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    क्या हम वाकई फ्यूचर देख सकते हैं? 'डेजा वू' के दौरान क्यों लगता है सब देखा-देखा, समझें पूरा साइंस

    Updated: Sat, 04 Apr 2026 06:44 PM (IST)

    जब हमें किसी घटना को पहले से अनुभव करने का एहसास होता है, तो इसे 'डेजा वू' कहा जाता है। इसे दिमाग के मेमोरी सिस्टम की एक छोटी सी चूक माना जाता है, जहा ...और पढ़ें

    डेजा वू: क्यों लगता है सब देखा-देखा? जानें इस अनोखे एहसास का पूरा विज्ञान (Picture Credit- Freepik)

    डेजा वू: क्यों लगता है सब देखा-देखा? जानें इस अनोखे एहसास का पूरा विज्ञान (Picture Credit- Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे साथ कई बार कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिसे देखकर ऐसा लगता है, जैसे यह सब पहले भी हो चुका है। कभी ऐसा महसूस हुआ हो कि आप किसी नई जगह पर जाएं और लगे कि आप यहां पहले भी आ चुके हैं? 

    अगर आपको भी ऐसा महसूस हुआ है, तो घबराए नहीं। यह कोई बीमारी या समस्या नहीं, बल्कि एक तरह का साइंस है, जिसे 'डेजा वू' कहते हैं। यह एक फ्रांसीसी शब्द है जिसका मतलब है- पहले देखा हुआ।

    आखिर क्यों होता है यह एहसास?

    साइंटिस्ट के मुताबिक, डेजा वू हमारे दिमाग के मेमोरी सिस्टम में होने वाली एक छोटी-सी चूक या गलती है। आसान भाषा में समझें, तो जब हमारा दिमाग किसी वर्तमान अनुभव को गलती से 'पुरानी याद' समझ लेता है, तो हमें वह पल जाना-पहचाना लगने लगता है।

    डेजा-वू के साइंटिफिक कारण

    • फैक्ट चैकिंग प्रोसेस: एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेजा वू दिमाग के स्वस्थ होने का संकेत है। हमारा दिमाग एक साथ दो काम करता है: एक हिस्सा कहता है कि यह जगह पहचानी हुई है, जबकि दूसरा हिस्सा तुरंत तर्क देता है कि "नहीं, तुम यहां पहली बार आए हो।" इसी टकराव से वह अजीब-सी बेचैनी पैदा होती है।
    • मेमोरी का कंफ्यूजन: कभी-कभी हमारे आस-पास के वातावरण में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो हमारी पुरानी भूली हुई यादों से मिलती-जुलती होती हैं। हमारा सचेत मन उन्हें याद नहीं कर पाता, लेकिन अचेतन मन उन्हें पहचान लेता है।
    • सिग्नल मिलने में देरी: एक सिद्धांत यह भी है कि कभी-कभी दिमाग के पास सूचना पहुंचने में मिलीसेकंड की देरी हो जाती है। ऐसे में दिमाग एक ही जानकारी को दो बार प्राप्त करता है, जिससे हमें लगता है कि हम उस पल को दोबारा जी रहे हैं।

    किन लोगों को ज्यादा महसूस होता है डेजा वू?

    • युवाओं: शोध बताते हैं कि युवाओं में यह अनुभव सबसे ज्यादा होता है और उम्र बढ़ने के साथ कम हो जाता है।
    • थकान और तनाव: जो लोग बहुत ज्यादा थके हुए होते हैं या तनाव में होते हैं, उनका दिमाग ऐसी छोटी गलतियां ज्यादा करता है।
    • ज्यादा यात्रा करने वाले: नए-नए वातावरण का सामना करने वाले लोगों को अक्सर ऐसा अनुभव होना आम हैं।

    पूर्वाभास का भ्रम

    दिलचस्प बात यह है कि डेजा वू के दौरान लोगों को अक्सर ऐसा लगता है कि उन्हें पूर्वाभास यानी पता है कि अगले पल क्या होने वाला है। हालांकि, लैब टेस्ट में यह साबित हुआ है कि यह केवल एक मानसिक भ्रम है और लोग असल में भविष्य नहीं देख रहे पाते हैं।

    जमैस वू (Jamais Vu): डेजा वू का उल्टा

    जहां डेजा वू अनजानी चीज को पुराना बताता है, वहीं 'जमैस वू' में बहुत जानी-पहचानी चीज (जैसे कोई रोज इस्तेमाल होने वाला शब्द या अपना ही कमरा) अचानक बिल्कुल अजनबी लगने लगती है। यह डेजा-वू का बिल्कुल विपरीत होता है।

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    Source:

    Cleveland Clinic