भी शामिल है, जिसे महिलाएं शादी-ब्याह के मौके पर करती हैं।

बिहार के डोमकच नृत्य की कहानी (AI Generated Image)

बिहार के डोमकच नृत्य की कहानी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के डांस सिर्फ पवन सिंह और खेसाली लाल के गानों में दिखाए डांस तक सीमित नहीं है। यहां की असली संस्कृति यहां के लोक नृत्यों में देखने को मिलती है, जिसमें डोमकच भी शामिल है। यह बिहार का एक मजेदार लोक नृत्य है। 

डोमकच नृत्य की खासियत है कि इसे सिर्फ महिलाएं करती हैं और वो भी शादी-ब्याह के मौकों पर। इस नृत्य की शुरुआत के पीछे दिलचस्प कहानी है, जो इस नृत्य को मजेदार बनाती है। आइए जानें डोमकच नृत्य की शुरुआत कैसे हुई और इसे क्यों किया जाता है।  

कैसे हुई डोमकच की शुरुआत?

डोमकच का इतिहास काफी पुराना है। उस समय चोर-डाकुओं से घर की सुरक्षा करने के लिए महिलाएं बारात में शामिल नहीं होती थीं और रतजगा किया करती थीं। घर में चहल-पहल का एहसास करवाने के लिए महिलाएं रात को गाना-बजाना किया करती थीं और एक-दूसरे के साथ हंसी-मजाक करके जोर-जोर से हंसती थीं। धीरे-धीरे इस सामुहिक हंसी-मजाक और नाटक ने नृत्य का रूप लिया और डोमकच नृत्य की शुरुआत हुई। 

क्यों किया जाता है डोमकच नृत्य?

डोमकच नृत्य के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक कारण भी छिपे होते थे। पुराने समय में महिलाएं बारात में शामिल नहीं हुआ करती थीं। बारात में सिर्फ पुरुष शामिल हुआ करते थे। उस समय चोर-डाकुओं का काफी डर रहता था। इसलिए घर की सुरक्षा के लिए महिलाएं शादी की रात घर पर ही रुका करती थीं। 

रातभर जागकर घर की पहरेदारी करने के लिए महिलाएं साथ मिलकर नृत्य करतीं और गीत गाती थीं। इस नृत्य के जरिए महिलाएं शादी की खुशी मनाती हैं और हंसी-मजाक करती हैं। ये नृत्य आपसी एकता का भी प्रतीक है। मजाकिया गीतों के जरिए महिलाएं एक-दूसरे को छेड़ती हैं और शादीशुदा जीवन की झलक नृत्य के जरिए पेश करती हैं।   

डोमकच नृत्य की खासियतें

पारंपरिक रूप से डोमकच नृत्य सिर्फ महिलाएं करती हैं। घर के आंगन में आस-पास की महिलाएं इकट्ठा होती और साथ मिलकर नृत्य किया करती हैं। डोमकच में सिर्फ नृत्य नहीं होता, बल्कि छोटे-छोटे नाटक भी खेले जाते हैं। महिलाएं पुरुषों के कपड़े पहनकर वर, वधू, सास, जेठ आदि के किरदार निभाती हैं और रिश्तों पर व्यंग्य कसती हैं और मजाक करती हैं। 

डोमचक नृत्य महिलाएं एक-दूसरे का हाथ पकड़कर गोल घेरे में करती हैं। ढोलक, मंजीरा जैसे वाद्य यंत्रों पर  इस नृत्य को किया जाता है। इसके साथ हंसी-मजाक वाले और नए जीवन की शुरुआत से जुड़ी गीत गाए जाते हैं।