बारिश के बाद मिट्टी से क्यों आती है सोंधी खुशबू? कोई जादू नहीं, इसके पीछे है ये दिलचस्प साइंस
बारिश के बाद मिट्टी से आने वाली सोंधी खुशबू को पेट्रीचोर कहते हैं, जिसके पीछे जियोस्मिन और एक्टिनोमाइसेट्स बैक्टीरिया जैसे वैज्ञानिक कारण हैं। ...और पढ़ें

बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी खुशबू क्यों आती है? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बारिश होने के तुरंत बाद मिट्टी से आती सोंधी खुशबू याद है? ये खुशबू बहुत अच्छी लगती है और मन को ताजगी और शांति का एहसास करवाती है। बारिश के बाद मिट्टी से आने वाली इस खुशबू को पेट्रीचोर किया जाता है। इस शब्द का पहली बार ऑस्ट्रेलिया की एक रिसर्चर इसाबेल जॉय बियर ने इस्तेमाल किया था।
अब ऐसे में सवाल आता है कि बारिश होने पर ऐसा क्या होता है कि मिट्टी से इतनी अच्छी सोंधी खुशबू आने लगती है, जबकि सूखे मौसम में ऐसी कोई खुशबू नहीं आती? दरअसल, इसके पीछे साइंस से जुड़ी काफी दिलचस्प वजह है। आइए जानें बारिश के बाद मिट्टी से खुशबू क्यों आने लगती है।
जियोस्मिन और बैक्टीरिया
मिट्टी में एक्टिनोमाइसेट्स नाम के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। सूखे मौसम में ये बैक्टीरिया अपने स्पोर्स को जियोस्मिन नाम के एक ऑर्गेनिक कंपाउंड की तरह रिलीज करते हैं। ये स्पोर्स फूटते हैं, तो इनसे और बैक्टीरिया पनपते हैं। बारिश की बूंदें पड़ते ही ये जियोस्मिन हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं के कारण मिट्टी से सोंधी खुशबू आने लगती है।
पौधों का नेचुरल ऑयल
सूखे हुए मौसम में पौधे अपनी बॉयोलॉजिकल प्रक्रिया से कुछ खास ऑयल रिलीज करते हैं, जो उनके आस-पास की मिट्टी और पत्थरों के बीच जमा होने लगते हैं। बारिश होने पर ये मिट्टी के पानी के जरिए हवा में मिलते हैं और चारों ओर फैल जाते हैं। मिट्टी की सोंधी खुशबू के लिए ये भी जिम्मेदार हैं।
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बारिश की बूंदों से कैसे फालती है खुशबू?
बारिश की बूंदें जैसे ही जमीन पर गिरती है, तो वह अपने नीचे हवा के छोटे-छोटे बुलबुले कैद कर लेती है। ये बुलबुले ऊपर की उठते हैं और पानी को छूते ही फूटते हैं, जिससे मिट्टी में मौजूद जियोस्मिन और प्लांट ऑयल हवा में दूर-दूर तक फैल जाते हैं और एक सोंधी सी खुशबू आने लगती है।
इवॉल्यूशन के दृष्टि से भी इंसानों की नाक जियोस्मिन के लिए काफी सेंसिटिव होती है। इसलिए बारिश की बूंदे पड़ते ही मिट्टी से खुशबू आने लगती है। ऐसा माना जाता है कि जियोस्मिन की ये खुशबू हमारे पूर्वजों को पानी के सोर्स का पता लगाने में मदद करती है।