क्लब छोड़कर पॉटरी क्लास क्यों जा रही है Gen-Z, क्यों बदल रहा है युवाओं का वीकेंड कल्चर
जेन-जी अब वीकेंड पर पॉटरी या डांसिंग जैसी हॉबीज अपना रही है, जो मेंटल हेल्थ के लिए काफी जरूरी है। ...और पढ़ें
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जेन-जी क्यों अपना रही है नई हॉबीज? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में जहां हमारी उंगलियां दिन भर स्मार्टफोन की स्क्रीन पर फिसलती रहती हैं, वहीं युवाओं के बीच एक नया और दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है।
आज की युवा जेनरेशन केवल पब या क्लब जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पॉटरी, पेंटिंग और डांसिंग क्लास जॉइन कर रही है। लेकिन आखिर इस हॉबी कल्चर के अचानक बढ़ने के पीछे कारण क्या है?
डिजिटल डिटॉक्स और मानसिक शांति
आज की पीढ़ी डिजिटल फटीग यानी थकान का सामना कर रही है। दिन भर लैपटॉप पर काम और सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन के बीच, पॉटरी या आर्ट जैसी हॉबीज एक ब्रेक की तरह काम करती हैं। पॉटरी क्लास जॉइन करना या पेंटिंग बनाना माइंडफुलनेस का एक तरीका है, जो तनाव को कम करने और मानसिक शांति हासिल करने में मदद करता है।

(AI Generated Image)
क्रिएशन की खुशी
हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां सब कुछ वर्चुअल है। ऐसे में अपने हाथों से कुछ बनाना संतोष का एहसास कराता है। अपनी बनाई हुई पेंटिंग को दीवार पर टांगना या खुद से बनाए कप में कॉफी पीना सेंस ऑफ अचीवमेंट पैदा करता है। यह क्रिएटिव सैटिस्फेक्शन ऑफिस की थकान के बीच उपलब्धि की भावना महसूस करवाता है।
नए सामाजिक दायरे
कोविड-19 के बाद अकेलेपन की भावना बढ़ी है। पॉटरी स्टूडियो या डांसिंग क्लास ऐसी जगहें हैं जहां एक जैसी हॉबी वाले लोग मिलते हैं। यहां बातचीत सिर्फ काम या करियर तक सीमित नहीं होती, बल्कि कला और शौक पर फोकस होती है। यह युवाओं को एक ऐसा कम्युनिटी स्पेस देता है जहां वे बिना किसी जजमेंट के नए दोस्त बना सकते हैं और सोशल कनेक्शन बना सकते हैं।
स्लो लिविंग का बढ़ता चलन
तेजी से भागती जिंदगी में स्लो लिविंग का कॉन्सेप्ट युवाओं को आकर्षित कर रहा है। पॉटरी जैसी कला में धैर्य की जरूरत होती है; यहां आप जल्दबाजी नहीं कर सकते। यह प्रक्रिया उन्हें धैर्य सिखाती है और अपने आज में जीना सिखाती है। डांसिंग जैसी हॉबीज उन्हें अपने शरीर के साथ जुड़ने का मौका देती हैं, जो स्क्रीन के सामने बैठकर मुमकिन नहीं है।
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करियर और हॉबी के बीच बैलेंस
आज के युवा केवल 9 से 5 की नौकरी को अपनी पहचान नहीं मानते। वे अपनी पर्सनैलिटी के अलग-अलग पहलुओं को तलाशना चाहते हैं। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात में एक बेहतरीन सालसा डांसर हो सकता है, या एक मार्केटर वीकेंड पर पेंटिंग सिखा सकता है। यह हॉबी कल्चर उन्हें बर्नआउट होने से बचाता है।