क्यों हमें बचपन का हर लम्हा याद रहता है, मगर पिछले हफ्ते की बात नहीं? समझा रहे हैं साइकेट्रिस्ट
क्या आपने कभी सोचा है कि आपको अपने बचपन का खिलौना या किसी ट्यूशन का पहला दिन तो याद है, लेकिन यह याद नहीं रहता कि तीन दिन पहले डिनर में क्या खाया था? ...और पढ़ें

क्यों हमारा दिमाग बचपन को '4K क्वालिटी' में सहेजता है? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको अपने बचपन का कोई खिलौना या कोचिंग का पहला दिन याद है? अक्सर ऐसा होता है कि हमें कल दोपहर के खाने में क्या खाया था, यह याद नहीं रहता, लेकिन बचपन की छोटी-छोटी बातें बिल्कुल साफ याद रहती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है कि पुरानी यादें ताजा लगती हैं और हाल-फिलहाल की घटनाएं धुंधली पड़ जाती हैं? आइए, डॉ. सामंत दर्शी (निदेशक - मनोचिकित्सक, यथार्थ हॉस्पिटल) से जानते हैं इसके बारे में।

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भावनाओं का गहरा असर
बचपन की यादों के गहरा होने का सबसे बड़ा कारण हमारी 'भावनाएं' हैं। बचपन के कई पल- जैसे स्कूल का पहला दिन, कोई पसंदीदा खिलौना मिलना या परिवार के साथ किसी यात्रा पर जाना- खुशी, डर या उत्साह से भरे होते हैं। हमारा दिमाग उन पलों को बहुत अच्छे से याद रखता है जो हमारी भावनाओं से जुड़े होते हैं, जबकि रोजमर्रा की साधारण घटनाओं को वह उतनी अहमियत नहीं देता।
हर अनुभव होता है नया
जब हम बच्चे होते हैं, तो हमारे लिए दुनिया की लगभग हर चीज नई होती है। पहली बार साइकिल चलाना या पहली बार कोई नई जगह देखना- इन नई चीजों पर हमारा दिमाग ज्यादा ध्यान देता है, जिससे वे यादें साफ तौर पर दर्ज हो जाती हैं। वहीं, बड़ों के रूप में हमारे दिन अक्सर एक जैसे रूटीन में गुजरते हैं, इसलिए हालिया घटनाएं आपस में मिल-जुल जाती हैं और अलग से याद नहीं रहतीं।

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कहानियों का दोहराना
बचपन की यादें इसलिए भी पक्की हो जाती हैं क्योंकि उनका जिक्र बार-बार होता है। परिवार के सदस्य बचपन के किस्से और कहानियां अक्सर सुनाते रहते हैं। जब भी हम किसी घटना को याद करते हैं या उसके बारे में बात करते हैं, वह याद हमारे दिमाग में और भी मजबूत और साफ होती चली जाती है।
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कम तनाव और खुला दिमाग
बच्चों के पास बड़ों की तरह जिम्मेदारियां या चिंताएं नहीं होतीं। एक बच्चे का दिमाग ज्यादा शांत होता है। दूसरी तरफ, वयस्कों को तनाव, कई काम एक साथ करने और नींद की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस 'मानसिक बोझ' के कारण बड़ों के लिए नई और साफ यादें बनाना और उन्हें संजोकर रखना मुश्किल हो जाता है।
दिमाग का अपना फिल्टर
हमारा दिमाग समय के साथ जानकारियों को फिल्टर करता रहता है। वह केवल उन यादों को सुरक्षित रखता है जो हमारे लिए बहुत जरूरी या मायने रखने वाली होती हैं। कम जरूरी और हालिया जानकारी अक्सर जल्दी मिट जाती है, जबकि बचपन की वे खास यादें हमेशा के लिए हमारे साथ रह जाती हैं।
कुल मिलाकर, भावनाओं, नए अनुभवों, बातों के दोहराव और दिमाग के काम करने के तरीके के कारण ही हमारे बचपन की यादें, आज की घटनाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा करीब महसूस होती हैं।
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