गणगौर पर सिर पर छेद वाला मटका रखकर क्यों नृत्य करती हैं महिलाएं? एक मुगल सेनापति के अंत से जुड़ी है कहानी
गणगौर पर महिलाएं सिर पर छेद वाला मटका रखकर 'घुड़लो घूमेला' गीत पर नृत्य करती हैं। यह परंपरा 15वीं शताब्दी से जुड़ी है। ...और पढ़ें

क्यों गाया जाता है घुड़लो घूमेला जी घूमेला? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थानी लोकसंगीत में एक बहुत मशहूर गीत है घुड़लो घूमेला जी घूमेला। गणगौर के मौके पर महिलाएं सिर पर मटका रखती हैं और ये गीत गाते हुए नृत्य करती हैं।
अब ऐसे में सवाल आता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है, तो आपको बता दें कि इसके पीछे एक मुगल सेनापति और राजपूती शौर्य की कहानी है। आइए जानें राजस्थानी गाने घुड़लो घूमेला जी घूमेला के पीछे की कहानी क्या है और क्यों इसे गणगौर के मौके पर गाया जाता है।
घुड़ले खां के अत्याचार से जुड़ी है कहानी
ये कहानी 15वीं शताब्दी की है, जब मारवाड़ पर राव सातल सिंह राठौड़ का शासन था। उस समय अजमेर के सूबेदार मल्लू खां का सेनापति घुड़ले खां ने मारवाड़ और आस-पास के इलाकों में आतंक मचाया हुआ था। गणगौर पूजा के दिन एक गांव में तालाब के पास महिलाएं गणगौर की पूजा कर रही थीं, तभी घुड़ले खां की नजर उन पर स्त्रियों पर पड़ी और उसने जबरन उनका अपहरण कर लिया।
राजपूती शौर्य और घुड़ले खां का अंत
इस बात की खबर जब राजा सातल सिंह को मिली, तो वो तुरंत अपनी सेना के साथ घुड़ले खां के पीछे निकल पड़ें और दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध में घुड़ले खां की हार हुई और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया।
घुड़ले खां का सिर बना आजादी का प्रतीक
राजा सातल सिंह ने उन बंदी बनाई स्त्रियों को आजाद किया और घुड़ले खां का कटा हुआ सिर उन महिलाओं को सौंप दिया। अपनी विजय और राजा के लिए आभार जाहिर करने के लिए वे महिलाएं घुड़ले खां का कटा हुआ सिर लेकर पूरे गांव में घूमीं और इसी घटना से शुरू हुआ घुड़ला घुमाने का रिवाज। हर साल महिलाएं गणगौर के समय सिर पर एक मटके में दीया जलाकर पूरे गांव में घूमती हैं और नृत्य करती हैं।
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क्यों रखा जाता है सिर पर मटका और दीया?
मिट्टी के मटके को घुड़ले खां के कटे हुए सिर का प्रतीक माना जाता है। इस मटके में कई सारे छेद किए जाते हैं, जो उसकी हार का प्रतीक माने जाते हैं और इस मटके के अंदर रखा दीया बुराई पर अच्छाई की जीत और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं इस मटके को सिर पर रखती हैं और गाती हैं घुड़ले रे बांधो सूत, घुड़लो घूमेला जी घूमेला…।