बारात जाने के बाद क्यों किया जाता है खोड़िया नृत्य? बहुत खास वजह से हुई थी शुरुआत, पुरुषों की एंट्री भी है बैन
खोड़िया नृत्य हरियाणा की शादियों से जुड़ा एक खास लोक नृत्य है, जिसे बारात जाने के बाद महिलाएं सुरक्षा और मनोरंजन के लिए करती हैं। ...और पढ़ें

हरियाणा का मशहूर खोड़िया नृत्य (AI Generated Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा की संस्कृति की बात करें, तो खोड़िया नृत्य का नाम जुबां पर जरूर आता है। ये लोक नृत्य हरियाणा की शादियों से खास कनेक्शन रखता है। हालांकि, इस नृत्य को सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता। इसके पीछे और भी कई कारण छिपे हैं। आइए जानें हरियाणा के खोड़िया नृत्य के बारे में।
कब किया जाता है खोड़िया नृत्य?
खोड़िया नृत्य आमतौर पर शादी के अवसर पर ही किया जाता है। पुराने समय में जब दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर के लिए निकल जाता था, तब घर पर सिर्फ महिलाएं और छोटे बच्चे ही रह जाते थे। बारात अक्सर अगले दिन सुबह या देर रात को लौटती थी। इसलिए महिलाएं एक साथ दूल्हे के घर इकट्ठा होती थी और रातभर रतजगा करके ये नृत्य करती थीं। इसी तरह खोड़िया नृत्य की शुरुआत हुई।
क्यों किया जाता है खोड़िया नृत्य?
खोड़िया नृत्य का इतिहास गांव की परंपरा और सुरक्षा से जुड़ा है। जब पुरुष बारात में चले जाते थे, तब सूने घर की सुरक्षा बहुच बड़ी चुनौती होती थी। चोरी के डर को दूर करने के लिए महिलाएं एक साथ इकट्ठा होती और रतजगा करते हुए नाच-गाना करती थीं।
इसके अलावा, बारात जब तक दुल्हन के साथ लौटती नहीं थी, तब तक महिलाओं के मनोरंजन के लिए भी रतजगे का कार्यक्रम आयोजित किया जाता था। शुरुआत में सिर्फ ढोलक और गीतों से शुरू हुई ये रतजगा धीरे-धीरे एक लोक नृत्य और नाटक के रूप में विकसित हो गया।
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क्यों इतना खास माना जाता है खोड़िया नृत्य?
खोड़िया नृत्य की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे सिर्फ महिलाएं ही करती हैं। बारात जाने के बाद घर के आंगन में पुरुषों का आना मना हो जाता है, ताकि महिलाएं बिना किसी हिचकिचाहट के खुलकर नाच-गा सकें। ये कोई साधारण नृत्य नहीं होता है। इसमें महिलाएं हरियाणा की पारंपरिक पोशाक, जैसे रंग-बिरंगा दामण, कुर्ती और गोटा लगी ओढ़नी ओढ़ती हैं। इसके साथ पारंपरिक गहने, जैसे बोरला, हंसली, कंगन पहनकर वे अपना शृंगार पूरा करती हैं।
इस नृत्य के दौरान महिलाएं नाटक भी करती हैं। कुछ महिलाएं पुरुषों का भेष लेकर आती हैं और सास-बहू के झगड़े, ननद-भाभी की तकरार और नए शादीशुदा जोड़े के आने वाली जिंदगी पर मजाकिया ढंग में नाटक पेश करती हैं। यह नृत्य मनोरंजन के साथ-साथ नए जोड़े के सुखी जीवन की कामना के लिए भी किया जाता है। ढोलक की थाप और पारंपरिक लोकगीतों पर महिलाएं जमकर नाचती-गाती हैं और जश्न मनाती हैं।