‘लोगवा देत काहे गारी’: फूलों से नहीं, गालियों से होता है बिहार में दूल्हे का स्वागत, श्रीराम से जुड़ी है कहानी
बिहार की शादियों में में दूल्हे और उसके परिवार के स्वागत के लिए गारी गीत गाए जाते हैं। इन गीतों को गाने की परंपरा काफी पुरानी है। ...और पढ़ें

क्यों गाए जाते हैं बिहार की शादियों में गारी गीत? (AI Generated Image)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शादी में दो परिवारों का मिलन होता है, लड़की वाले दूल्हें और उसके परिवार का सत्कार करते हैं और मंगल गीत गाकर उनका स्वागत करते हैं, लेकिन बिहार की शादियों में स्वागत करने का अंदाज कुछ अलग है। यहां दूल्हे का स्वागत तारीफों से नहीं, बल्कि गालियों से होता है।
जी हां, बिहारी शादियों में दूल्हे और उसके परिवार के स्वागत में दुल्हन पक्ष की महिलाएं गालियां सुनाती हैं और वो भी गाकर। सुनने में हैरान करने वाला लग रहा है, लेकिन बिहार की संस्कृति में ये गारी गीत दूल्हे का अपमान करने के लिए नहीं गाए जाते। इन गीतों के पीछे ढेर सारा प्यार, हंसी-मजाक और अपनापन छिपा होता है। आइए जानें कि ये हैरान करने वाली रस्म कैसे शुरू हुई और क्यों शादी में दूल्हे और उसके परिवार को गालियां सुननी पड़ती हैं।
श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़ी है रस्म
बिहार की शादियों में गाली देने की परंपरा कोई आज की नहीं है। माना जाता है कि ये परंपरा रामायण काल से चली आ रही है और इसकी शुरुआत मिथिला यानी सीता माता के घर से शुरू हुई थी। कहते हैं कि जब श्रीराम बारात लेकर जनकपुर पहुंचें, तो वहां की महिलाओं ने उनके स्वागत में पारंपरिक आदर-सत्कार के साथ-साथ मीठे तंज और गारी गीत गाए थे।
राम जी से पूछे जनकपुर के नारी… जैसे गीत इस कहानी का वर्णन करते हैं कि जब श्रीराम, माता सीता से शादी करने मिथिला पहुंचे, तब वहां कि महिलाओं ने उन्हें और उनके परिवार पर खूब मीठे तंज कसे थे और उन्होंने मुस्कुरा कर इसे सत्कार को स्वीकार किया था।
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वरपक्ष का अहंकार तोड़ते हैं ये गीत
हिंदू धर्म में वरपक्ष को हमेशा ऊंचा दर्जा दिया जाता है। इसलिए मिथिला की महिलाओं ने इस अहंकार को प्रेम से तोड़ने और दोनों पक्षों को बराबरी पर लाने के लिए ये अनोखी रस्म शुरू की। भगवान राम को गारी गीत सुनाकर ये संदेश दिया गया कि आप भले ही कहीं के राजकुमार होंगे, वीर योद्धा होंगे, लेकिन हमारे सामने आप एक याचक हैं, जो हमारी बेटी का हाथ मांगने आया है।
माना जाता है कि तभी से बिहार की शादियों में दूल्हे के माता-पिता, जीजा, फूफा और खुद दूल्हे पर भी मजाकिया तंज कसने के लिए गीत गाए जाते हैं।
शादी का तनाव कम करते हैं ये गीत
शादी-ब्याह के घर में काम का तनाव होता है और नए परिवार के स्वागत में कोई कमी न रह जाए, इसकी भी चिंता रहती है। ऐसे में ये गारी गीत माहौल को ठंडा करने के लिए गाए जाते हैं, ताकि दोनों परिवारों के बीच की झिझक खत्म हो जाए और सब एक दूसरे के साथ घुल-मिल सकें।
मर्यादा की सीमा में हंसी-मजाक
इन गारी गीतों में किसी भी तरह की अभद्रता को शामिल नहीं किया जाता और न ही वरपक्ष का सचमुच अपनाम किया जाता है। इनमें दूल्हे की खाने-पीने की आदतों, उनके सजने-धजने, कंजूस होने या संबंधियों के नखरों पर गीतों के जरिए तंज कसे जाते हैं। जैसे-
ई बूढ़ा बाबा के पाकल-पाकल दाढ़ी,
देखे में पातर, खाए भर थारी, बता द बबुआ…
ऐसे ही गीतों के जरिए दूल्हे और उसके संबंधियों के साथ हंसी-मजाक किया जाता है।