मिसकैरेज के दर्द से गुजर रहे अपनों का कैसे दें साथ? जानें दुख की इस घड़ी में 'क्या कहें और क्या नहीं'
मिसकैरेज या प्रेग्नेंसी लॉस भावनात्मक रूप से भी काफी मुश्किल होता है। इस दौरान उन्हें इमोशनल सपोर्ट देने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। ...और पढ़ें

इस मुश्किल समय में कपल का ऐसे दें साथ (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मिसकैरेज, स्टिलबर्थ या किसी मेडिकल कारण से प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करवाना बेहद दर्दनाक अनुभव है। हालांकि, ये इतने आम हैं कि हो सकता है आपके जान-पहचान या ऑफिस में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा, जिसने यह तकलीफ झेली हो।
अक्सर इस बारे में बात करना काफी अनकम्फर्टेबल लगता है और कई बार लोग समझ भी नहीं पाते कि सामने वाले से क्या कहें। अगर आपके आसपास भी कोई इस मुश्किल दौर से गुजर रहा है, तो कुछ आसान लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप उनकी मदद कर सकते हैं। आइए सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा से जानें कैसे।
अपनी हिचकिचाहट को स्वीकारें
अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि क्या कहें, तो चुप रहने से बेहतर है कि आप अपनी असहजता को स्वीकार कर लें। आप उनसे कह सकते हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं तुमसे क्या कहूं, लेकिन मैं तुम्हारे साथ हूं।
गलत कहने के डर से पूरी तरह चुप हो जाना सामने वाले को चोट पहुंचा सकता है। उसे ऐसा महसूस हो सकता है कि आपको उनकी तकलीफ की परवाह नहीं है। किसी दुख को नजरअंदाज करने से बेहतर है कि आप उनके साथ खड़े रहकर उनके इस मुश्किल समय को एक्सेप्ट करें।
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सॉरी कहना भी काफी है
हम अक्सर किसी भी समस्या का हल ढूंढ़ने निकल जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों को ठीक होने के लिए समय चाहिए होता है। ऐसे में कुछ ठीक करने की कोशिश के बजाय सिर्फ दुख जताना भी काफी होता है। बस इतना कहना भी काफी है कि आपको उनके लॉस के लिए अफसोस है। जो लोग दुख जताते हैं और लगातार साथ बने रहते हैं, ऐसी स्थितियों में वो ही सबसे मददगार साबित हो सकते हैं।
पार्टनर के दर्द को न भूलें
मिसकैरेज या स्टिलबर्थ में अक्सर लोग सिर्फ मां की तरफ ध्यान देते हैं, लेकिन पिता भी उतने ही दर्द में होते हैं। इसलिए पार्टनर से भी सीधे संपर्क करें और उनका हालचाल पूछें। जब लोग पार्टनर की सुध लेते हैं, तो इससे कपल को काफी दिलासा मिलता है और वे हमेशा आपके इस स्टेप को याद रखते हैं।
बिना पूछे मदद के लिए आगे बढ़ें
अक्सर हम कह देते हैं कि कोई जरूरत हो, तो बताना। कई बार सामने वाला हिचक के कारण आपसे मदद नहीं ले पाता। इसलिए यह कहने के बजाय आप खुद फैसला लें और सीधे मदद करें, जैसे उनके लिए एक समय का खाना बना देना, सामान संभालना या घर के कोई काम कर देना। इन छोटे-छोटे कामों से भी सामने वाले व्यक्ति को काफी मदद मिल जाती है।
लगातार कॉन्टेक्ट में रहें
शुरुआत के कुछ दिन सांत्वना देकर सभी अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं, लेकिन पीड़ित लंबे समय तक उस दर्द में रहता है। इसलिए कॉन्टेक्ट बनाए रखना जरूरी है। हर कुछ दिनों पर उनका हाल-चाल पूछें। डिलिवरी डेट या मदर्स डे या फादर्स डे पर उन्हें मैसेज भेजें कि आप अकेले नहीं हैं, हम आपके साथ हैं। ये छोटी-छोटी बातें उनके दर्द पर मरहम बन सकती हैं।
इन बातों को कहने की भूल बिल्कुल न करें
- दोबारा कोशिश करो- ऐसा कहने का मतलब यह मान लेना है कि वे मानसिक रूप से अगली कोशिश के लिए तैयार हैं, जबकि असल में आपको उनकी मानसिक स्थिति का अंदाजा नहीं होता।
- कम से कम से शुरू होने वाले वाक्य- दुख में पॉजिटिव पहलू या सिल्वर लाइनिंग ढूंढने की कोशिश करना उनके दर्द को कम करके आंकने जैसा है।
- हादसे का कोई मतलब निकालना- इस नुकसान के पीछे का मतलब ढूंढना, जैसे सबकुछ अच्छे के लिए होता है जैसी बातें सामने वाले के दुख को और बढ़ा सकता है और यह बातें बहुत इंसेंसिटिव भी होती हैं।
- समस्या को सुलझाने की कोशिश- माता-पिता बनने के हर रास्ते की अपनी चुनौतियां होती हैं, जिनके बारे में पीड़ित व्यक्ति पहले से ही सोच रहा होता है या फिर जानबूझकर नहीं सोचना चाहता। इसलिए उन्हें कोई सॉल्यूशन न दें।