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    क्या आप भी फेंक देते हैं चावल-दाल का पानी? किचन के कचरे से अपने गार्डन को बनाएं हरा-भरा

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 07:00 AM (IST)

    रसोई का कचरा फेंकने की जगह, उनका इस्तेमाल गार्डनिंग में किया जा सकता है। इसे जीरो-वेस्ट गार्डनिंग कहते हैं। ...और पढ़ें

    किचन वेस्ट से बनाएं ऑर्गेनिक खाद (Picture Courtesy: Freepik)

    किचन वेस्ट से बनाएं ऑर्गेनिक खाद (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं आपकी रसोई से निकलने वाला काफी कचरा गार्डनिंग में काफी काम आ सकता है? जी हां, रसोई से निकलने वाला ऑर्गेनिक कचरा, जैसे- सब्जियों और फलों के छिलके, चाय पत्ती, अंडे के छिलके आदि गार्डनिंग के काम आते हैं, जिसे जीरो-वेस्ट गार्डनिंग कहा जाता है। 

    यह तरीका पर्यावरण के लिए भी काफी अच्छा है और पौधों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आइए जानें रसोई के कचरे का इस्तेमाल जीरो-वेस्ट गार्डनिंग के लिए कैसे कर सकते हैं।  

    घर पर बनाएं कंपोस्ट

    रसोई से निकलने वाले फलों और सब्जियों के छिलके, बची हुई चायपत्ती और अंडे के छिलके नाइट्रोजन और कार्बन के बेहतरीन सोर्स हैं। इनसे कंपोस्ट बनाने के लिए एक बाल्टी या गमले में नीचे थोड़ी सूखी पत्तियां या मिट्टी डालें। इसके ऊपर रसोई का गीला कचरा डालें और इस प्रक्रिया को दोहराते रहें। कुछ ही हफ्तों में यह कचरा सड़कर काले रंग की ऑर्गेनिक खाद में बदल जाएगा। यह बाजार में मिलने वाले महंगे केमिकल फर्टिलाइजर से कई गुना बेहतर और सुरक्षित है।

    Zero Waste Gardening (1)

    (Picture Courtesy: Freepik)

    सीधे इस्तेमाल होने वाले जादुई किचन वेस्ट

    हर कचरे को खाद बनाने की जरूरत नहीं होती, कुछ चीजों को आप सीधे पौधों में डाल सकते हैं। इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर पौधों की मिट्टी में मिलाएं। यह मिट्टी को एसिडिक बनाती है, जिससे फूल ज्यादा खिलते हैं। यह गुलाब के पौधे के लिए खासकर फायदेमंद है।

    अंडों के छिलकों को धोकर, सुखाकर मिक्सी में पीस लें। यह पाउडर कैल्शियम का पावरहाउस है। इसे टमाटर और मिर्च के पौधों में डालने से फल सड़ने की समस्या दूर होती है। केले के छिलकों में पोटैशियम भरपूर मात्रा में होता है। इन्हें छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में दबा दें या पानी में 2-3 दिन भिगोकर रखें और वह पानी पौधों में डालें। इससे पौधों में फल-फूल तेजी से आते हैं।

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    बायो-एंजाइम और लिक्विड फर्टिलाइजर

    खट्टे फलों, जैसे- नींबू, संतरा, मौसमी के छिलकों को फेंकने की बजाय आप उनसे बायो-एंजाइम बना सकते हैं। इन छिलकों को पानी और थोड़े से गुड़ के साथ एक प्लास्टिक की बोतल में 3 महीने के लिए बंद करके रख दें। तैयार लिक्विड को पानी में मिलाकर पौधों पर स्प्रे करने से कीड़े-मकोड़े दूर रहते हैं और पौधों को पोषण भी मिलता है। इसके अलावा, चावल और दाल धोने के बाद बचे हुए पानी को फेंकने की बजाय पौधों में डालें; यह स्टार्च और मिनरल्स से भरपूर होता है।

    कबाड़ से जुगाड़

    जीरो वेस्ट का मतलब सिर्फ कचरे को खाद बनाना नहीं, बल्कि प्लास्टिक और दूसरे बर्तनों को दोबारा इस्तेमाल करना भी है। रसोई में खाली हुए प्लास्टिक के डिब्बे, तेल की केन और पानी की बोतलें को काटकर सुंदर गमले बनाए जा सकते हैं। खराब हो चुके कप, कढ़ाई या प्लास्टिक की टोकरियों में छोटे-छोटे इनडोर प्लांट्स या धनिया-पुदीना जैसी पौधे आसानी से उगाए जा सकते हैं।