शादी आपकी, पसंद सोशल मीडिया की, इस तरह बदल रहा है हमारे यहां का वेडिंग कल्चर
सोशल मीडिया अब ट्रेडिशन पर भी हावी हो चला है, हम बात कर रहे हैं खर्चीली शादियों की जिन्हें बिग फैट वेडिंग कहा जाता है। ...और पढ़ें

सोशल मीडिया ने बदल दिया है शादियों का तरीका (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया और रील्स का बढ़ता ट्रेंड हम सभी की जिंदगी को इतना प्रभावित कर रहा है कि हमें क्या खाना है, क्या पहनना है, कैसे रहना है, यह हम सोशल मीडिया को ध्यान में रखकर तय कर रहे हैं। यही सोशल मीडिया अब ट्रेडिशन पर भी हावी हो चला है, हम बात कर रहे हैं शादियों की। महंगी और खर्चीली शादियों की जिन्हें बिग फैट वेडिंग कहा जाने लगा है। क्या आपको नहीं लगता कि सोशल मीडिया और रील्स के कल्चर ने शादियों के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है? चलिए इसपर थोड़ा डिटेल में बात करते हैं।
सोशल मीडिया ने बदल दिया है शादियों का तरीका
हम यहां सोशल मीडिया से शादियों के तरीके पर पड़ने वाले अच्छे और बुरे प्रभावों की बात करेंगे कि आखिर कैसे इसने वेडिंग पैटर्न में बदलाव किया।
1. ऑनलाइन न्योता
एक समय था जब शादी से पहले शादी के कार्ड बांटना एक बड़ी जिम्मेदारी होती थी, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। फिर इस बात का भी डर बना रहता था कि कहीं कोई खास छूट न जाए। लेकिन अब डिजिटल इन्विटेशन ने यह काम आसान कर दिया है।
2. डेस्टिनेशन वेडिंग
शादी पहले जितनी सादगी से की जाती थी, आज उतने ही धूम-धड़ाके के साथ की जाती है। मानो दिखावा करना ही शादी करने का मकसद हो। इन दिनों डेस्टिनेशन वेडिंग का बढ़ता ट्रेंड इसी तरफ इशारा कर रहा है।
3. विडियोग्राफी के बजाय रीलमेकिंग
अब लोग शादी की विडियोग्राफी करवाने के बजाय रील्स के लिए छोटे-छोटे क्लिप पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इसी वजह से फोटोग्राफर अपने पैकेज में खासतौर से रील्स शॉट्स को भी जोड़ रहे हैं क्योंकि यह आज की डिमांड है। शायद यही लाइफ को हैपनिंग दिखाने का एक तरीका बन गया है।
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4. फाइनेंशियल प्रेशर
सोशल मीडिया ने लोगों को शादियों में ज्यादा खर्च करने के लिए मजबूर कर दिया है। इंस्टाग्राम के लिए एस्थेटिक लुक रिवाजों से ज्यादा मायने रखने लगे हैं।
5. दुल्हन की ड्रमैटिक एंट्री
दुल्हन की ड्रमैटिक एंट्री का ट्रेंड इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऐसा लगता है आगे चलकर कहीं ये भी रिवाजों की लिस्ट में शामिल न हो जाए। पहले दुल्हन को सादगी से घूंघट में लाया जाता था तो वहीं अब ब्राइड बगैर नाच-गाने के एंट्री ही नहीं करती हैं।