पुराने घरों की क्यों की जाती थी मिट्टी और गोबर से लिपाई? इसके पीछे की वजह जानकर हैरान हो जाएंगे आप
पुराने घरों में दीवार और फर्श की लिपाई की जाती थी। इसके पीछे कई व्यवहारिक कारण छिपे थे। ...और पढ़ें

पुराने घरों में दीवार और फर्श की लिपाई क्यों होती थी? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पुराने समय में गांव के घरों में दीवारों और फर्श की लिपाई की जाती थी। मिट्टी, गोबर और भूसे में पानी मिलाकर एक खास लेप तैयार किया जाता था और इससे दीवार और फर्श को लीपा जाता था। घर की महिलाएं नियमित रूप से घरों की लिपाई किया करती थीं।
ऐसे में सवाल आता है कि पुराने घरों में लिपाई क्यों की जाती थी। दरअसल, इसके पीछे कई जरूरी कारण छिपे थे। आइए जानें इन्हीं कारणों के बारे में कि क्यों पुराने घरों में लिपाई हुआ करती थी।
घर का तापमान नियंत्रित
पुराने समय में चौबीस घंटे बिजली नहीं रहती थी। ऐसे में घरों की लिपाई के लिए इस्तेमाल होने वाले मिट्टी और गोबर थर्मल इंसुलेशन का काम करते थे। आज के घर जैसे मई-जून में तपने लगते हैं, गोबर और मिट्टी से लिपे घरों में यह समस्या नहीं होती थी। मिट्टी और गोबर से लिपी दीवारें और फर्श बाहर की धूप से घर को बचाती थीं और अंदर का तापमान ठंडा रखती थीं। वहीं, सर्दी के मौसम में ये बाहर की ठंडी हवा को घर के अंदर आने से रोकते थे।
दीवारों की मजबूती
पुराने समय में ज्यादातर कच्चे घर हुआ करते थे। इन्हें बनाने के लिए मिट्टी का इस्तेमाल होता था, जो बारिश या वक्त के साथ कमजोर पड़ने लगती या उनमें दरारें आ जाती थीं। इसलिए घरों की नियमित रूप से लिपाई की जाती थी। मिट्टी, गोबर और भूसे से लिपाई करने से दीवारें लंबे समय तक मजबूत बनी रहती और दीवार झड़ने या टूटने का डर कम हो जाता था।
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धूल से बचाव
पुराने घरों में आज की तरह मार्बल की फर्श नहीं हुआ करती थी, बल्कि मिट्टी के फर्श हुआ करते थे। ऐसे में झाड़ू लगाते समय या चलते-फिरते समय पैरों में ज्यादा धूल न लगे। इसलिए फर्श की गोबर, भूसे और मिट्टी से लिपाई की जाती थी।
कीड़े-मकौड़ों को दूर रहते
मिट्टी के फर्श पर कीड़े-मकौड़े आसानी से छोटा गढ़ा बनाकर उनमें छिप सकते थे। इसलिए मिट्टी, गोबर और भूसे को मिलाकर लिपाई की जाती थी, ताकि अगर फर्श में छोटे गड्ढे हो भी, तो वो भर जाएं और कीड़े-मकौड़ों के छिपने के लिए जगह न बचे। साथ ही, गाय के गोबर में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं। इसलिए गोबर की लिपाई से कीटाणु पनप नहीं पाते थे और घर साफ रहता था।
पर्यावरण अनुकूल
पुराने समय में लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रकृति पर ही निर्भर रहते थे। इसलिए लिपाई में इस्तेमाल होने वाली चीजें आसानी से मिल जाती थीं। इन चीजों को जुटाने में न तो पैसे खर्च होते थे और न ही इनसे पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचता था। इसलिए पुराने समय में लोग घरों को लीपने के लिए मिट्टी, गोबर और भूसे का इस्तेमाल करते थे।