परफेक्ट पेरेंट बनने के चक्कर में बर्नआउट का न हो जाएं शिकार, बचाव के लिए अपनाएं 5 टिप्स
पेरेंटिंग बर्नआउट तब होता है जब माता-पिता शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से थक जाते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन और बच्चों से दूरी महसूस होती है। इससे बचन ...और पढ़ें

पेरेंटल बर्नआउट से कैसे बचें? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। माता-पिता बनना दुनिया के सबसे सुखद अनुभवों में से एक है, लेकिन इसके साथ आने वाली जिम्मेदारियां कभी-कभी थका देने वाली हो सकती हैं।
जब एक माता-पिता शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह खाली महसूस करने लगते हैं, तो इसे पेरेंटल बर्नआउट कहा जाता है। इसमें चिड़चिड़ापन, बच्चों से इमोशनली दूरी होना और हर समय थकान महसूस होना जैसे लक्षण दिखते हैं।
पेरेंटल बर्नआउट से बचना जरूरी है, क्योंकि अगर आप बेहतर महसूस नहीं करेंगे, तो बच्चों की ठीक से देखभाल करना भी मुश्किल हो जाएगा। आइए जानें इससे बचने के लिए कुछ आसान टिप्स।
परफेक्ट पेरेंट बनने का दबाव छोड़ें
सोशल मीडिया के दौर में हम अक्सर दूसरे माता-पिता की परफेक्ट तस्वीरों को देखकर खुद की तुलना करने लगते हैं। यह समझना जरूरी है कि कोई भी पेरेंट परफेक्ट नहीं होता। कभी-कभार घर बिखरा होना या खाने में कुछ साधारण बनाना पूरी तरह ठीक है। हर काम को एक ही दिन में पूरा करने की कोशिश न करें। सबसे जरूरी कामों की लिस्ट बनाएं और बाकी चीजों को कल के लिए छोड़ दें।
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(Picture Courtesy: Freepik)
खुद के लिए मी-टाइम निकालें
एक खाली घड़े से आप दूसरों की प्यास नहीं बुझा सकते। बच्चों का ख्याल रखने के लिए आपका खुद का एनर्जेटिक होना जरूरी है। दिन भर में कम से कम 15-20 मिनट ऐसा काम करें जो आपको पसंद हो, चाहे वह किताब पढ़ना हो, म्युजिक सुनना हो या बस शांति से चाय पीना। खुद के लिए समय निकालना स्वार्थ नहीं, बल्कि एक जरूरत है ताकि आप बेहतर तरीके से पेरेंटिंग कर सकें।
जिम्मेदारी बांटना करना सीखें
पेरेंटिंग कोई सोलो मिशन नहीं है। सब कुछ अकेले करने की कोशिश आपको जल्दी थका देगी। घर के कामों और बच्चों की जिम्मेदारी को आपस में बांटें। अगर हो सके, तो परिवार के अन्य सदस्यों, दोस्तों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की मदद लेने में संकोच न करें। कभी-कभी बच्चों को दादा-दादी या नानी के पास छोड़ने से आपको मानसिक रूप से आराम मिल सकता है।
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अपनी सेहत को प्राथमिकता दें
मानसिक थकान का सीधा कनेक्शन शारीरिक स्वास्थ्य से होता है। जब शरीर थका होता है, तो दिमाग तनाव नहीं झेल पाता है। बच्चों के सोने के बाद देर रात तक फोन चलाने के बजाय अपनी नींद पूरी करने की कोशिश करें। हेल्दी डाइट लें और हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करें। फिजिकली एक्टिव रहने से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो तनाव कम करने में मदद करते हैं।
बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम
दिन भर बच्चों के साथ रहने और उनके पीछे भागने से बेहतर है कि आप उनके साथ कुछ समय बिना किसी डिस्ट्रेक्शन के बिताएं। जब आप बच्चों के साथ दिल से जुड़ते हैं, तो पेरेंटिंग बोझ नहीं लगती है। छोटे-छोटे पलों का आनंद लें, जैसे साथ में कहानी पढ़ना या पार्क में टहलना।