चिलचिलाती गर्मी में भी बिना चादर ओढ़े नहीं आती नींद? क्या है इस अजीब-सी आदत के पीछे का साइंस
कुछ लोगों को रात को बिना कुछ ओढ़े नींद नहीं आते, चाहे सर्दी हो या गर्मी। इस आदत के पीछे मनोविज्ञान से जुड़े कुछ दिलचस्प कारण हैं। ...और पढ़ें

क्या बिना कुछ ओढ़े आपको भी नहीं आती नींद? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बाहर का तापमान भले ही आग उगल रहा हो और कमरे में एसी या पंखा फुल स्पीड पर चल रहा हो, लेकिन जब तक शरीर पर चादर न हो, कुछ लोगों को नींद का आना नामुमकिन-सा लगता है। पहली नजर में यह बात थोड़ी अजीब जरूर लग सकती है कि भला इस चिलचिलाती गर्मी में कोई खुद को ढककर क्यों सोना चाहेगा?
आपको बता दें कि यह कोई सनक या पागलपन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा मनोविज्ञान छिपा है। आइए इस बारे में डॉ. आस्तिक जोशी (चाइल्ड एंड एडोल्सेंट एंड फॉरेंसिक साइकायट्रिस्ट, फॉर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग) से जानते हैं।
सुरक्षा का एहसास
मनोविज्ञान में एक टर्म है जिसे कम्फर्ट ऑब्जेक्ट कहा जाता है। बचपन में जैसे बच्चे अपने किसी खास खिलौने या तकिये को पकड़कर सोते हैं, ठीक वैसे ही बड़ों के लिए चादर एक कम्फर्ट ऑब्जेक्ट का काम करती है।
जब हम खुद को चादर से ढकते हैं, तो हमारा दिमाग सुरक्षित महसूस करता है। ऐसा माना जाता है कि चादर का हल्का दबाव हमारे शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे फील-गुड हार्मोन को रिलीज करने में मदद करता है, जिससे तनाव कम होता है और दिमाग शांत होता है। यह एहसास बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई हमें गले लगा रहा हो। इसके बिना, कई लोगों को असुरक्षित महसूस होता है, जिससे नींद उड़ जाती है।
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(AI Generated Image)
कंडीशनिंग और आदत
हमारा दिमाग पैटर्न्स पर काम करता है। बचपन से ही हमें रात को सोते समय चादर या कंबल ओढ़ने की आदत डाली जाती है। सालों की इस कंडीशनिंग के कारण, जैसे ही हम शरीर पर चादर डालते हैं, हमारे सबकॉन्शियस माइंड को एक सिग्नल जाता है कि अब सोने का समय हो गया है।
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गर्मी के दिनों में जब हम इस रूटीन को तोड़ने की कोशिश करते हैं और बिना चादर के सोते हैं, तो दिमाग को लगता है कि अभी कुछ कमी है, और वह स्लीप मोड में नहीं जा पाता।
शरीर का तापमान नियंत्रण
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन गर्मी में भी चादर तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है। सोते समय जब शरीर से हल्का पसीना निकलता है, तो एक सूती चादर उसे सोख लेती है, जिससे त्वचा चिपचिपी नहीं लगती।
आजकल लोग गर्मी में कूलर, पंखे या एसी चलाकर सोते हैं। रात के तीसरे पहर यानी सुबह 3 से 5 बजे के बीच हमारे शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से गिर जाता है। ऐसे में बिना चादर के सोने पर अचानक ठंड लग सकती है या ठंडी हवा सीधे शरीर पर लगने से सर्दी-जुकाम का खतरा रहता है। एक पतली चादर इस ठंडी हवा के सीधे संपर्क को रोकती है।